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Organ Donation: क्या डायबिटीज रोगी भी कर सकते हैं अंगदान? जानिए डोनेशन को लेकर जरूरी बातें

Thu, 13 Aug 2026 02:36 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में अंगदान के लिए उम्र से ज्यादा दाता की मेडिकल स्थिति और अंगों की उपयुक्तता महत्वपूर्ण होती है। मृतक दाता से किडनी, लिवर, हृदय, फेफड़े, अग्न्याशय और आंत जैसे अंग तथा कॉर्निया, त्वचा, हड्डी और हृदय वाल्व जैसे ऊतक दान लिए जा सकते हैं।
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अंगदान की जरूरी बातें - फोटो : Amarujala.com/AI
अंगदान को सबसे बड़ा दान कहा जाता है। किसी इंसान की जिंदगी खत्म होने के बाद भी उसके शरीर का कोई हिस्सा, किसी दूसरे व्यक्ति को नई जिंदगी दे सकता है, यानि अंगदान के जरिए कोई व्यक्ति संसार में न रहकर भी जिंदा रह सकता है।

आंकड़े बताते हैं कि भारत में अंग प्रत्यारोपण की जरूरत बहुत ज्यादा है। देश में हर साल करीब 5 लाख लोगों की मौत अंगों की उपलब्धता न होने के कारण हो जाती है। किसी भी समय लगभग 3 लाख मरीज वेटिंग लिस्ट में होते हैं और हर दिन लगभग 20 लोगों की मौत हो जाती है क्योंकि उन्हें समय पर ऑर्गन नहीं मिल पाते। इनमें लिवर और हृदय जैसे अंगों की जरूरत वाले मरीज सबसे ज्यादा हैं। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अंगदान को लेकर अब लोगों में जागरूकता बढ़ी है, हालांकि अभी भी लोगों के मन में कई सारे सवाल रहते हैं जो इस महादान में बाधा बन रहे हैं। क्या बुजुर्ग या किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति अंगदान कर सकता है? क्या डायबिटीज के मरीज भी अंगदान कर सकते हैं? ये भी लोगों के बीच एक बड़ा सवाल रहा है। आइए इसका जवाब जानने की कोशिश करते हैं।
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अंगदान के बारे में जानिए - फोटो : Amarujala.com/AI
अंगदान से बच सकती है कई जिंदगियां

मृत्यु के बाद अंगदान करने के लिए प्रेरित करने, इसे लेकरफैली गलतफहमियों को दूर करने और जरूरतमंदों की जान बचाने के महत्व को लेकर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 13 अगस्त को विश्व अंगदान दिवस मनाया जाता है।

राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नॉट्टो) के अनुसार, अंग और ऊतक दान से दूसरे लोगों की जिंदगी बचाने या उनके जीवन गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है। एक मृत दाता से कई अंग और ऊतक जरूरतमंद मरीजों तक पहुंच सकते हैं।

मृत्यु के बाद किडनी, लिवर, हृदय, फेफड़े और अग्न्याशय जैसे अंगों के साथ कुछ ऊतकों का भी दान किया जा सकता है। हालांकि हर व्यक्ति के सभी अंग, दान के लिए उपयुक्त हों यह जरूरी नहीं है। मृत्यु के समय विशेषज्ञों की टीम मेडिकल जांच के आधार पर फैसला करती है कि कौन सा अंग दान किया जा सकता है?
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डायबिटीज में अंगदान - फोटो : Freepik.com
कौन कर सकता है अंगदान?

मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार अंगदान के लिए उम्र की बाध्यता नहीं होती है। मृत्यु के समय कौन-से अंग और ऊतक चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त हैं, ये सबसे जरूरी है। उम्र ज्यादा होने का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति के अंग दान करने के योग्य नहीं हैं।
 
  • किसी व्यक्ति को कोई बीमारी है तो भी वह अंगदान कर सकता है। डॉक्टर मृत्यु के समय मेडिकल हिस्ट्री, संक्रमण, अंगों की स्थिति और दूसरे चिकित्सकीय मानकों की जांच करते हैं। 
  • हालांकि कैंसर, एक्टिव टीबी या कुछ गंभीर इन्फेक्शन और सेप्सिस से मौत के बाद अंगदान नहीं किया जा सकता है।

क्या डायबिटीज के मरीज भी अंगदान कर सकते हैं?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जिन लोगों को डायबिटीज है वह भी अंगदान कर सकते हैं। इसमें भी डॉक्टर मृत्यु के समय व्यक्ति की डायबिटीज की स्थिति और डायबिटीज के कारण अंगों पर प्रभाव जांच करते हैं। इसके बाद जो अंग सही हों उसका दान किया जा सकता है।
 
  • असल में लंबे समय से डायबिटीज कंट्रोल न रहने से लिवर-किडनी, हृदय आदि पर असर पड़ता है। यही वजह है कि लोगों के मन में ये सवाल रहता है।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज को देखकर पहले से यह फैसला करना सही नहीं है कि व्यक्ति अंगदान नहीं कर सकता। 
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अंगदान के बारे में जरूरी बातें - फोटो : Amarujala.com/AI
अंगदान के लिए कौन-कौन सी बातें जरूरी हैं?

विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आप अंगदान करना चाहते हैं तो सबसे पहले अपनी अंगदान की इच्छा के बारे में परिवार को जानकारी दें।
 
  • किसी बीमारी को देखकर खुद यह फैसला न करें कि आप अंगदान के योग्य नहीं हैं।
  • डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या उम्र जैसी स्थितियों में अंतिम फैसला मृत्यु के समय विशेषज्ञों की मेडिकल जांच के आधार पर होता है।इसके अलावा अंगदान केवल अधिकृत चिकित्सा संस्थानों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। 
  • गौरतलब है कि भारत में मानव अंगों की खरीद-बिक्री कानूनन अपराध है।



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स्रोत:
One donor can save multiple lives 


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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