अपने बच्चों, छोटे भाई-बहनों या भांजी-भतीजे की चिंता करते हैं तो संभल जाएं। मोबाइल, टैबलेट, लैपटॉप जैसे इन गैजेट्स का जितने आराम से आप इस्तेमाल करते हैं और बच्चों को करने देते हैं वो उन मासूमों की सेहत के लिए खतरनाक है।
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आपके गैजेट आपके बच्चों के लिए बन रहे हैं खतरा, संभल जाएं
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3-4 साल की उम्र तक के बच्चों को आज कमरदर्द तक की शिकायत होती है। इन सब के पीछे मोबाइल पर गेम खेलना, टैबलेट इस्तेमाल करना, कंप्यूटर-लैपटॉप पर घंटों बिताना ही मुख्य कारण हैं।
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आजकल बच्चे बाहर खेल खेलने के बजाए सारा वक्त कार्टून देखने, ऑनलाइन गेम्स खेलने में बिता देते हैं। नतीजा यह होता है कि उनके सिर में दर्द होता है, आंख से पानी आता है।
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मां-बाप बच्चों के लिए ये उपकरण इसलिए खरीदते हैं क्योंकि या तो बच्चों के साथ कोई खेलने वाला नहीं होता, या वे चाहते हैं कि बच्चे तकनीक के साथ आगे बढ़ें। लेकिन इन सबके बीच वे भूल जाते हैं कि ये तकनीक उनकी सेहत समय ये पहले ही खराब कर देगी।
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पिछले कुछ सालों में बच्चों में गर्दन दर्द, कंधों में अकड़न, मांस पेशियों में सूजन के मामलें बढ़े हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वे घंटों तक हाथ में गैजेट पकड़ कर काम करते हैं। जाहिर है इससे कमर, रीढ़ की हड्डी में दर्द बढ़ता है और उनके उठने बैठने की मुद्रा बिगड़ती है।
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सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बच्चों को मानसिक नुकसान भी पहुंच रहे हैं। उनमें सुनने की क्षमता कमजोर पड़ रही है। वे लोगों से बात-चीत करने में पीछे रह जाते हैं क्योंकि ज्यादा समय तो गैजेट के साथ ही बिताते हैं।
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यहां तक कि बच्चे टीवी या ऑनलाइन शो देखे बिना खाना तक नहीं खाते। इन गैजेटों का बढ़ता उपयोग बच्चों के पूर्ण विकास में बाधा डाल रहा है। जितना वे बाहर निकल कर, शारीरिक गितविधियों के जरिए सीख पाएंगे, उतना गैजेट से नहीं।
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बाल मनोविशेषज्ञ अभिभावकों को सलाह देते हैं कि दोस्त के नाम पर बच्चों को गैजेट न दें। इससे बढ़िया उनके लिए कोई पालतू जानवर ले आएं, उन्हें बाहर खेलने जरूर भेजें और इस पर नियंत्रण रखें कि वे टीवी, लैपटॉप जैसी चीजों के साथ कितना समय बिता रहे हैं। उनकी सेहत सुधारनी है, तो यह जरूरी है।