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World Sight Day 2024: 50 की आयु तक आंखों की इन तीन बीमारियों का बढ़ जाता है खतरा, लक्षणों को न करें अनदेखा

Thu, 10 Oct 2024 11:27 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आंकों की बीमारियां - फोटो : istock
हमारे शरीर के बाकी हिस्सों की तरह, आंखों को भी विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है, दुर्भाग्य से लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण इस अंग पर कई प्रकार का नकारात्मक असर देखा जा रहा है। आलम ये है कि बहुत कम उम्र के लोगों में भी आंखों से संबंधित समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को आंखों की सेहत को लेकर विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए, विशेषकर उम्र बढ़ने के साथ आंखों से संबंधित बीमारियों का खतरा अधिक हो सकता है।

आंखों की बीमारियों के बारे में लोगों को जागरूक करने और बचाव के उपायों को लेकर अलर्ट करने के उद्देश्य से हर साल अक्तूबर के दूसरे गुरुवार को विश्व दृष्टि दिवस मनाया जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, 50 की आयु के बाद आंखों के विशेष ख्याल रखने की आवश्यकता होती है, इस उम्र में कुछ प्रकार की बीमारियों का जोखिम अधिक हो सकता है। आइए इन बीमारियों और इनसे बचाव के उपायों के बारे में जानते हैं।

विश्व दृष्टि दिवस पर ये वीडियो देखें-

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आंखों में मोतियाबिंद की समस्या - फोटो : istock
मोतियाबिंद सबसे आम समस्या

उम्र बढ़ने के साथ मोतियाबिंद की दिक्कत होने को सबसे आम समस्याओं में से एक माना जाता है, यह आंखों के लेंस के धुंधलापन की समस्या है जो कई वर्षों में धीरे-धीरे विकसित होती है। इसमें आंखों की सेंट्रल लाइन पर भी नकारात्मक असर होने लगता है, जिससे कम दिखाई देना शुरू हो जाता है। मोतियाबिंद की समस्या में सर्जरी की जरूरत होती है, इसलिए समय रहते लक्षणों पर ध्यान देना आवश्यक होती है।
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आंखों में होने की समस्याएं - फोटो : Pixabay
ग्लूकोमा का बढ़ता खतरा

ग्लूकोमा उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या है, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इस रोग का जोखिम कम उम्र के लोगों यहां तक कि बच्चों में देखी जा रही है। ग्लूकोमा आंखों की बीमारियों का एक समूह है, जो आंख के पीछे स्थित ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाकर दृष्टि हानि और अंधापन का कारण बन सकती है। इस रोग के लक्षण इतने धीरे-धीरे शुरू होते हैं कि शुरुआत में इसपर ध्यान भी नहीं जाता है।

ग्लूकोमा के कारण कम दिखाई देने के साथ आंखों-सिर में तेज दर्द, मतली या उल्टी लगना,  रोशनी के चारों ओर रंगीन छल्ले दिखने और आंखों के लाल होने की समस्या हो सकती है।

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आंखों की बीमारियां - फोटो : istock
एज रिलेटेड  मैक्युलर डीजेनरेशन की स्थिति

जैसे-जैसे रेटिना की उम्र बढ़ती है, आंखों की कोशिकाओं में क्षति होने का खतरा बढ़ जाता है जिससे कि आंखों में रक्त आपूर्ति कम हो जाती है और प्रकाश के प्रति कम संवेदनशील हो सकती है। उम्र से इस समस्या को गंभीर माना जाता है जिसके कारण आंखों की रोशनी भी जाने का खतरा हो सकता है। आंखों की इस समस्या के कारण पढ़ने-लिखने या गाड़ी चलाने में मुश्किल हो सकती है।
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आंखों की सेहत का रखें ध्यान - फोटो : iStock
कैसे रखें आंखों का ख्याल?

डॉक्टर कहते हैं, जिस तरह से आंखों की बीमारियों का जोखिम बढ़ता जा रहा है ऐसे में जरूरी है कि आप कम उम्र से ही इस अंग को सेहतमंद रखने के लिए प्रयास करते रहें। इसके लिए आहार और लाइफस्टाइल दोनों को ठीक रखना जरूरी है। भोजन में विटामिन-ए और ई वाली चीजों के साथ पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें। इसके साथ नियमित योग-व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाना भी आंखों को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक है।
 
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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