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लंग्स हेल्थ: थोड़ी देर चलते ही फूलने लगती है सांस और खांसी ने कर दिया परेशान? ये सीओपीडी का संकेत तो नहीं

Thu, 24 Sep 2026 08:17 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

World lung day 2026: सीओपीडी फेफड़ों की ऐसी बीमारी है जिसमें सांस की नलियों में हवा का प्रवाह बाधित होता है। लगातार खांसी, बलगम, सांस फूलना, सीने में जकड़न और सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज इसके प्रमुख लक्षण हैं। कहीं आप भी तो इसका शिकार नहीं हैं?
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सीओपीडी और सांस की दिक्कत - फोटो : Amarujala.com/AI
शरीर स्वस्थ रहे, सभी अंगों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलता रहे इसके लिए फेफड़ों का सही से काम करते रहना जरूरी है। फेफड़े हवा से ऑक्सीजन लेकर खून में पहुंचाते हैं, जिस दिल के जरिए शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंचती है। ऐसे में सोचिए कि अगर फेफड़ों में कोई दिक्कत हो जाए तो इसका पूरी सेहत पर किस प्रकार से नकारात्मक असर हो सकता है?

फेफड़ों के स्वास्थ्य के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने और अस्थमा और सीओपीडी, टीबी और निमोनिया जैसी श्वसन संबंधी बीमारियों के बारे में अलर्ट करने के उद्देश्य से हर साल 25 सितंबर को वर्ल्ड लंग्स डे मनाया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, फेफड़ों की समस्याओं को बुजुर्गों की बीमारी मानने की भूल न करें, कम उम्र में यहां तक कि बच्चे भी कई तरह की श्वसन समस्याओं का शिकार देखे जा रहे हैं।

क्या आपको भी सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलने, थोड़ी दूर चलने पर थक जाने या सुबह उठते ही खांसी और बलगम आने जैसी दिक्कतें हो रही हैं? अगर हां तो समय रहते इसकी जांच करा लें, कई बार ये सीओपीडी जैसी बीमारियों की तरफ संकेत हो सकता है।
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सीओपीडी की समस्या - फोटो : Adobe Stock
सीओपीडी की समस्या को लेकर बरतें सावधानी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आमतौर पर फेफड़ों या सांस में होने वाली दिक्कतों को धूम्रपान या मौसम का असर समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।  लेकिन अगर ये समस्या लगातार बनी रहती है तो समय रहते इसकी जांच जरूरी है। सीओपीडी जैसी बीमारियों को शुरुआत में अनदेखा करना आगे चलकर गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।
 
  • सीओपीडी यानी क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज फेफड़ों की ऐसी बीमारी है जिसमें सांस की नलियों में हवा का प्रवाह बाधित होने लगता है। 
  • समय के साथ यह बीमारी बढ़ती जाती है और सांस लेने में परेशानी ज्यादा होने लगती है।

अध्ययनों में धूम्रपान को सीओपीडी का सबसे बड़ा कारण माना जाता रहा है, लेकिन सिर्फ धूम्रपान करने वालों को ही यह बीमारी नहीं होती। लंबे समय तक धुंआ, वायु प्रदूषण या काम की जगह मौजूद धूल और रसायन भी फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, इससे भी आपकी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
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फेफड़ों में होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock
सीओपीडी में फेफड़ों में क्या होता है?

सीओपीडी में फेफड़ों की सांस की नलियां और हवा की छोटी थैलियां यानी एयर सैक्स प्रभावित होती हैं। सांस की नलियों में सूजन आ सकती है, उनकी दीवारें मोटी हो जाती हैं। जरूरत से ज्यादा बलगम बनने से हवा का रास्ता और संकरा हो सकता है। कुछ मामलों में फेफड़ों की छोटी हवा की थैलियों की संरचना भी क्षतिग्रस्त होती है।
 
  • इसका सीधा असर सांस लेने पर पड़ता है। सीओपीडी के शिकार लोगों को लग सकता है कि पहले जितनी आसानी से सांस आती थी, अब उतनी नहीं आ रही।
  • इस तरह की दिक्कतें अगर लगातार और लंबे समय तक बनी रहती है तो इसे अनदेखा करना आपके लिए बड़ी मुसीबतों का कारण हो सकता है।

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खांसी और सांस की समस्या - फोटो : Adobe Stock
कैसे जानें कहीं आप भी तो नहीं हो गए शिकार?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि सीओपीडी की शुरुआत में लक्षण बहुत हल्के होते हैं। 
 
  • रोगियों को लगातार खांसी, खांसी के साथ ज्यादा बलगम, चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलने की दिक्कत हो सकती है।
  • कुछ लोगों को सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आने और सीने में जकड़न की भी समस्या हो सकती है।
  • लगातार खांसी या सामान्य काम करने पर भी सांस फूलने की समस्या को केवल उम्र या कमजोरी मानकर छोड़ना गंभीर हो सकता है। 
  • समय रहते समस्या की जांच कराकर इलाज कराने से बीमारी की बढ़ने से रोका जा सकता है।
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धूम्रपान के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock Photos
क्यों बढ़ रही है ये समस्या?

धूम्रपान सीओपीडी का प्रमुख कारण है। इसके अलावा सेकंड-हैंड धुआं यानी दूसरे व्यक्ति के सिगरेट के धुएं में सांस लेना, लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहना भी आपको इस बीमारी का शिकार बना सकता है।
 
  • कार्यस्थल की धूल-धुएं और रसायनों के संपर्क में रहना भी जोखिम बढ़ा सकता है। 
  • कुछ लोगों में परिवार से आनुवंशिक रूप से भी सीओपीडी की बीमारी का खतरा रहता है।
  • सीओपीडी का पूरी तरह इलाज करने वाली कोई दवा नहीं है, लेकिन लक्षणों को नियंत्रित करने, बीमारी की रफ्तार धीमी करने और जीवन की गुणवत्ता बेहतर करने में शुरुआती इलाज से मदद मिल सकती है।अगर आप धूम्रपान करते हैं तो इसे छोड़ना आपके जोखिमों को कम करने में मददगार हो सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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