लिवर व किडनी के मरीजों के लिए करेले का अत्याधिक सेवन हानिकारक साबित हो सकता है। यह लिवर में एन्जाइम्स के निर्माण को बढ़ा देता है जिससे लिवर प्रभावित होता है।
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करेले के जूस में मोमोकैरिन नामक तत्व होता है जो पीरियड्स के फ्लो को बढ़ा देता है। गर्भावस्था के दौरान करेले के ज्यादा सेवन से गर्भपात का खतरा रहता है।
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कई बार इसके अधिक सेवन से प्रेगनेंसी के दौरान पीरियड्स की स्थिति भी पैदा हो सकती है। साथ ही करेले में एंटी लैक्टोलन तत्व भी होते हैं, जो गर्भावस्था के दौरान दूध बनने की प्रक्रिया में रुकावट लाता है।
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करेले में मौजूद तत्व फर्टिलिटी संबंधित दवाओं का प्रभाव खत्म कर देते हैं।
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वहीं करेले के बीजों में लेक्टिन नामक तत्व होता है जो आंतों तक प्रोटीन को पहुंचने नहीं देता।
अध्ययनों में पाया गया कि करेले के अत्याधिक सेवन से हेमोलाइटिक अनीमिया हो सकता है। हेमोलाइटिक अनीमिया में पेट दर्द, सिरदर्द, बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं।