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Hypertension Control: हाई बीपी के मरीजों के लिए अच्छी खबर, ये है आपके लिए सबसे अच्छा डाइट प्लान

Sun, 17 May 2026 08:37 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

World hypertension day 2026: हाइपरटेंशन की समस्या अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही है। आधुनिक लाइफस्टाइल ने युवाओं में भी इसका खतरा तेजी से बढ़ा दिया है। डैश डाइट को स्वास्थ्य विशेषज्ञ सबसे लाभकारी मानते हैं। डैश डाइट कुछ हफ्तों में ही सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर कम करने में मदद कर सकती है।
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बीपी कैसे कंट्रोल करें? - फोटो : Amarujala.com/AI
हाई ब्लड प्रेशर एक ऐसी समस्या है, जो तेजी से युवाओं को अपना शिकार बनाती जा रही है। पहले इसे बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब 30 साल से कम उम्र के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि हाइपरटेंशन को लेकर सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि ज्यादातर लोग इसका शिकार होने के बाद भी अनजान होते हैं कि उन्हें बीपी की बीमारी है।

डॉक्टर कहते हैं, खानपान में गड़बड़ी, नींद की कमी, जंक फूड्स और ज्यादा नमक वाला खाना इसकी बड़ी वजह बन रहे हैं। हाइपरटेंशन को साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि समय के साथ इसका असर आपकी किडनी, दिल-ब्रेन और आंखों सभी पर पड़ सकता है।

डॉक्टर कहते हैं, हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने के लिए खान-पान में सुधार करना सबसे जरूरी है। अध्ययनों में डैश डाइट प्लान को ब्लड प्रेशर की समस्या में सबसे फायदेमंद बताया गया है।
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डैश डाइट के क्या फायदे हैं? - फोटो : Freepik.com
डैश डाइट, ब्लड प्रेशर वालों के लिए कारगर

डैश डाइट यानी डायटरी अप्रोच टू स्टॉप हाइपरटेंशन को वैज्ञानिक ने हाई ब्लड प्रेशर की समस्या के लिए प्रमाणित किया है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट होता है कि इससे ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। 
 
  • इस डाइट में नमक वाली चीजों को कम करने के साथ  फल-सब्जियां, साबुत अनाज, लो-फैट डेयरी, नट्स और पोटैशियम-मैग्नीशियम से भरपूर चीजों पर जोर दिया जाता है। 
  • रिसर्च में पाया गया है कि यह डाइट कुछ ही हफ्तों में ब्लड प्रेशर कम करने में मदद कर सकती है। 
  •  सिर्फ बीपी ही नहीं बल्कि हृदय रोग, वजन को कंट्रोल करने और डायबिटीज का जोखिम कम करने में भी मददगार मानी जाती है।
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डैश डाइट में क्या खाते हैं? - फोटो : Freepik.com
डैश कैसे काम करती है?

डैश डाइट का मुख्य उद्देश्य आहार में सोडियम यानी नमक की मात्रा कम करना और ऐसे पोषक तत्व बढ़ाना है जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। 
  • इसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज, लो-फैट डेयरी, बीन्स, नट्स और लीन प्रोटीन को प्राथमिकता दी जाती है। 
  • ज्यादा नमक, रेड मीट, चीनी और प्रोसेस्ड फूड्स की मात्रा इसमें काफी कम कर दी जाती है, क्योंकि ये सभी ब्लड प्रेशर की दिक्कतों को बढ़ाने वाले माने जाते हैं।

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पौष्टिक चीजों का करिए सेवन - फोटो : Freepik.com
डैश डाइट में क्या खाना होता है?

डैश डाइट में पोषण से भरपूर और कम नमक वाले खाद्य पदार्थ खाने होते हैं।
  • इसमें रोजाना फल और हरी सब्जियां खाने की सलाह दी जाती है। इनमें पोटैशियम और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है।
  • साबुत अनाज जैसे ओट्स, ब्राउन राइस, मल्टीग्रेन रोटी और दलिया को इस डाइट का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
  • लो-फैट दूध, दही और पनीर कैल्शियम का अच्छा स्रोत होते हैं जो ब्लड प्रेशर संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं।
  • प्रोटीन के लिए दालें, राजमा, चना, मछली और स्किनलेस चिकन को बेहतर विकल्प माना जाता है। बादाम, अखरोट और बीजों में हेल्दी फैट पाए जाते हैं जो हार्ट हेल्थ के लिए लाभकारी हो सकते हैं।
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ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखना जरूरी - फोटो : Freepik.com
डैश डाइट ब्लड प्रेशर को कैसे कंट्रोल करती है?

डैश डाइट शरीर में सोडियम कम करके और जरूरी मिनरल्स बढ़ाकर ब्लड प्रेशर पर असर डालती है। ज्यादा नमक शरीर में पानी रोक सकता है जिससे रक्त वाहिकाओ पर दबाव बढ़ता है। डैश डाइट नमक कम करने पर जोर देती है जिससे यह दबाव घट सकता है।
 
  • डाइट में मौजूद पोटैशियम सोडियम के प्रभाव को संतुलित करने में मदद करता है। 
  • मैग्नीशियम और कैल्शियम भी रक्त वाहिकाओं की कार्यप्रणाली बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं।
  • डाइट में शामिल फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर चीजें सूजन कम करने और हृदय स्वास्थ्य को सुधारने में मददगार है।
  • इसके अलावा वजन कंट्रोल रखने में भी ये सहायक है। वजन कम होने से ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा कम हो जाता है।



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स्रोत:
DASH Eating Plan


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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