ट्यूबरक्लोसिस (तपेदिक रोग-टीबी) को गंभीर श्वसन संक्रमण माना जाता है, इसके कारण कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक बैक्टीरिया के कारण होने वाला टीबी का संक्रमण फेफड़ों को गंभीर क्षति पहुंचा सकती है। इस गंभीर रोग के रोकथाम को लेकर सरकार के लगातार प्रयासों के बावजूद देश में टीबी के मामले अब भी चिंता का कारण बने हुए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में असम के सिलचर में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) के तीस छात्र, टीबी से संक्रमित पाए हैं। छात्रों में इस गंभीर रोग की पुष्टि के कारण परिसर में डर का माहौल देखा जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया, स्वास्थ्य विभाग की एक टीम ने मंगलवार को 200 छात्रों का परीक्षण किया और उनमें से 30 में टीबी के लक्षण पाए गए। उनके सैंपल सिलचर मेडिकल कॉलेज और भेजे गए हैं। बांग्लादेश का एक छात्र इस साल फरवरी में घर से लौटने के बाद इस बीमारी से संक्रमित पाया गया था बाद में उसे आइसोलेट किया गया था। संभवत: उसी के संपर्क में आने के कारण बाकी के छात्र टीबी संक्रमित हो गए हैं।
छात्रों के टीबी से संक्रमित पाए जाने के बाद से लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या कम उम्र के लोग भी इस संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं?