कैलेंडर का पूरा इतिहास मौसमों के चक्र की समझ से जुड़ा हुआ है।2000 साल के इतिहास में कैलेंडर में बहुत से संशोधन करने पड़े थे।ऐसा इसलिए भी था क्योंकि हम बहुत धीरे-धीरे ये जान पाए थे कि कि हमारी पृथ्वी सूरज का एक चक्कर ठीक-ठीक कितने समय में लगाती है।वैसे एक साल का हिसाब बनाने के लिए चांद भी बहुत काम आया।बहरहाल इसी आधार पर दुनिया के तमाम देशों ने अपने-अपने कैलेंडर बनाएं।दुनिया में इस समय सैकड़ों कैलेंडर अस्तित्व में हैं, जिसमें भारतीय पंचांग भी शामिल हैं।