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World Pneumonia Day 2025: वायु प्रदूषण से निमोनिया का है गहरा संबंध, आप भी बरतें ये सावधानियां

Wed, 12 Nov 2025 10:06 AM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

World Pneumonia Day 2025: निमोनिया एक बेहद गंभीर और जानलेवा बीमारी है। वायु प्रदूषण से इस बीमारी का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। आइए इस लेख में जानते हैं कि वायु प्रदूषण कैसे निमोनिया के जोखिम को बढ़ा देता है और इससे बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
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निमोनिया - फोटो : Adobe Stock
Air Pollution And Risk of Pneumonia: हर साल 12 नवंबर को वर्ल्ड निमोनिया डे मनाया जाता है, इसका उद्देश्य निमोनिया के प्रति लोगों को जागरूक करना है। हमारे देश के कई हिस्सों में इन दिनों वायु प्रदूषण अपने चरम पर है, अगर दिल्ली की बात करें तो यहां के अधिकतर हिस्सों में एयर क्वालिटी इंडेक्स लगभग 350 है। 

ऐसे में फेफड़ों के कई जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, साल 2021 के आंकड़ों की बात करें तो फेफड़ों में होने वाली बीमारियों (सीओपीडी, निमोनिया और फेफड़ों के कैंसर) के कारण दुनिया भर में 79 लाख लोगों की मौत हुई थी। इन 79 लाख मौतों में से 35% यानी 28 लाख मौतें अकेले वायु प्रदूषण के कारण हुईं। ध्यान देने वाली बात यह है कि निमोनिया से होने वाली 30% मौतें सिर्फ वायु प्रदूषण की वजह से हुई थीं।


क्या होता निमोनिया?


निमोनिया एक गंभीर फेफड़ों का संक्रमण है, और विशेषज्ञों के अनुसार हवा में मौजूद सूक्ष्म कण इसके जोखिम को कई गुना बढ़ा देते हैं। ये प्रदूषक कण जब सांस के जरिए फेफड़ों में प्रवेश करते हैं, तो वे फेफड़ों की आंतरिक परत और हवा की थैलियों (एल्विओली) में सूजन पैदा करते हैं। यह सूजन फेफड़ों की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली को कमजोर कर देती है। 

कमजोर फेफड़ों पर बैक्टीरिया, वायरस या फंगस आसानी से हमला कर देते हैं, जिससे निमोनिया होने की आशंका बढ़ जाती है। बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से खतरनाक होती है, क्योंकि प्रदूषण उनके फेफड़ों को पहले ही नुकसान पहुंचा चुका होता है।
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निमोनिया - फोटो : Adobe Stock
PM2.5 कण कैसे खोलते हैं संक्रमण का रास्ता
वायु प्रदूषण में मौजूद PM2.5 कण इतने छोटे होते हैं कि वे फेफड़ों में गहराई तक पहुंच जाते हैं। ये कण फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और प्राकृतिक सफाई तंत्र को बाधित करते हैं। इस क्षति के कारण, फेफड़ों में बैक्टीरिया और वायरस को आसानी से बढ़ने का मौका मिल जाता है। निमोनिया पैदा करने वाले रोगाणु इन क्षतिग्रस्त ऊतकों में तेजी से घर बना लेते हैं, जिससे सामान्य सर्दी-जुकाम भी जल्दी ही गंभीर निमोनिया में बदल सकती है।

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निमोनिया - फोटो : Adobe Stock
घर के अंदर की हवा को शुद्ध रखें
प्रदूषण के उच्च स्तर के दौरान घर के अंदर की हवा को साफ रखना सबसे महत्वपूर्ण है। अपने घरों में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। घर में धूपबत्ती, अगरबत्ती या मच्छर भगाने वाली कॉइल जलाने से बचें, क्योंकि ये भी PM2.5 कणों का उत्पादन करते हैं। रसोई के धुएं और नमी को बाहर निकालने के लिए वेंटिलेशन का ध्यान रखें।

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निमोनिया - फोटो : Adobe Stock
मास्क का उपयोग
जब एक्यूआई 'खराब' या 'बहुत खराब' श्रेणी में हो, तो घर से बाहर की गतिविधियों से पूरी तरह बचें। अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो N95 या N99 मास्क जरूर पहनें, क्योंकि ये सूक्ष्म कणों को प्रभावी ढंग से छानते हैं। अस्थमा या COPD के मरीजों को प्रदूषण के दिनों में सुबह या शाम की सैर से बचना चाहिए।
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निमोनिया (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : FreePik
बचाव के अन्य उपाय
निमोनिया से बचाव के लिए फ्लू और न्यूमोनिया का टीका लगवाना विशेष रूप से बच्चों और 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए जरूरी है। इसके साथ ही, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स (जैसे आंवला, अदरक) से भरपूर आहार को डाइट में शामिल करें। हाथों को नियमित रूप से धोएं और यदि सांस लेने में दिक्कत हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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