बढ़ते आत्महत्या के मामले, वैश्विक स्तर पर गंभीर चिंता का विषय हैं। हर साल दुनियाभर में लाखों लोग अत्महत्या के कारण अपनी जान गंवाते हैं। भारत में भी ये समस्या बड़ी चिंता बनकर उभर रही है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में छात्र आत्महत्या की वार्षिक दर तेजी से बढ़ी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) 2024 के आंकड़ों के आधार पर, कुल आत्महत्याओं की संख्या में जहां सालाना 2% की वृद्धि हुई है, वहीं छात्र आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी की दर 4% से अधिक है। ये निश्चित ही चिंताकारक विषय है।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आत्महत्या के विचार आना गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का संकेतक है। इससे यह भी पता चलता है कि व्यक्ति लंबे समय से तनाव-अवसाद में जी रहा है, जिसका अगर समय रहते निदान और उपचार हो गया होता तो स्थिति को इस स्तर पर खराब होने से रोका जा सकता है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ते आत्महत्या की रोकथाम के लिए योजना बनाने, विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से आत्महत्याओं को रोकने के प्रयास को लेकर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है।