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नाचोज के नखरे: सिनेमाहॉल में जमकर खाते हो, ये बनती कैसे है पता भी है!

Mon, 25 Dec 2017 09:15 AM IST
पुष्पेश पंत
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Nacho
मक्के के आटे से तैयार मैक्सिकन नाचोज का स्वाद तभी मजेदार लगता है, जब इसके साथ मिर्च की तीखी चटनी सालसा भी हो। ये इतने क्रिस्पी होते हैं कि आप स्नैक्स के तौर पर इन्हें खा सकते हैं। सालसा नहीं, तो टोमैटो केचअप या मायोनीज भी इसका स्वाद दोगुना कर सकते हैं।
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Nacho
जाड़े के मौसम में खाने-पीने की बहार रहती है। कभी गाजर का हलवा, तो कभी गोंद-मेथी के लड्डू। पंजाब में मक्के की रोटी और सरसों के साग का मुकाबला कोई और सौगात नहीं करती। मालवे में इन्हीं दिनों खाई-खिलाई जाती है मक्के की खीस। विदेशी जायके चख चुके भारतीय इस बात से अनजान नहीं कि मकई जितनी हमें प्रिय है, उतनी ही मैक्सिको वासियों को भी। मकई के आटे से तैयार किए जाने वाले टाकोज और नाचोज आलू की चिप्स की तरह भांति-भांति के स्वाद वाले पैकेटबंद बाजार में नजर आने लगे हैं। 
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Tacos
नाचो हो या टेको, दोनों को ही मक्के की चपटी रोटी से बनाया जाता है, जिसे तोरतिया कहते हैं। यदि रोटी को काटकर छोटे-छोटे तिकोनो के रूप में चिप्स की तरह सख्त परोसा जाए, तो इसे नाचोज कहते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि इग्नेशियस नाचोज नाम के एक रसोइये ने इन्हें 1940 के दशक के मध्य में ईजाद किया था। 

वैसे ईजाद शब्द का प्रयोग ठीक नहीं लगता, क्योंकि मकई और मकई के आटे का चलन मैक्सिको में यूरोप से हिस्पानियों के आने के पहले से होता आ रहा है। हां, चिप्स की तरह इन्हें किसी रायतेनुमा गाढ़ी चटनी के साथ पहले पहल किसी साहब ने परोसकर नाम कमाया हो सकता है। अक्सर नाचोज के साथ चीज डिप पेश किया जाता है, जिसका तीखापन मैक्सिको की प्रसिद्ध जैलपेनो मिर्ची की देन होता है।

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Tacos
टाकोज अर्द्धचन्द्र आकार के होते हैं और इनके लिए बेली जाने वाली टॉर्टिया रोटी बड़ी पूरी के आकार की होती है। पिज्जा की तरह पहले इसकी सतह पर टमाटर की चटनी बिछाई जाती है। फिर अपनी पसंद के अनुसार इसमें किस्म-किस्म के मांस की छोटी-छोटी कतरने या हरी सब्जियां और फल आदि के टुकड़े भर सकते हैं। इसे और चटपटा बनाने के लिए हरी चटनी, जिसे सालसा कहते हैं, इसमें ऊपर से डाली जा सकती है। मैक्सिको की यह गुझिया नरम कलेवर वाली भी होती है और इसे तलकर सख्त भी बना सकते हैं। 
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Tacos
टाकोज सड़क छाप खाना है जैसे, हमारे यहां चाट और स्पेन में टिन्चोस या तपास नामक खाद्य पदार्थ होते हैं। इन्हें अल्पाहार के रूप में बिना तकल्लुफ के हाथ से उठाकर चलते-फिरते खाया जा सकता है। पर यह सुझाना गलत होगा कि मैक्सिको वालों ने इसे स्पेन वालों से ग्रहण किया। लगता तो यह है कि हिस्पानी साम्राज्यवादी ही नकलची है।

कुछ पदार्थ ऐसे हैं, जो खासतौर पर टाकोज की शोभा बढ़ाते हैं जैसे, ग्वाकामोले नामक सलाद और एवोकाडो। एवोकाडो एक मजेदार फल है, जिसमें मिठास तो कम होती है, पर मुंह में डालते ही मक्खन या घी जैसी चिकनाहाट मन मोह लेती है। हल्की सी मादक सुगंध भी इसे जायकेदार बनाती है। पारंपरिक रूप से टाकोज में छोटी-छोटी मछलियां भरी जाती थीं, जिन्हें हल्के अचारी मसाले से मजेदार बनाया जाता था। 
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Tacos
मैक्सिकन किसी तरह के भी मांस से परहेज नहीं करते, परन्तु भारतवर्ष में, जो टाकोज लोकप्रिय है, उनमें अधिकतर चिकन चाट या बकरे का कीमा ही पिट्ठी के रूप में इस्तेमाल होता है। ग्वाकामोले चटनीनुमा सलाद है, जिसका मूल नाम मैक्सिको के आदिवासी भाषा से पैदा हुआ है। मोली शब्द का अर्थ सॉस से है और ग्वाका का मूल एवोकाडो से है। मलाई की मुलामियत वाला यह सॉस मायोनीज की तुलना में सेहतमंद समझा जाता है।
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Tacos
सालसा शब्द का अर्थ भी यही होता है। मैक्सिको के खान-पान में टमाटर, हरीमिर्च, प्याज, धनिया, जीरा और नमक को कूटकर इस तरह की गाढ़ी चटनी बनाई जाती है। इस चटपटी चटनी के रंगत वाले एक मध्य अमेरिकी लोकनृत्य का नाम भी सालसा रखा गया है। 
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