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World Leprosy Day 2024: लाइलाज नहीं है कुष्ठ रोग, जानिए इस रोग के लक्षण-कारण और उपचार के बारे में सबकुछ

Thu, 25 Jan 2024 05:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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World Leprosy Day 2024 - फोटो : istock
कुष्ठ रोग, वैश्विक स्तर पर गंभीर स्वास्थ्य समस्या रही है। बीमारी के बारे में लोगों में बढ़ी जागरूकता और उपचार की सहज उपलब्धता के चलते इसके मामलों में अब काफी कमी आई है। कुष्ठ रोग की व्यापकता 1980 के दशक में 50 लाख से अधिक मामलों से घटकर साल 2020 में 1.30 लाख के करीब रह गई है।  हालांकि अब भी कई हिस्सों में ये रोग बड़ी चुनौती बनी हुई है। 

कुष्ठ रोग के बारे में लोगों को जागरूक करने और समाज में इसकी लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने के उद्देश्य से हर साल जनवरी के आखिरी रविवार को विश्व कुष्ठ रोग दिवस (डब्ल्यूएलडी) मनाया जाता है।
 
विश्व कुष्ठ दिवस 2024 का थीम है “कुष्ठ रोग को हराओ” है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) कहता है, कुष्ठ रोग से जुड़े कलंक को मिटाने और रोग से प्रभावित लोगों को उपचार के लिए प्रेरित करने और उनकी गरिमा को बढ़ाना के लिए ये दिन महत्वपूर्ण है। 
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leprosy in india - फोटो : istock
घटी है रोगियों की संख्या

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनियाभर में कुष्ठ रोग से संक्रमित अधिकांश मामले अफ्रीका और एशिया में हैं। अमेरिका में हर साल लगभग 100 लोगों में इसका निदान किया जा रहा है। भारत में भी कुष्ठ बड़ी समस्या रही है। यहां साल 2014-15 में कुष्ठ रोग के 1,25,785 मामलों की तुलना में 2021-22 में यह घटकर 75,394 रह गई है। रोग को लेकर देश में चलाए गए व्यापक जागरूकता अभियान का सकारात्मक असर देखा जा रहा है।
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भारत में कुष्ठ रोग - फोटो : istock
कुष्ठ रोग के बारे में जानिए

कुष्ठ एक संक्रामक रोग है जो विशेषकर हाथ-पैर या त्वचा पर गंभीर विकृत घाव का कारण बनता है, कुछ लोगों में ये तंत्रिकाओं की क्षति का कारण भी बनता है। कुष्ठ रोग सदियों से चली आ रही बीमारी है, लेकिन यह बहुत संक्रामक नहीं होता है। अनुपचारित कुष्ठ रोग से पीड़ित किसी व्यक्ति की नाक और मुंह से निकलने वाली बूंदों के निकट और बार-बार संपर्क में आने के कारण ही इसका संक्रमण फैलने का खतरा रहता है।  वयस्कों की तुलना में बच्चों में कुष्ठ रोग होने की आशंका अधिक होती है।

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कुष्ठ रोग की समस्या - फोटो : Pixabay
कुष्ठ रोग के लक्षण और कारण

कुष्ठ रोग मुख्य रूप से त्वचा को प्रभावित करता है। कुछ लोगों में इसके कारण मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के बाहर की नसों से संबंधित समस्याएं भी हो सकती हैं। मुख्य लक्षणों में विकृत रूप से त्वचा में घाव, गांठ या उभार हो सकते हैं। घावों में पीलापन अधिक देखा जाता है। रोग बढ़ने पर भौहें/पलकें गायब होने, दर्द, लालिमा और जलन की दिक्कत भी बढ़ जाती है।

कुष्ठ रोग धीमी गति से बढ़ने वाले माइकोबैक्टीरियम लेप्राई (एम. लेप्री) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है।
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कुष्ठ रोग का इलाज संभव - फोटो : Pixabay
कुष्ठ का उपचार

कुष्ठ रोग का उपचार संभव है और ये इसके प्रकार पर निर्भर करता है। संक्रमण को ठीक करने के लिए एंटीबायोटिक्स का उपयोग किया जाता है, आमतौर पर 6 महीने से एक साल तक इलाज चल सकता है। हालांकि अगर रोगी को तंत्रिकाओं में क्षति की समस्या है तो इसके लिए अन्य उपचार को प्रयोग में लाया जाता है।

पिछले दो दशकों में इस बीमारी से पीड़ित 16 मिलियन (1.6 करोड़) लोग ठीक हो चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन कुष्ठ रोग से पीड़ित सभी लोगों का निःशुल्क उपचार प्रदान करता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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