What is Polypharmacy: इस लेख में जानेंगे पॉलीफार्मेसी क्या है, बुजुर्गों के लिए एक साथ पांच से ज्यादा दवाएं लेना क्यों चिंता का विषय हो सकता है और दवाओं से जुड़ी किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए।
World Patient Safety Day 2026: उम्र बढ़ने के साथ कई बुजुर्गों को ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग, दर्द या दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए अलग-अलग दवाएं लेनी पड़ सकती हैं। कई बार एक मरीज दिनभर में पांच या उससे अधिक दवाएं लेने लगता है, इसे ही पॉलीफार्मेसी कहते हैं।
जरूरी दवाएं सही तरीके से लेना उपचार का अहम हिस्सा है, लेकिन कई दवाओं के साथ लेने पर उनके बीच इंटरैक्शन, साइड इफेक्ट और दवा से जुड़ी अन्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। बुजुर्गों में यह चिंता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उम्र के साथ शरीर में दवाओं को अवशोषित करने, उनका मेटाबॉलिज्म करने और बाहर निकालने की क्षमता बदल सकती है।
ऐसे में मरीज और परिवार के लोगों के लिए यह समझना जरूरी है कि दवाओं की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण उनका सही संयोजन और डॉक्टर की निगरानी है। ऐसे में विश्व रोगी सुरक्षा दिवस के मौके पर जानते हैं कि पॉलीफार्मेसी क्या है और बुजुर्गों में इससे जुड़ी सावधानियां।
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पॉलीफार्मेसी क्या है?
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सबसे पहले जानें पॉलीफार्मेसी क्या है?
पॉलीफार्मेसी का सामान्य अर्थ एक व्यक्ति द्वारा एक समय में कई दवाओं का इस्तेमाल करना है। अक्सर पांच या उससे अधिक दवाओं के नियमित इस्तेमाल को पॉलीफार्मेसी कहा जाता है। हालांकि, इसकी कोई एक सार्वभौमिक परिभाषा नहीं है और अलग-अलग चिकित्सा संदर्भों में मानक अलग हो सकते हैं।
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पॉलीफार्मेसी क्या है?
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बुजुर्गों में 5 से ज्यादा दवाएं क्यों चिंता का विषय हो सकती हैं?
दवाओं के बीच इंटरैक्शन का खतरा बढ़ सकता है
चक्कर, कमजोरी या अत्यधिक नींद जैसी समस्याएं हो सकती हैं
कुछ दवाएं ब्लड प्रेशर या ब्लड शुगर को जरूरत से ज्यादा कम कर सकती हैं
कई दवाएं लेने से सही समय और सही खुराक याद रखने में परेशानी हो सकती है
कुछ मामलों में गिरने का जोखिम बढ़ सकता है
किडनी या लिवर की कार्यक्षमता में बदलाव होने पर कुछ दवाओं का असर अलग हो सकता है
एक दवा के साइड इफेक्ट को नियंत्रित करने के लिए दूसरी दवा शुरू करने की स्थिति भी बन सकती है
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पॉलीफार्मेसी क्या है?
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क्या कुछ दवाएं बंद कर देनी चाहिए?
नहीं। डॉक्टर की सलाह के बिना किसी भी दवा को अचानक बंद करना नुकसानदायक हो सकता है। खासकर ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग या अन्य लंबे समय की बीमारी की दवाओं को अपने स्तर पर बंद नहीं करना चाहिए। समय-समय पर डॉक्टर से दवाओं की समीक्षा करवाना बेहतर होता है। मरीज को अपनी सभी दवाओं की सूची, उनकी खुराक और उन्हें लेने का समय डॉक्टर को बताना चाहिए। इसमें डॉक्टर की लिखी दवाओं के साथ बिना प्रिस्क्रिप्शन मिलने वाली दवाएं, विटामिन और हर्बल सप्लीमेंट भी शामिल होने चाहिए।
परिवार के सदस्य यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि बुजुर्ग मरीज दवा डॉक्टर द्वारा बताए गए समय और खुराक के अनुसार ले रहे हैं। दवाओं की सूची को अपडेट रखना और अलग-अलग डॉक्टरों को सभी चल रही दवाओं की जानकारी देना भी महत्वपूर्ण है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।