Chhath Puja Dishes: इस लेख में छठ पूजा के पावन अवसर पर बनाए जाने वाले पांच प्रमुख पारंपरिक व्यंजनों के बारे में बताया जा रहा है, ताकि आप भी इन्हें बना सकें।
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छठ पूजा अवश्य बनते हैं ये 5 पकवान
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Chhath Puja Dishes: छठ पूजा भारत का एक पवित्र और पारंपरिक पर्व है, जो सूर्य देव और छठी मईया की आराधना के लिए समर्पित है। ये महापर्व विशेष रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और देशभर में बसे प्रवासी भारतीय समुदायों द्वारा बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य जैसे महत्वपूर्ण अनुष्ठानों से जुड़ा होता है।
छठ पूजा का सबसे पवित्र हिस्सा है इसमें बनाए जाने वाले सात्विक और पारंपरिक व्यंजन, जिन्हें छठी मईया को अर्पित किया जाता है। यहं हम आपको कुछ ऐसे ही पकवानों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें छठ पूजा पर बनाना अनिवार्य होता है। तो आइए जानते हैं छठ पूजा पर बनाए जाने वाले इन पांच पारंपरिक व्यंजनों का महत्व।
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ठेकुआ
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ठेकुआ
छठ पूजा का सबसे प्रमुख और प्रिय प्रसाद है ठेकुआ। इसे गेहूं के आटे, गुड़ या चीनी, घी और इलायची पाउडर से बनाया जाता है। ठेकुआ का आकार खास लकड़ी के सांचे से दिया जाता है और फिर इसे देसी घी या तेल में तला जाता है। ये प्रसाद सूर्य देव को अर्पित करने के बाद व्रती महिलाओं और परिवारजनों में बांटा जाता है।
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रसीया खीर
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रसीया खीर
गुड़ और चावल से बनी ये पारंपरिक खीर छठी मईया को अर्घ्य के समय अर्पित की जाती है। इसमें दूध की जगह गुड़ और देसी घी का प्रयोग किया जाता है जिससे इसका स्वाद बेहद सात्विक और सुगंधित होता है। रसीया खीर छठ पूजा के दूसरे दिन यानी खरना के अवसर पर विशेष रूप से बनाई जाती है।
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कसार
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कसार
कसार या कसार लड्डू चने के आटे (बेसन) को देसी घी में भूनकर और गुड़ मिलाकर बनाए जाते हैं। ये स्वादिष्ट, पौष्टिक और ऊर्जा से भरपूर होते हैं। कसार को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है और माना जाता है कि ये छठी मईया को बहुत प्रिय है।
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पूड़ी और चना दाल
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पूड़ी और चना दाल
सप्तमी के दिन व्रती स्त्रियां पूड़ी और चना दाल का भोजन ग्रहण करती हैं। इसे प्रसाद के रूप में भी तैयार किया जाता है। पूड़ी को गेहूं के आटे से बनाया जाता है और इसे देसी घी में तला जाता है। चना दाल को हल्के मसालों के साथ पकाया जाता है ताकि भोजन सात्विक रहे।
छठ पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, जिसमें कद्दू की सब्जी और चावल का प्रसाद बनाया जाता है। बिहार में कद्दू लौकी को कहा जाता है। कद्दू को सेंधा नमक और हल्दी के साथ पकाया जाता है। ये प्रसाद व्रतियों द्वारा नहाने के बाद शुद्धता के साथ ग्रहण किया जाता है, जिससे पूरे व्रत की पवित्रता शुरू होती है।