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अमेरिकी शख्स ने भारतीय खाने पर उठाया सवाल, मिला ऐसा जवाब कि चुप हो गए 'प्रोफेसर साहब'

Fri, 29 Nov 2019 10:21 AM IST
Nilesh Kumar बीबीसी
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
आम तौर पर भारतीय खानपान की दुनिया भर में तारीफ होती है, लेकिन इस बार उसकी आलोचना करने को लेकर दुनिया भर में बवाल मच गया है। एक अमरीकी शिक्षाविद् ने भारतीय भोजन को 'बकवास' करार दिया और अंतरराष्ट्रीय खानपान जगत में सांस्कृतिक असहिष्णुता और नस्लवाद से जुड़ी बहस को हवा मिल गई।
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food - फोटो : social media
अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रोफेसर टॉम निकोल्स ने लिखा कि भारतीय खानपान बकवास है और हम ऐसे जताते हैं कि वो बकवास नहीं है।निकोल्स की आलोचना करने वालों का कहना है कि ये निराधार है। 

इस टिप्पणी के बाद प्रवासियों के अनुभवों को लेकर चर्चा छिड़ी ही, साथ ही अमरीका में कितने लोगों ने खानपान को लेकर नस्लवाद का सामना किया, इस पर भी बहस शुरू हुई।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
रोड आइलैंड के यूएस नेवल वॉर कॉलेज में पढ़ाने वाले निकोल्स ने ये बयान तब दिया था, जब एक टि्वटर यूजर ने 'खाने को लेकर विवादित मत' जाहिर करने की बात कही थी।

और इस टिप्पणी के तुरंत बाद तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। सेलेब्रिटी शेफ पद्मा लक्ष्मी ने लिखा कि क्या आपकी जबान जायका नहीं समझती?''  एक अन्य यूज़र ने लिखा कि कल्पना कीजिए कि पूरी जिंदगी बेस्वाद गुजारनी पड़ी।

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खाना - फोटो : फाइल
न्यूयॉर्क के एक पूर्व सरकारी वकील प्रीत भरारा ने ट्वीट किया, ''टॉम, मैं तुम्हें एक शानदार जगह लेकर चलूंगा। हमें इस देश को एकजुट बनाना है। #ButterChickenSummit''

दूसरों ने कहा कि निकोल्स ने शायद भारतीय व्यंजनों में से 'एक फीसदी से भी कम' का स्वाद लिया है। उन्होंने बाद में खुद भी स्वीकार किया कि उन्होंने केवल अमरीकी और ब्रिटिश भारतीय रेस्तरां में खाना खाया है।
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food
निकोल्स के शुरुआती ट्वीट ने इस ओर भी ध्यान दिलाया कि प्रवासियों के जीवन में खाना क्या भूमिका अदा करता है। कुछ का कहना था कि अमरीका में अंतरराष्ट्रीय व्यंजनों को कई बार 'एथनीक फूड' कहा जाता है और साथ ही 'सस्ता' भी। इसलिए कई लोग 'भारतीय स्ट्रीट फ़ूड के उन अमरीकी वर्ज़न' से वाक़िफ़ हैं, जिनमें असली भारतीय स्वाद नहीं बसता।

एक यूजर ने लिखा, ''असल में कोई 'भारतीय' खाना नहीं है। ''इसी तरह कोई करी फ्लेवर नहीं होता। ना ही कोई चाय टी होती है।'' उन्होंने बताया कि चाय दरअसल टी का हिन्दी अनुवाद है और करी, डिश की किस्म है, ना कि कोई फ्लेवर।
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अन्य लोग इस बारे में भी बात कर रहे हैं कि कैसे अल्पसंख्यकों के प्रति नस्लवादी टिप्पणियों में खाने के गंध और स्वाद का जिक्र लंबे समय से होता रहा है और वे निकोल्स पर असहिष्णुता का आरोप लगाते हैं।

सायरा राव लिखती हैं, "मुझसे कहा जाता है कि मुझमें से अजीब गंध आती है, मेरे खाने से अजीब गंध आती है कि भारतीय सड़कों पर रहते हैं इसलिए हमारा सबकुछ ख़राब होता है।"  सायरा के मां-बाप प्रवासी हैं और उनका जन्म अमरीका में हुआ है।
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जैसे ही इस स्टोरी ने भारतीय मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा, हैशटैग #MyFavoriteIndianFood सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा।

इस हैशटैग के साथ अमरीकी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवाद कमला हैरिस ने खाना बनाने की वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। कमला की मां के परिवार का ताल्लुक दक्षिण भारत से है।

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south indian food - फोटो : Social Media
खान-पान का शौक रखने वाले कुछ लोगों ने इस विवाद को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है और भारतीय व्यंजनों से भरी थाली का फोटो शेयर करते हुए लिखा है, "मैं देख रहा हूं कि ट्विटर पर किसी ने भारतीय भोजन के बारे में नस्लवादी विचार रखे हैं। खैर यह (व्यंजन से भरी थाली) मेरे लिए काफी है।"

एबीसी न्यूज के सीनियर रिपोर्टर टेरी मोरन ने कहा था कि "चाइनीज फूड एक थका हुआ भोजन है। यह काफी उबाऊ, अधिक नमक और पूरी तरह से भूलने वाला भोजन है।"
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food - फोटो : pixa
उनकी इस टिप्पणी पर भी लोगों ने सवाल उठाया था। एक व्यक्ति ने उनकी इस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा था कि इनकी जानकारी काफी कम है और ये "पूरे भोजन और असंख्य क्षेत्रीय किस्मों को नजरअंदाज" कर रहे हैं।

एशियन फूड को पंसद करने वाले लोगों ने मोरन पर आरोप लगाया कि वो रेस्टोरेंट के खाने के आधार पर पूरे व्यंजन पर टिप्पणी कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने वहां का कभी असली स्वाद नहीं चखा होगा, जहां दुनिया की सबसे बड़ी आबादी रहती है।
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