हर सिगरेट पीने वाले को मालूम होता हैं कि तंबाकू का सेवन उसकी सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह है। बावजूद लोग सिगरेट के धुएं के छल्ले बड़ी शान से उड़ाते हैं। सबकुछ मालूम होने के बाद भी आखिर लोग क्यों धूम्रपान करते हैं?आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह और लत को छोड़ने के लिए रिसर्च द्वारा सुझाई एक रेमिडी के बारे में।
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हेल्थ
प्रोफेसर रॉबर्ट वेस्ट लंदन के मशहूर यूनिवर्सिटी कॉलेज में सेहत से जुड़े मामलों का मनोविज्ञान पढ़ाते हैं। उन्होंने एक किताब लिखी है-The Smoke Free Formula. इसमें प्रोफेसर वेस्ट ने सिगरेट का नशा छोड़ने के कई नुस्खे सुझाए हैं।
पढ़ाई के शुरुआती दिनों में प्रोफ्रेसर वेस्ट तंबाकू के सख्त खिलाफ थे। वो दूसरों को भी समझाया करते थे कि सिगरेट न पिया करें मगर कॉलेज में वो भी इस नशे के शिकार हो गए। उन्होंने करीब तीन साल तक सिगरेट पी। लेकिन उनकी गर्लफ्रेंड को इस आदत पर ऐतराज था। इसीलिए उन्होंने सिगरेट पीना छोड़ दिया।
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हेल्थ
प्रोफेसर रॉबर्ट वेस्ट कहते हैं कि सिगरेट छोड़ने का शर्तिया फॉर्मूला है-गर्लफ्रेंड फॉर्मूला। अगर आपकी गर्लफ्रेंड को सिगरेट पीने से नफरत है, तो आप बड़ी आसानी से इस लत से छुटकारा पा लेंगे।
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हेल्थ
असल में तंबाकू में एक केमिकल होता है जिसका नाम है-निकोटिन। जब आप सिगरेट का धुआं अपने अंदर खींचते हैं, तो आपके फेफड़ों की परतें, इस धुएं से निकोटिन सोख लेती हैं। कुछ ही सेकेंड के अंदर ये निकोटिन आपके दिमाग की नसों तक पहुंच जाता है। इसके असर से दिमाग, डोपामाइन नाम का हार्मोन छोड़ता है जो कि अच्छा एहसास दिलाता है।
जब भी दिमाग डोपामाइन छोड़ता है, तो हमें बहुत मजा आता है। यूं लगता है कि हमें किसी काम का इनाम मिला है। यानी दिमाग को ये संकेत जाता है कि अगर आप सिगरेट पिएंगे, तो आपका दिमाग महसूस करेगा कि आपने बहुत अच्छा काम किया। हालांकि दिमाग ये जान-बूझकर नहीं करता ऐसा वो निकोटिन के असर से करता है। ॉ
कार्ल कहते हैं कि सिगरेट पीने वाले अपनी सेहत को जोखिम में इसलिए डालते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि खतरा दूर है।