मकान बना लेना बड़ी बात नहीं है, न ही इसमें बहुत समय लगता है। बड़ी बात है मकान को घर बनाना। घर अपनों से बनता है, बच्चों, बड़े और बुजुर्गों के प्रेम से बनता है। वर्तमान जीवनशैली में संयुक्त परिवार की परंपरा कम होती जा रही है। पहले जहां घर-परिवार के बुजुर्गों का सर्वोच्च स्थान हुआ करता था, अब उसमें कमी आ रही है। छोटे परिवार की चाहत में लोग अपने बुजुर्गों से दूर हो रहे हैं। बच्चे दादा-दादी के प्यार से महरूम हो रहे हैं। हम आज जो भी हैं, घर के बुजुर्गों की ही बदौलत हैं। इसलिए हमें उनकी अनदेखी नहीं, बल्कि उनका सम्मान करना चाहिए। इसी के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से हर साल एक अक्तूबर को अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस मनाया जाता है। इसे अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस या विश्व प्रौढ़ दिवस भी कहा जाता है। आइए, इस अवसर पर अपने बुजुर्गों के प्रति सम्मान व्यक्त करते संदेशों के जरिए शुभकामनाएं भेजी जाए: