मोटापा एक गंभीर खतरा है और ये खतरा समय के साथ बढ़ता ही जा रहा है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी अधिक वजन और मोटापे के कारण होने वाली चुनौतियों का सामना कर रहे हैं अध्ययनों से पता चलता है कि शहरीकरण, बदलती जीवनशैली, प्रोसेस्ड फूड्स का बढ़ता सेवन और इसकी तुलना में शारीरिक गतिविधियों में कमी के चलते लोगों में मोटापे का जोखिम तेजी से बढ़ता जा रहा है।
बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 से अधिक होने को ओवरवेट और 30 से अधिक होने पर मोटापा माना जाता है। भारत में हालिया राष्ट्रीय सर्वेक्षणों (NFHS-5) से संकेत मिलता है कि वयस्कों में मोटापे की दर पिछले एक दशक में लगातार बढ़ी है। इसके कारण क्रॉनिक बीमारियां भी बढ़ी हैं जिस वजह से स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट बताती है कि साल 2022 में दुनिया में हर 8 में से 1 व्यक्ति मोटापे से जूझ रहा था। ये खतरा साल-दर-साल बढ़ता ही जा रहा है। भारतीय आबादी में बढ़ती इस समस्या को लेकर विशेषज्ञों ने अलर्ट किया है।