Air Pollution And Risk of Pneumonia: हर साल 12 नवंबर को वर्ल्ड निमोनिया डे मनाया जाता है, इसका उद्देश्य निमोनिया के प्रति लोगों को जागरूक करना है। हमारे देश के कई हिस्सों में इन दिनों वायु प्रदूषण अपने चरम पर है, अगर दिल्ली की बात करें तो यहां के अधिकतर हिस्सों में एयर क्वालिटी इंडेक्स लगभग 350 है।
ऐसे में फेफड़ों के कई जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है,
साल 2021 के आंकड़ों की बात करें तो फेफड़ों में होने वाली बीमारियों (सीओपीडी, निमोनिया और फेफड़ों के कैंसर) के कारण दुनिया भर में 79 लाख लोगों की मौत हुई थी। इन 79 लाख मौतों में से 35% यानी 28 लाख मौतें अकेले वायु प्रदूषण के कारण हुईं। ध्यान देने वाली बात यह है कि निमोनिया से होने वाली 30% मौतें सिर्फ वायु प्रदूषण की वजह से हुई थीं।
क्या होता निमोनिया?
निमोनिया एक गंभीर फेफड़ों का संक्रमण है, और विशेषज्ञों के अनुसार हवा में मौजूद सूक्ष्म कण इसके जोखिम को कई गुना बढ़ा देते हैं। ये प्रदूषक कण जब सांस के जरिए फेफड़ों में प्रवेश करते हैं, तो वे फेफड़ों की आंतरिक परत और हवा की थैलियों (एल्विओली) में सूजन पैदा करते हैं। यह सूजन फेफड़ों की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली को कमजोर कर देती है।
कमजोर फेफड़ों पर बैक्टीरिया, वायरस या फंगस आसानी से हमला कर देते हैं, जिससे निमोनिया होने की आशंका बढ़ जाती है। बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से खतरनाक होती है, क्योंकि प्रदूषण उनके फेफड़ों को पहले ही नुकसान पहुंचा चुका होता है।