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World TB Day 2024: देश में टीबी से हर साल लाखों लोगों की होती है मौत, जानिए इस रोग के लक्षण से बचाव तक सबकुछ

Sun, 24 Mar 2024 10:34 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वर्ल्ड टीबी डे 2024 - फोटो : iStock
दुनियाभर में ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) एक बड़ी समस्या रही है जिससे हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। भारत भी इस गंभीर स्वास्थ्य जोखिम से परेशान रहा है। एक आंकड़े के मुताबिक साल 2021 में टीबी से कुल 1.6 मिलियन (16 लाख) लोगों की मृत्यु हुई, दुनिया भर में टीबी रोग मौत का 13वां प्रमुख कारण है। भारत ने 2025 तक टीबी को खत्म करने का लक्ष्य बनाया था, हालांकि आंकड़े बताते हैं कि वास्तविक स्थिति, निर्धारित लक्ष्य से काफी दूर है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने तपेदिक (टीबी) को दुनिया के सबसे घातक संक्रामक रोगों में रखा है। साल 2022 में भारत में दर्ज किए गए टीबी के कुल मामलों की संख्या 21.42 लाख थी, जिनमें से अकेले तेलंगाना में 72,878 मामले दर्ज किए गए। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर देश में साल 2022 में टीबी के कुल मामलों में 13 फीसदी की वृद्धि हुई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं सभी लोगों को टीबी रोग को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहना जरूरी है। बचाव के लिए आवश्यक है कि हमें इस रोग के लेकर सही जानकारी हो।
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तपेदिक रोग के बारे में जानिए - फोटो : iStock
ट्यूबरक्लोसिस के बारे में जानिए

ट्यूबरक्लोसिस को गंभीर श्वसन रोग माना जाता है, ये बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होने वाली समस्या है, जिसमें आपके फेफड़ों में संक्रमण हो जाता है। बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति के खांसने-छींकने से निकली ड्रॉपलेट्स के संपर्क में आने के कारण दूसरे लोगों के भी संक्रमित होने का खतरा हो सकता है। भीड़-भाड़ वाली जगहों में टीबी के संक्रमण के फैलने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।

अभी तक मुख्यरूप से टीबी की समस्या में खांसी होने को प्रमुख लक्षण माना जाता रहा था, हालांकि हालिया रिपोर्ट्स में इसके लक्षणों में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है।
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टीबी रोगियों के लक्षण - फोटो : istock
टीबी रोगियों में कैसे होते हैं लक्षण?

टीबी के रोगाणुओं के फेफड़ों में बढ़ने से टीबी का संक्रमण होता है। प्रारंभिक संक्रमण की स्थिति में अधिकांश लोगों में कोई भी लक्षण नहीं दिखते हैं। कुछ लोगों में फ्लू जैसी समस्या विकसित हो जाती है, जिसके कारण हल्का बुखार, थकान और खांसी होती है। संक्रमण बढ़ने की स्थिति में खांसी के साथ बलगम आने, सांस लेने या खांसने के साथ दर्द होने, बुखार-ठंड लगने, रात में पसीना आने की समस्या देखी जाती रही है। 

हालांकि एक हालिया शोध में वैज्ञानिकों ने बताया कि अधिकतर संक्रमितों में अब टीबी का प्रमुख लक्षण, यानी खांसी की समस्या ही नहीं देखी जा रही है।

(यहां पढ़ें- बिना खांसी के भी हो सकती है टीबी, एक चौथाई लोगों में कोई भी लक्षण नहीं)

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टीबी की समस्या - फोटो : istock
किन लोगों में टीबी का खतरा अधिक

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, किसी को भी टीबी का संक्रमण हो सकता है, लेकिन कुछ कारकों में इसका खतरा बढ़ जाता है। यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति के अधिक संपर्क में रहते हैं जिसे टीबी रोग है तो इससे आपमें भी संक्रमण का खतरा विकसित हो सकता है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली से टीबी संक्रमण  खतरा बढ़ जाता है।

प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी वाली स्थितियों जैसे डायबिटीज, फेफड़ों के रोग, किडनी की बीमारी, एचआईवी संक्रमितों या कैंसर के शिकार लोगों में भी खतरा अधिक देखा जाता रहा है।
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टीबी से बचाव जरूरी - फोटो : pixabay
टीबी से बचाव और इलाज

डॉक्टर कहते हैं, जिन लोगों में टीबी का परीक्षण किया गया है उन्हें दवाओं से लाभ मिल सकता है। टीबी की बीमारी को फैलने से रोकने के लिए आपको अन्य लोगों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। टीबी रोगियों को  जितना हो सके अपने घर के सदस्यों से उचित दूरी बनाकर रखनी चाहिए। 

टीबी के रोगाणु बंद स्थानों में अधिक आसानी से फैलते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप जिस कमरे में रहते हैं वहां पर वेंटिलेशन की अच्छी व्यवस्था बनाए रखें। जब आपको अन्य लोगों के आसपास रहना हो तो मास्क पहनें। घर के अन्य सदस्यों को अपनी सुरक्षा के लिए मास्क पहनने की सलाह दी जाती है। दवाओं के माध्यम से टीबी को ठीक किया जा सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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