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Induction Cooktop: बिना आग के खाना तैयार, जानिए इंडक्शन कुकटाॅप कैसे काम करता है

Wed, 08 Apr 2026 10:12 AM IST
Shivani Awasthi लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Flame Free Cooking: अपनी रसोई को भविष्य के लिए तैयार करें। आज जब दुनिया ऊर्जा के गंभीर संकट से गुजर रही है, तब ‘इंडक्शन कुकटॉप’ एक भरोसेमंद साथी बनकर उभरा है। यह तकनीक सुरक्षित भी है और सुविधाजनक भी।
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एलपीजी और इंडक्शन के फायदे - फोटो : एआई जनरेटेड
induction cooktop benefits: आज जब दुनिया के नक्शे पर युद्ध की लपटें दिखाई दे रही हैं, तो उसका सीधा असर सरहदों से दूर हमारी रसोई की चौखट तक आ पहुंचा है। अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच संघर्ष और वैश्विक अस्थिरता ने रसोई गैस की सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इसे इतिहास का सबसे भीषण ऊर्जा संकट माना है। ऐसे में एक आम गृहिणी के लिए गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतें और उसकी किल्लत केवल एक आर्थिक बोझ नहीं, बल्कि मानसिक चिंता का सबब बन गई हैं। इसी अनिश्चितता ने हमें मजबूर किया है कि हम अपनी रसोई के पारंपरिक तरीकों पर दोबारा विचार करें।

आज इंडक्शन कुकटॉप केवल एक आधुनिक उपकरण नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में आत्मनिर्भरता का सबसे भरोसेमंद साथी बनकर उभरा है। भारतीय महिलाओं के लिए ‘स्मार्ट किचन’ अब सिर्फ एक फैशन नहीं, बल्कि वक्त की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है।
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induction cooking - फोटो : Adobe stock
कैसे करता है काम

इंडक्शन कुकटॉप देखने में भले ही साधारण लगे, लेकिन इसके पीछे का विज्ञान बेहद रोचक और जादुई है। जब आप अपने कुकटॉप को चालू करती हैं, तो सिरेमिक ग्लास के नीचे स्थित तांबे की कुंडली में करंट प्रवाहित होने लगता है, जिससे उसके चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र बनता है। जब कुकटॉप पर इंडक्शन के अनुकूल कोई बर्तन रखा जाता है, तो चुंबकीय क्षेत्र बर्तन के अंदर विद्युत धारा उत्पन्न करता है, जिससे बर्तन खुद एक 'हीटर' में बदल जाता है।

वैज्ञानिकों ने इसे चुंबकीय प्रेरण (मैग्नेटिक इंडक्शन) के सिद्धांत पर बनाया है। इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें तापमान बहुत तेजी से घटता और बढ़ता है। पानी और खाना न केवल जल्दी गरम होते हैं, बल्कि बर्तन हटाते ही सतह तेजी से ठंडी हो जाती है। चूंकि विद्युत चुंबकीय तरंगें केवल खास धातुओं के साथ क्रिया करती हैं, इसलिए आपको स्टील या कच्चा लोहा (कास्ट आयरन) जैसे बर्तनों का उपयोग करना होगा। आप घर पर एक छोटा सा टेस्ट कर सकती हैं- बर्तन के तले पर एक चुंबक लगाकर देखें, अगर चुंबक चिपक जाए तो वह बर्तन इंडक्शन के लिए तैयार है।
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इंडक्शन कुकर - फोटो : एआई जनरेटेड
सुरक्षित भी है

एक गृहणी के लिए रसोई में सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा की होती है। इस मामले में इंडक्शन कुकटॉप गैस चूल्हे से कहीं आगे है। इसमें खुली आग नहीं होती, जिससे पल्लू जलने या गर्मी से परेशान होने का डर नहीं रहता। गैस लीक का खतरा शून्य है और इसकी सतह ठंडी रहती है, जिससे खाना बनाते समय हाथ जलने की आशंका भी न्यूनतम हो जाती है।

सफाई के मामले में यह महिलाओं का सबसे बड़ा दोस्त है, बस गीले कपड़े से पोंछते ही यह चमक उठता है। आधुनिक मॉडल्स में ऑटो-शट ऑफ और चाइल्ड लॉक जैसे फीचर्स इसे बच्चों और बुजुर्गों वाले घरों के लिए वरदान बनाते हैं।

इसके अलावा, धुआं और कार्बन उत्सर्जन नहीं होने के कारण रसोई की हवा शुद्ध रहती है और दीवारों पर कालिख भी नहीं जमती। कुछ मॉडलों में टाइमर और तापमान नियंत्रक जैसी स्मार्ट सुविधाएं भी  आ रही हैं, जो खाना पकाने को और अधिक आसान और सुरक्षित बना रही हैं। कुल मिलाकर कह सकते हैं कि इंडक्शन कुकटॉप सुरक्षा, सफाई और सुविधा का आदर्श मिश्रण प्रस्तुत कर रहा है।

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induction cooking - फोटो : Adobe stock
हॉस्टल के बच्चों का साथी

आज इंडक्शन कुकटॉप केवल शहरी महिलाओं की पसंद नहीं रहा, बल्कि यह बाहर पढ़ रहे बच्चों का भी सहारा है। हॉस्टल या किराए के कमरों में रहने वाले छात्र और युवा पेशेवर, जो अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं, उनके लिए यह सबसे सुलभ साधन है।

आंकड़ों के अनुसार, लगभग 40 प्रतिशत घरों में इंडक्शन का उपयोग युवाओं और कामकाजी पेशेवरों द्वारा किया जा रहा है। छोटे अपार्टमेंट और व्यस्त जीवनशैली में, जहां समय की कमी है, वहां इसकी तेज गति और कम बिजली खपत इसे अनिवार्य बनाती है।

यह उन माताओं के लिए भी सुकून की बात है जिनके बच्चे अकेले रहकर अपना खाना खुद बना रहे हैं। इसके अलावा, इंडक्शन कुकटॉप की सफाई आसान होती है, और यह गैस की तुलना में अधिक सुरक्षित भी है। यह आधुनिक जीवन की तेज रफ्तार में भोजन तैयार करने का सुविधाजनक और भरोसेमंद विकल्प साबित हो रहा है।
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induction cooking - फोटो : Adobe stock
भविष्य है ‘स्मार्ट किचन’

आज की वैश्विक स्थिति सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम पूरी तरह पारंपरिक ईंधन पर निर्भर रह सकते हैं? शायद नहीं। इंडक्शन कुकटॉप इसी आत्मनिर्भरता का जवाब है। यह एक विकल्प के साथ आधुनिक जीवन-शैली की दिशा है। हालांकि, भारत में आज भी गैस चूल्हों का बड़ा प्रभाव है, क्योंकि वे सस्ते हैं। मिट्टी के बर्तनों या साधारण एल्युमिनियम का उपयोग इंडक्शन पर न हो पाना इसकी एक सीमा जरूर है, लेकिन बढ़ती बिजली उपलब्धता और पर्यावरण के प्रति जागरूकता इसे भविष्य का इकलौता विकल्प बना रही है।
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induction - फोटो : Adobe Stock
प्रमुख इंडक्शन कुकटॉप मॉडल्स

बॉश 800 सीरीज एनआईटी 8661 यूसी

इसमें 13 इंच का बड़ा हीटिंग एलिमेंट है। यह 17 पावर सेटिंग्स और 11 प्रीसेट तापमान विकल्पों के साथ आता है, जो कुकिंग को प्रोफेशनल टच देता है।

जीई प्रोफाइल पीएचपी 9036

यह 36 इंच का प्रीमियम मॉडल 19 पावर सेटिंग्स के साथ आता है। इसमें वाई-फाई और एप के जरिये तापमान को कंट्रोल करने की आधुनिक सुविधा है।

मीले केएम 7740 एफआर

यह अपनी मजबूती और टिकाऊपन के लिए जाना जाता है। इसमें खास ‘कीप-वार्म’ मोड है, जो खाने को परोसने तक गर्म रखता है।


इंडक्शन कुकटॉप की विकास यात्रा

20वीं सदी की शुरुआत

वैज्ञानिकों के मन में पहली बार इंडक्शन का विचार आया।

1906 और 1909

आर्थर बेरी और साइमन होहलफेल्ड ने इस तकनीक का पेटेंट करवाया।

1950 का दशक

जनरल मोटर्स ने पहली बार दिखाया कि कैसे बर्तन और स्टोव के बीच कागज रखकर भी पानी उबाला जा सकता है और कागज नहीं जलता।

1970 का दशक

वेस्टिंगहाउस इलेक्ट्रिक कॉर्पोरेशन ने इसे एक वास्तविक उत्पाद के रूप में बाजार में उतारा।

आज

यह तकनीक स्मार्ट कंट्रोल और हाई-स्पीड कुकिंग के साथ हर आधुनिक रसोई का हिस्सा बन चुकी है।
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