आज विश्व फिजियोथेरेपी दिवस है, और वर्तमान में मेडिकल साइंस की दुनिया में फिजियोथेरेपी का चलन तेजी से बढ़ रहा है।
आज के समय में कई बड़ी-बड़ी समस्याएं सिर्फ फिजियोथेरेपी से ठीक हो जा रही हैं। लेकिन फिजियोथेरेपी को लेकर हमारे समाज में कई मिथक भी हैं, आइए आज विशेषज्ञ से उसकी सच्चाई जानते हैं।
Myths And Facts About Physiotherapy: हर साल 8 सितंबर को विश्व फिजियोथेरेपी दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को फिजियोथेरेपी के महत्व के बारे में जागरूक करना है। अक्सर हम मानते हैं कि फिजियोथेरेपी सिर्फ गंभीर चोट लगने के बाद या बुढ़ापे में ही जरूरी होती है। लेकिन, यह एक गलत धारणा है। फिजियोथेरेपी सिर्फ इलाज का ही हिस्सा नहीं है, बल्कि यह चोटों से बचाव, शारीरिक फिटनेस और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। फिर भी समाज में इसके बारे में कई मिथक यानी गलतफहमियां फैली हुई हैं।
इन मिथकों के कारण लोग अक्सर सही समय पर फिजियोथेरेपी नहीं ले पाते हैं, जिससे उनकी समस्या और भी गंभीर हो जाती है। ऐसे में यह जरूरी है कि हम इन मिथकों को तोड़ें और फिजियोथेरेपी के फायदों को समझें। इसलिए आइए विशेषज्ञ से समझते हैं कि फिजियोथेरेपी से जुड़े ऐसे कौन-से मिथक हैं जिन्हें लोग अक्सर सच मान लेते हैं।
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फिजियोथेरेपी
- फोटो : Adobe Stock
मिथक 1: फिजियोथेरेपी दर्दनाक होती है
अमर उजाला से बातचीत में लखनऊ स्थित एक निजी अस्पताल में फिजियोथेरेपिस्ट डॉ जोहैब काजी ने बताया है कि बहुत से लोगों को लगता है कि फिजियोथेरेपी करने में बहुत दर्द और तकलीफ होती है और यह सबसे आम मिथकों में से एक है। हकीकत में फिजियोथेरेपी का मकसद दर्द को कम करना होता है, न कि उसे बढ़ाना।
फिजियोथेरेपिस्ट आपके दर्द को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग करते हैं, जैसे कि मालिश, स्ट्रेचिंग और हीट थेरेपी। यदि मरीज को कोई गतिविधि असहज लगती है, तो वे मरीज की सहनशीलता के अनुसार फिजियोथेरेपी करते हैं।
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फिजियोथेरेपी
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मिथक 2: यह केवल चोटों के लिए है
डॉ जोहैब काजी ने ये भी बताया कि बहुत से लोग सोचते हैं कि फिजियोथेरेपी केवल खेल की चोटों या दुर्घटनाओं से उबरने के लिए है, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। फिजियोथेरेपी कई अन्य स्थितियों में भी मदद करती है, जैसे पीठ का दर्द, गर्दन का दर्द, गठिया और पार्किंसंस रोग जैसी तंत्रिका संबंधी बीमारियां। यह उन लोगों के लिए भी फायदेमंद है जो अपनी मांसपेशियों की ताकत और लचीलेपन में सुधार करना चाहते हैं।
मिथक 3: फिजियोथेरेपी डॉक्टर के परामर्श के बराबर नहीं है
इस मिथक को समझने के लिए हमने कानपुर के एक निजी अस्पताल में फिजियोथेरेपिस्ट डॉ मानवेंद्र बरनवाल से बात की। उन्होंने बताया कि कुछ लोग मानते हैं कि फिजियोथेरेपी डॉक्टर के परामर्श का विकल्प नहीं है, बल्कि यह एक अलग उपचार है। सच्चाई यह है कि फिजियोथेरेपी और चिकित्सा उपचार एक-दूसरे के पूरक हैं।
एक फिजियोथेरेपिस्ट आपके डॉक्टर के साथ मिलकर काम करता है, ताकि आपके इलाज की एक संपूर्ण योजना बनाई जा सके। कई मामलों में फिजियोथेरेपी सर्जरी की जरूरत को भी टाल सकती है।
मिथक 4: फिजियोथेरेपी सिर्फ बुजुर्गों के लिए है
डॉक्टर बरनवाल ने बताया कि बहुत से लोगों के मन में यह धारणा रहती है कि फिजियोथेरेपी सिर्फ बुजुर्गों के लिए है। उन्होंने इस मिथक का खंडन करते हुए कहा कि, सच्चाई यह है कि बुजुर्गों को अक्सर गतिशीलता और संतुलन से जुड़ी समस्याओं के लिए इसकी जरूरत होती है, लेकिन फिजियोथेरेपी सभी उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है।
उदाहरण के लिए, फिजियोथेरेपी छोटे बच्चों में विकास संबंधी समस्याओं में मदद कर सकती है, किशोरों को खेल से जुड़ी चोटों से उबरने में, और वयस्कों को पोस्चर और पीठ दर्द जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक होती है।
मिथक 5: फिजियोथेरेपी का मतलब सिर्फ एक्सरसाइज है
अंत में डॉ मानवेंद्र बरनवाल ने बताया कि कुछ लोगों के मन में यह भ्रम रहता है कि फिजियोथेरेपी में सिर्फ कुछ एक्सरसाइज करवाई जाती हैं और यह एक बहुत बड़ा मिथक है। फिजियोथेरेपी एक व्यापक विज्ञान है, जिसमें कई तकनीकें शामिल होती हैं। इसमें मैनुअल थेरेपी, हीट थेरेपी, इलेक्ट्रोथेरेपी, और खास तरह की मशीनें भी शामिल होती हैं।
एक फिजियोथेरेपिस्ट आपकी समस्या को समझकर एक पूरा प्लान बनाता है, जिसमें एक्सरसाइज के साथ-साथ ये सभी तकनीकें शामिल होती हैं ताकि समस्या की जड़ पर काम किया जा सके।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।