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नवरात्रि पंचमी तिथि: नवरात्रि का पांचवां दिन मां स्कंदमाता को समर्पित, आज चढ़ाएं उनका प्रिय भोग

Thu, 15 Oct 2026 06:30 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Maa Skandamata Bhog Recipe: नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा करना देवी दुर्गा की आराधना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दिन भक्त केले, खीर और अन्य सात्विक पकवानों का भोग अपनी परंपरा के अनुसार अर्पित कर सकते हैं। केले का भोग लगाना आसान है और इसके लिए किसी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं होती।

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मां स्कंदमाता का प्रिय भोग नवरात्रि के पांचवे दिन अर्पित करें - फोटो : AI

Navratri Day 5 Maa Skandamata Bhog Recipe : शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता को समर्पित होता है। नवरात्रि के नौ दिनों में हर दिन देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता की पूजा करने से भक्तों को सुख, शांति, समृद्धि और संतान सुख का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

मां स्कंदमाता को ममता, करुणा और वात्सल्य का प्रतीक माना जाता है। उनकी गोद में भगवान कार्तिकेय विराजमान रहते हैं, जिन्हें स्कंद के नाम से भी जाना जाता है। इसी कारण देवी के इस स्वरूप का नाम स्कंदमाता पड़ा।

नवरात्रि के पांचवें दिन भक्त मां स्कंदमाता को प्रसन्न करने के लिए विधि-विधान से पूजा करते हैं और फल, मिठाई तथा सात्विक पकवानों का भोग लगाते हैं। केले को मां स्कंदमाता की पूजा में विशेष रूप से अर्पित किए जाने वाले फलों में शामिल माना जाता है।

इसके अलावा श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार दूध से बनी मिठाइयां, खीर और अन्य सात्विक प्रसाद भी चढ़ाते हैं। अगर आप भी नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा करने वाले हैं, तो जानिए उनके प्रिय भोग से जुड़ी मान्यताएं, पूजा का महत्व और घर पर प्रसाद तैयार करने का आसान तरीका।

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maa skandmata - फोटो : अमर उजाला

मां स्कंदमाता को कौन-सा भोग लगाना चाहिए?

धार्मिक परंपराओं में मां स्कंदमाता को केले का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। केला एक ऐसा फल है, जिसे पूजा-पाठ और कई धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल किया जाता है। नवरात्रि के पांचवें दिन मां को ताजे केले अर्पित करके भक्त अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

इसके अलावा मां स्कंदमाता को दूध, खीर और अन्य सात्विक मिठाइयों का भोग भी लगाया जा सकता है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भोग की परंपराएं अलग हो सकती हैं। इसलिए पूजा करते समय अपने घर की परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं का ध्यान रखना चाहिए।

मां को भोग अर्पित करते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। प्रसाद तैयार करने के लिए शुद्ध सामग्री का इस्तेमाल करें और मन में श्रद्धा रखते हुए देवी को भोग लगाएं। धार्मिक आस्था में भोग का महत्व केवल पकवान से नहीं, बल्कि भक्त की भावना और समर्पण से भी जुड़ा होता है।

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केले के फायदे - फोटो : Freepil.com

मां स्कंदमाता के लिए बनाएं केले की आसान प्रसाद रेसिपी

नवरात्रि के पांचवें दिन आप मां स्कंदमाता को केले का भोग आसानी से अर्पित कर सकते हैं। यदि आप कुछ अलग बनाना चाहते हैं, तो केले और दूध से तैयार की जाने वाली सात्विक मिठाई भी एक अच्छा विकल्प हो सकती है।

सामग्री

  • 2 पके हुए केले

  • 1 कप दूध

  • 1 छोटा चम्मच चीनी या स्वादानुसार मिश्री

  • 1 छोटा चम्मच कटे हुए बादाम (वैकल्पिक)

  • 2-3 इलायची के दाने, पिसे हुए (वैकल्पिक)

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केले की रेसिपी - फोटो : AI

बनाने की विधि

स्टेप 1- 
सबसे पहले केलों को अच्छी तरह धोकर छील लें और छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें।
स्टेप 2- एक साफ बर्तन में दूध गर्म करें। दूध को धीमी आंच पर कुछ देर पकने दें।
स्टेप 3- अगर आप मिठास पसंद करते हैं, तो इसमें थोड़ी मिश्री या चीनी मिला सकते हैं।
स्टेप 4- दूध को हल्का ठंडा होने दें और फिर केले के टुकड़े डालें।
स्टेप 5- स्वाद और खुशबू के लिए थोड़ी इलायची और कटे हुए बादाम डाल सकते हैं।
स्टेप 6- तैयार प्रसाद को एक साफ कटोरी में निकाल लें। पूजा के समय इसे मां स्कंदमाता को अर्पित करें।

 

 

 

 

 

 

 

 

ध्यान रखें कि यह एक आसान घरेलू प्रसाद रेसिपी है। पूजा के लिए केवल केले अर्पित करना भी पर्याप्त है। भोग बनाते समय अपनी पारिवारिक परंपरा और व्रत के नियमों का पालन करें।

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Maa Skandmata - फोटो : Adobe stock

मां स्कंदमाता की पूजा कैसे करें?

नवरात्रि के पांचवें दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें। इसके बाद मां दुर्गा और मां स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। देवी को फूल, अक्षत, फल और अपनी परंपरा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।

मंत्र का जाप करने के बाद मां की आरती करें और तैयार भोग श्रद्धापूर्वक अर्पित करें। पूजा पूरी होने पर प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों में बांट सकते हैं। नवरात्रि के दौरान व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपने स्वास्थ्य और परंपरा के अनुसार ही भोजन करना चाहिए। पूजा में सात्विकता, स्वच्छता और श्रद्धा का विशेष महत्व माना जाता है।


मां स्कंदमाता की पूजा से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं

मां स्कंदमाता को भगवान कार्तिकेय की माता के रूप में पूजा जाता है। उन्हें सिंह पर विराजमान और गोद में बाल स्कंद को धारण किए हुए दर्शाया जाता है। देवी का यह स्वरूप मातृत्व, प्रेम, करुणा और शक्ति का संदेश देता है।

मान्यता है कि मां स्कंदमाता की आराधना से भक्तों को मानसिक शांति और सकारात्मकता मिलती है। श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना से भी उनकी पूजा करते हैं। नवरात्रि का यह दिन भक्तों को अपने जीवन में प्रेम, धैर्य और सेवा की भावना अपनाने की प्रेरणा देता है।

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