इस टीम ने ऐसा ही एक अध्ययन तीन लाख 30 हजार पुरूषों पर किया और यहां भी हड्डियों के फ़्रैक्चर होने पर दूध पीने का कोई असर नहीं नज़र आया। साल 2015 में न्यूज़ीलैंड की एक टीम ने दूध के ही इस असर को समझने के लिए एक ट्रायल किया, जिसमें कुछ लोगों के आहार में कैल्शियम तत्वों वाली चीजों को जोड़ा गया। इस टीम ने ऐसे ही पुराने 15 अध्ययनों की भी दोबारा समीक्षा की और पाया कि दो सालों तक तो कैल्शियम से हड्डियों के घनत्व पर असर पड़ा है लेकिन दो साल बाद वक्त के साथ दूध से हड्डियों पर कुछ ख़ास फर्क नहीं पड़ता।
शरीर में कैल्शियम की आपूर्ति के लिए कैल्शियम सप्लिमेंट भी लिए जाते हैं, लेकिन उनके लंबे इस्तेमाल के खतरे भी हैं। न्यूज़ीलैंड की इस टीम ने कैल्शियम के सप्लिमेंट के असर को समझने के लिए 51 अन्य ट्रायल भी किए। इसमें सामने आया कि इनसे भी हड्डियों का मजबूत होना एक या दो साल बाद बंद हो जाता है। ये कैल्शियम सप्लिमेंट बढ़ती उम्र के साथ सिर्फ हड्डियों के मिनरल के नुकसान को कम कर सकता है या रोक सकता है।