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World Pneumonia Day 2025: क्यों मनाया जाता है विश्व निमोनिया दिवस, जानें क्या है इस वर्ष का थीम?

Wed, 12 Nov 2025 11:34 AM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

World Pneumonia Day 12 november: आज 12 नवंबर को दुनियाभर में वर्ल्ड निमोनिया डे मनाया जा रहा है। इन दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना है। आइए इस लेख में निमोनिया से जुड़े कुछ चौंका देने वाले आंकड़ों के बारे जानते हैं, साथ ही इस वर्ष के थीम के बारे में भी जानते हैं।
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वर्ल्ड निमोनिया डे 2025 - फोटो : Adobe Stock
World Pneumonia Day 2025 Theme: निमोनिया एक संक्रामक बीमारी है जिससे लगभग हर उम्र के लोग प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन बच्चों और बूढ़ों में इसका खतरा अधिक होता है। इसके बारे जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 12 नवंबर को 'विश्व निमोनिया दिवस' मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, यह रोग हर साल लाखों मासूमों की जान लेता है। यह दिवस स्वास्थ्य संगठनों और सरकारों को इस गंभीर संक्रमण की रोकथाम, निदान और उपचार के लिए अच्छी नीतियां बनाने का आह्वान करता है।

वर्ल्ड निमोनिया डे पर इस वर्ष 2025 के लिए जो थीम रखी गई है, वह है 'चाइल्ड सर्वाइवल'। इस थीम का चुनाव इसलिए किया गया है क्योंकि निमोनिया अभी भी 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए मृत्यु का सबसे बड़ा संक्रामक कारण बना हुआ है। 'चाइल्ड सर्वाइवल' थीम का उद्देश्य उन क्षेत्रों और परिवारों पर ध्यान केंद्रित करना है जहां गरीबी, कुपोषण और खराब वायु प्रदूषण के कारण बच्चों में निमोनिया का जोखिम सबसे अधिक होता है। इस वैश्विक प्रयास के माध्यम से, दुनिया भर में बच्चों को स्वस्थ जीवन देने और निमोनिया से होने वाली मौतों को शून्य पर लाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
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निमोनिया - फोटो : Adobe Stock
'चाइल्ड सर्वाइवल' पर जोर क्यों?
निमोनिया बच्चों के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है। विश्व निमोनिया दिवस 2025 का थीम 'चाइल्ड सर्वाइवल' उन बच्चों के जीवन को बचाने पर जोर देता है जो आसानी से रोके जा सकने वाले इस संक्रमण के शिकार हो जाते हैं। इसका उद्देश्य टीकाकरण, स्वच्छ हवा, और पोषण जैसे सरल हस्तक्षेपों को उन समुदायों तक पहुंचाना है जहां मृत्यु दर सबसे अधिक है।

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निमोनिया - फोटो : Adobe Stock
निमोनिया से जुड़े गंभीर आंकड़े
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, निमोनिया 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मौत का सबसे बड़ा संक्रामक कारण है। हर साल इस बीमारी के कारण 7.25 लाख से अधिक बच्चे अपनी जान गंवा देते हैं, जिनमें लगभग 1.90 लाख नवजात शिशु होते हैं।

नवजात शिशु इस संक्रमण के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं। भारत जैसे देशों में वायु प्रदूषण और कुपोषण इस जोखिम को और अधिक बढ़ाते हैं। इसलिए इस थीम का उद्देश्य निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी से बच्चों की रक्षा और उनके जीवन को सुरक्षित रखना है ।

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डॉक्टर से सलाह लेकर टीकाकरण कराँ - फोटो : Adobe Stock
रोकथाम के मुख्य उपाय और टीकाकरण
निमोनिया से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका टीकाकरण है। बच्चों को डॉक्टर की सलाह पर न्यूमोकोकल वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए। इसके अलावा स्तनपान को बढ़ावा देना भी जरूरी है, क्योंकि मां का दूध बच्चों को संक्रमण से लड़ने की शक्ति देता है। इसके अलावा भी साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

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प्रदूषण भी है निमोनिया का कारण - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
प्रदूषण और लक्षणों की जागरूकता
निमोनिया से बचने के लिए वायु प्रदूषण से बच्चों को बचाना आवश्यक है, इसके लिए घर में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें। साथ ही माता-पिता को निमोनिया के लक्षणों को पहचानना जरूरी है। निमोनिया के लक्षणों में तेज बुखार, कंपकंपी, और सांस लेने की तेज गति (सांस फूलना) आदि हैं। समय पर जांच और तुरंत इलाज से बच्चे का जीवन बचाया जा सकता है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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