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World Lung Cancer Day: ये लक्षण दिखें तो तुरंत कराएं फेफड़ों की जांच, देरी पड़ सकती है सेहत पर भारी

Sat, 01 Aug 2026 11:59 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार हर साल लाखों लोगों में फेफड़ों के कैंसर का पता चलता है और बड़ी संख्या में लोगों की इससे मौत होती है। भारत में भी यह बीमारी तेजी से चिंता का विषय बन रही है। 
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World Lung Cancer Day - फोटो : Amarujala.com/AI
फेफड़ों का कैंसर, दुनियाभर में बढ़ती गंभीर और जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का अनुमान है कि हर साल 25 लाख से अधिक लोगों में फेफड़ों के कैंसर का निदान होता है, 18 लाख से अधिक लोगों की इस कारण से मौत हो जाती है। आमतौर पर माना जाता है कि धूम्रपान करने वालों में इस कैंसर का जोखिम अधिक होता है, पर  यह उन लोगों को भी प्रभावित कर सकता है जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया है। धूम्रपान फेफड़ों को लाइन करने वाली कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। भारत में इसका जोखिम अधिक देखा गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, फेफड़ों के कैंसर से मृत्यु का प्रमुख कारण, इस समस्या का समय रहते निदान न हो पाना है। अधिकांश मामलों में फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती लक्षण नहीं दिखाते हैं, पर कुछ संकेतों पर विशेष ध्यान देते रहने की आवश्यकता होती है। समय पर निदान और इलाज हो जाने पर जान बचाई जा सकती है। 

आइए जानते हैं कि सभी लोगों को किस प्रकार के लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देते रहने की आवश्यकता है?
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फेफड़ों के कैंसर के मामले - फोटो : Amarujala.com/AI
गंभीर होता फेफड़ों का कैंसर

दुनियाभर में लंग्स कैंसर को लेकर जागरूकता बढ़ाने, बीमारी का जल्द पता लगाने और प्रभावित लोगों की मदद करने के लिए हर साल 1 अगस्त को 'वर्ल्ड लंग कैंसर डे' मनाया जाता है। 'फोरम ऑफ इंटरनेशनल रेस्पिरेटरी सोसाइटीज' ने 2012 में इसकी शुरुआत की थी।
 
  • अमेरिकन कैंसर सोसायटी के मुताबिक फेफड़ों का कैंसर काफी गंभीर होता है, जिसको लेकर सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है। ज्या
  • दातर मामलों में फेफड़े के कैंसर तब तक कोई लक्षण पैदा नहीं करते जब तक कि वे फैल न जाएं।
  • फेफड़ों के कैंसर के कई लक्षण अन्य बीमारियों से मिलते जुलते भी हो सकते हैं, यही कारण है कि लोगों में समय रहते इसका निदान नहीं हो पाता है।
  • हालांकि अपने जोखिम कारकों को समझते हुए सभी लोगों को इससे बचाव करते रहना जरूरी है। 
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फेफड़ों की दिक्कतों का खतरा - फोटो : Adobe Stock
इन शुरुआती लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

डॉक्टरों का कहना है कि यदि कुछ लक्षण लगातार बने रहें और सामान्य दवाओं से भी राहत न मिले तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। खासतौर पर निम्न संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है।
 
  • कई सप्ताह तक लगातार रहने वाली या बढ़ती हुई खांसी।
  • सीने में लगातार दर्द, जो गहरी सांस लेने, खांसने या हंसने पर बढ़ जाए।
  • आवाज का बैठ जाना या लंबे समय तक कर्कश बने रहना।
  • बिना किसी कारण तेजी से वजन कम होना।
  • सांस फूलना या सांस लेने में कठिनाई।
  • लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना।
  • बार-बार निमोनिया होना या संक्रमण का पूरी तरह ठीक न होना।

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फेफड़ों की समस्याएं - फोटो : Adobe Stock
कैंसर फैलने पर क्या दिक्कतें होती हैं?

यदि फेफड़ों का कैंसर दूसरे अंगों तक पहुंच जाता है तो लक्षण और गंभीर हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में मरीजों को कई और गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
 
  • हड्डियों, खासकर पीठ या कूल्हों में लगातार दर्द।
  • सिरदर्द, चक्कर आना, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन।
  • चलने या संतुलन बनाने में कठिनाई।
  •  त्वचा और आंखों का पीला पड़ना।
  • गर्दन या शरीर के अन्य हिस्सों में लिम्फ नोड्स की सूजन।
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फेफड़ों की समस्याओं से कैसे बचें? - फोटो : Freepik.com
किन बातों का ध्यान रखकर कम किया जा सकता है खतरा?

फेफड़ों के कैंसर से बचाव के लिए केवल धूम्रपान छोड़ना ही पर्याप्त नहीं है। यदि आप धूम्रपान नहीं भी करते हैं, तब भी सेकेंडहैंड स्मोक, प्रदूषण और अन्य जोखिम कारकों से बचना जरूरी है। इसलिए कोशिश करें कि धूम्रपान करने वाले लोगों के धुएं से दूरी बनाए रखें।
 
  • इसके साथ ही ताजे फल, हरी सब्जियां और पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार लें।
  • नियमित व्यायाम, योग और श्वास संबंधी अभ्यास फेफड़ों की कार्यक्षमता बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
  • यदि परिवार में फेफड़ों के कैंसर का इतिहास है या लंबे समय तक कोई संदिग्ध लक्षण बने हुए हैं, तो डॉक्टर की सलाह लेकर समय पर जांच कराना सबसे सुरक्षित कदम हो सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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