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विश्व फिजियोथेरेपी दिवस: फिजियोथेरेपी सिर्फ बुजुर्गों के लिए? जानिए इससे जुड़े ऐसे ही बड़े मिथकों की सच्चाई

Tue, 08 Sep 2026 10:36 AM IST
Shruti Gaur हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

World Physiotherapy Day: हर साल आज ही के दिन यानी कि 8 सितंबर को विश्व फिजियोथेरेपी दिवस मनाया जाता है। ऐसे में हम आपको आज इस मौके पर बताएंगे इससे जुड़े कुछ मिथ्या के बारे में, जिन्हें लोग सच मानते हैं। 
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फिजियोथेरेपी को लेकर कहीं आप भी तो नहीं मानते ये 7 बातें? - फोटो : AI
World Physiotherapy Day: हर साल 8 सितंबर को विश्व फिजियोथेरेपी दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को फिजियोथेरेपी के महत्व और शरीर को स्वस्थ एवं सक्रिय रखने में इसकी भूमिका के बारे में जागरूक करना है। फिजियोथेरेपी को लेकर लोगों के बीच कई तरह की धारणाएं भी प्रचलित हैं, जिनके बारे में आज हम आपसे बात करेंगे। 

फिजियोथेरेपी कई तरह की शारीरिक समस्याओं, मांसपेशियों की कमजोरी और चोट के बाद शरीर की कार्यक्षमता वापस लाने में मदद कर सकती है। आज विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के मौके पर आइए जानते हैं इससे जुड़े 7 ऐसे आम मिथक, जिन्हें लोग अक्सर सच मान लेते हैं।
 
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फिजियोथेरेपी को लेकर कहीं आप भी तो नहीं मानते ये 7 बातें? - फोटो : AI
मिथक 1: फिजियोथेरेपी सिर्फ चोट लगने के बाद जरूरी होती है

यह एक आम गलतफहमी है। फिजियोथेरेपी का इस्तेमाल केवल चोट या हड्डी टूटने के बाद ही नहीं किया जाता। कमर और गर्दन के दर्द, जोड़ों की समस्या, मांसपेशियों की कमजोरी, चलने-फिरने में परेशानी और शरीर का संतुलन बिगड़ने जैसी समस्याओं में भी फिजियोथेरेपी की मदद ली जा सकती है।

कई मामलों में इसका उद्देश्य शरीर की गति और मांसपेशियों की ताकत को बेहतर बनाना होता है, ताकि व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की गतिविधियां आसानी से कर सके।

 
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फिजियोथेरेपी को लेकर कहीं आप भी तो नहीं मानते ये 7 बातें? - फोटो : AI
मिथक 2: फिजियोथेरेपी का मतलब सिर्फ मशीनों से इलाज है

कई लोगों को लगता है कि फिजियोथेरेपी में केवल मशीन लगाकर इलाज किया जाता है। हालांकि ऐसा नहीं है। फिजियोथेरेपी में व्यक्ति की समस्या के अनुसार व्यायाम, खिंचाव वाले व्यायाम, शरीर की मुद्रा में सुधार, चलने-फिरने का अभ्यास और पुनर्वास जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

मरीज की स्थिति को समझने के बाद फिजियोथेरेपिस्ट उसके लिए उपचार और व्यायाम की अलग योजना तैयार कर सकता है।

 

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फिजियोथेरेपी को लेकर कहीं आप भी तो नहीं मानते ये 7 बातें? - फोटो : AI
मिथक 3: फिजियोथेरेपी सिर्फ बुजुर्गों के लिए होती है

फिजियोथेरेपी किसी एक उम्र के लोगों तक सीमित नहीं है। बच्चों, युवाओं, वयस्कों और बुजुर्गों को अलग-अलग कारणों से इसकी जरूरत पड़ सकती है।

खेल के दौरान लगी चोट, शरीर की गलत मुद्रा, मांसपेशियों की कमजोरी, जोड़ों के दर्द और चलने-फिरने से जुड़ी परेशानियों में भी फिजियोथेरेपी उपयोगी हो सकती है।

 
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फिजियोथेरेपी को लेकर कहीं आप भी तो नहीं मानते ये 7 बातें? - फोटो : AI
मिथक 4: दर्द खत्म होते ही फिजियोथेरेपी बंद कर देनी चाहिए

दर्द कम होना सुधार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर बार फिजियोथेरेपी तुरंत बंद कर देनी चाहिए। कई मामलों में मांसपेशियों को मजबूत करने, शरीर का लचीलापन बढ़ाने और चलने-फिरने की क्षमता बेहतर बनाए रखने के लिए पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी हो सकता है।

इसलिए व्यायाम कब कम करना है या कब बंद करना है, इसका फैसला व्यक्ति की स्थिति के अनुसार किया जाना चाहिए।
 
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फिजियोथेरेपी को लेकर कहीं आप भी तो नहीं मानते ये 7 बातें? - फोटो : AI

मिथक 5: फिजियोथेरेपी में दर्द होना जरूरी है

कई लोगों को लगता है कि अगर फिजियोथेरेपी के दौरान दर्द नहीं हुआ तो उपचार काम नहीं कर रहा है। यह धारणा सही नहीं है। कुछ व्यायाम या गतिविधियों के दौरान हल्की असहजता महसूस हो सकती है, लेकिन तेज या लगातार बढ़ता हुआ दर्द सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

व्यायाम की तीव्रता व्यक्ति की समस्या और शारीरिक क्षमता के अनुसार तय की जानी चाहिए।

 
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फिजियोथेरेपी को लेकर कहीं आप भी तो नहीं मानते ये 7 बातें? - फोटो : AI
फिजियोथेरेपी क्यों है जरूरी?

फिजियोथेरेपी का उद्देश्य केवल दर्द कम करना नहीं है। यह शरीर की गति, लचीलापन, मांसपेशियों की ताकत, संतुलन और रोजमर्रा की गतिविधियों को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। चोट के बाद शरीर को सामान्य स्थिति में लाने में भी फिजियोथेरेपी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

अगर किसी व्यक्ति को लगातार दर्द, चलने-फिरने में परेशानी या चोट के बाद सुधार में समस्या हो रही है, तो योग्य चिकित्सक या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेना बेहतर होता है। बिना सलाह के इंटरनेट पर देखकर कोई व्यायाम करना हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित नहीं हो सकता।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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