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Happy Lohri 2020: यहां पढ़िए लोहड़ी का गीत और जानिए सुंदरी-मुंदरी की कथा

Mon, 13 Jan 2020 11:23 AM IST
ललित फुलारा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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lohri - फोटो : अमर उजाला
लोहड़ी पंजाब और हरियाणा का प्रमुख त्योहार है। हर साल मकर संक्रांति से एक दिन पहले देशभर में धूमधाम से लोहड़ी का त्योहार मनाया जाता है। यह फसल से जुड़ा हुआ त्योहार है और इस दिन सिख लोग फसल पकने की खुशी मनाते हैं। यह त्योहार नवविवाहित दंपति और घर आए नवजात शिशु के लिए के लिए महत्वपूर्ण है। इस दिन शाम को लकड़ियों की ढेरी पर पूजा के साथ लोहड़ी जलाई जाती है। पंजाब, हरियाणा और हिमाचल में नववधू और बच्चे की पहली लोहड़ी का विशेष महत्व होता है। इस दिन अग्नि के चारों ओर खड़े होकर लोकगीत गाए जाते हैं और नए धान के साथ खील, मक्का, गुड़, रेवड़ी और मूंगफली अग्नि में  अर्पित की जाती हैं। अग्नि के चारों तरफ परिक्रमा भी की जाती है।
 
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lohri - फोटो : अमर उजाला
वैसे तो लोहड़ी को लेकर दक्ष और भगवान कृष्ण से जुड़ी मान्यताएं भी प्रचलित हैं। लेकिन एक और मान्यता है जो अकबर के शासन काल के दौरान की है। कहा जाता है कि अकबर के शासन काल में दुल्ला भट्टी नाम का एक शख्स था जो कि पंजाब प्रांत में रहता था। दुल्ला भट्टी बहादुर योद्धा था। संदलबार नाम की एक जगह थी जहां गरीब घर की लड़कियों को अमीरों को बेच दिया जाता था। यह जगह अब पाकिस्तान में है। यहां एक किसान सुंदरदास रहता था जिसकी दो बेटियां सुंदरी और मुंदरी थीं। गांव का ठेकेदार जो कि मुगल था, सुंदरदास को खुद से बेटियों की शादी कराने के लिए धमाकता है। जब यह बात दुल्ला भट्टी को पता चली तो उसने ठेकेदार के खेत जला दिए और सुंदरी और मुंदरी की शादियां वहां करवाई जहां उनका पिता चाहता था। तभी से लोहड़ी का त्योहार मनाया जाता है।
 
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lohri - फोटो : अमर उजाला
दुल्ला भट्टी भाटी राजपूत यौद्धा था। वो अमीर लोगों से धन लूट कर गरीब लोगों की मदद करता था। हिंदू और सिख लड़कियों पर मुगलों और जमीदारों की बुरी नजर रहती थी और उनको वो अगवा कर लेते थे। दुल्ला भट्टी हिंदू और सिख लड़कियों के विवाह में मदद करता था। वो ऐसी लड़कियों का कन्यादान भी स्वयं करता था जो कि मुगलों द्वारा सताई गईं थीं। अकबर की फौज दुल्ला भट्टी को डाकू मानती थी। सुन्दरी और मुंदरी दोनों गरबी थीं। दुल्हा भट्टी ने इन दोनों लड़कियों की मदद की और अग्नि के चारों ओर फेरे लगवा कर इनका विवाह सम्पन्न करवाया। तभी से लोहड़ी मनाई जाती है।
 
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lohri - फोटो : अमर उजाला
लोहड़ी का पावन लोक गीत 
सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन विचारा हो, 
दुल्ला भट्ठी वाला हो, दुल्ले दी धी व्याही हो, 
सेर शक्कर पाई हो, कुड़ी दे जेबे पाई हो, 
कुड़ी दा लाल पटाका हो, कुड़ी दा सालू पाटा हो,
सालू कौन समेटे हो, चाचे चूरी कुट्टी हो, 
जमीदारां लुट्टी हो, जमीदारां सदाए हो, 
गिन-गिन पोले लाए हो, इक पोला घट गया,
ज़मींदार वोहटी ले के नस गया, इक पोला होर आया, 
ज़मींदार वोहटी ले के दौड़ आया, 
सिपाही फेर के लै गया, सिपाही नूं मारी इट्ट, भावें रो ते भावें पिट्ट,
साहनूं दे लोहड़ी,  तेरी जीवे जोड़ी
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