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Sickle Cell Awareness: भारत के आदिवासी इलाकों में सिकल सेल रोग बड़ा खतरा, बचपन में ही दिखने लगते हैं लक्षण

Tue, 18 Jun 2024 06:16 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सिकल सेल रोग का जोखिम - फोटो : istock
सिकल सेल रोग वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है, ये रक्त को प्रभावित करने वाली बीमारी है। इस रोग के कारण रक्त कोशिकाओं के भीतर हीमोग्लोबिन का स्तर प्रभावित होने लगता है। सिकल सेल रोग (एससीडी) सबसे आम वंशानुगत रक्त विकार है। रक्त वाहिकाओं में हीमोग्लोबिन की मात्रा महत्वपूर्ण है, इसी की मदद से आपके पूरे शरीर में ऑक्सीजन का संचार होता है। एससीडी के शिकार लोगों को कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम हो सकता है।

सिकल सेल रोग के बारे में लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 19 जून को विश्व सिकल सेल जागरूकता दिवस मनाया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस रोग के बारे में जानकारी होना सभी के लिए जरूरी है।

एससीडी के कारण रक्त कोशिका के आकार अर्धचंद्राकार में बदल जाता है और ये कोशिकाओं को कठोर बना देता है। इसके अतिरिक्त, सिकल के आकार की कोशिकाएं सामान्य आकार की लाल रक्त कोशिकाओं की तरह लंबे समय तक नहीं टिक पाती हैं, जिससे रोगी में लाल रक्त कोशिकाओं की निरंतर कमी बनी रहती है। आइए इस रोग के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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सिकल सेल एनीमिया का जोखिम - फोटो : freepik.com
एनीमिया और सिकल सेल एनीमिया में क्या अंतर है?

सिकल सेल रोग कई अलग-अलग प्रकार के सिकल सेल विकारों के लिए प्रयोग किया जाने वाला अंब्रेला टर्म है। एससीडी की गंभीर स्थिति को सिकल सेल एनीमिया के रूप में जाना जाता है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि सिकल सेल रोग लगभग एक लाख अमेरिकियों को प्रभावित करता है। भारत में भी इस रोग का जोखिम अधिक देखा जा रहा है। 

भारत के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में जिन स्वास्थ्य समस्याओं का बोझ सबसे अधिक देखा जाता रहा है, सिकल सेल एनीमिया की समस्या उनमें शीर्ष पर है। 
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सिकल सेल एनीमिया का खतरा - फोटो : istock
2047 तक राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन का लक्ष्य

सिकल सेल रोग के बढ़ते जोखिमों को देखते हुए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2023 भाषण के दौरान साल 2047 तक इस रोग को भारत से जड़ से खत्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। जुलाई 2023 में मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में आयोजित एक कार्यक्रम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन 2047 की शुरुआत की थी। 

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सिकल सेल रोग के बारे में भी जानिए - फोटो : istock
क्यों होती है सिकल सेल डिजीज?

सिकल सेल रोग का मुख्य कारण एचबीबी जीन में होने वाला आनुवंशिक उत्परिवर्तन है। यही जीन हीमोग्लोबिन के एक बड़े हिस्सा को बनाने के लिए जिम्मेदार है। माता-पिता से कुछ बच्चों को आनुवांशिक रूप से यह रोग मिल सकता है। सिकल सेल रोग के लक्षण 5 से 6 महीने की उम्र में दिखने लगते हैं। एससीडी के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग होते हैं। सिकल सेल रोग आपके शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकता है।
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सिकल सेल रोग का इलाज - फोटो : istock
सिकल सेल रोग से बचाव और उपचार

सिकल सेल रोग को रोका नहीं जा सकता क्योंकि यह एक आनुवंशिक स्थिति है। यदि आप गर्भवती हैं आनुवंशिक परीक्षण के माध्यम से इसके खतरे का पता लगाने में मदद मिल सकती है। जिन बच्चों में इस रोग का निदान किया जाता है उन्हें उपचार के तौर पर दवाओं के साथ ब्लड ट्रांसफ्यूजन,बोन मैरो ट्रांसप्लांट और जीन थेरेपी की जरूरत हो सकती है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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