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Hepatitis Day: एक-दो नहीं पांच तरह का होता है हेपेटाइटिस इंफेक्शन, शरीर दे रहा है ये संकेत तो तुरंत कराएं जांच

Mon, 27 Jul 2026 08:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हेपेटाइटिस लिवर में होने वाली सूजन है, जिसका सबसे सामान्य कारण वायरल संक्रमण होता है। अत्यधिक शराब का सेवन, कुछ दवाएं, ऑटोइम्यून बीमारियां और विषैले रसायन भी इसका कारण बन सकते हैं।
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हेपेटाइटिस संक्रमण - फोटो : Amarujala.com/AI
लिवर में सूजन की समस्या दुनियाभर के लोगों में तेजी से बढ़ती देखी जा रही है। अगर इसपर समय रहते ध्यान न दिया जाए या फिर इलाज न कराया जाए तो ये कई तरह की दिक्कतें बढ़ा सकती हैं। हेपेटाइटिस इंफेक्शन को लिवर में सूजन का सबसे बड़ा कारण माना जाता है।

हमारा लिवर लगातार काम करता रहता है। भोजन को ऊर्जा में बदलने से लेकर शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने और पाचन में मदद करने तक इसकी पूरे शरीर को स्वस्थ रखने में बड़ी भूमिका होती है। हालांकि जब लिवर में संक्रमण हो जाए तो इसके काम करने की क्षमता प्रभावित हो जाती है जिसका पूरे शरीर पर असर देखा जाता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को हेपेटाइटिस से बचाव करते रहने की सलाह देते हैं।

हेपेटाइटिस और इसके गंभीर प्रभावों के बारे में लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। इस दिन को नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉ. बारूक ब्लमबर्ग के जन्मदिन की याद में भी मनाया जाता है, जिन्होंने हेपेटाइटिस बी वायरस की खोज की थी।

आइए जानते हैं कि हेपेटाइटिस कितना खतरनाक है और इससे कैसे बचा जा सकता है?
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लिवर का संक्रमण और बीमारी - फोटो : Adobe Stock
हेपेटाइटिस संक्रमण का खतरा

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि दुनियाभर में करोड़ों लोग किसी न किसी प्रकार के हेपेटाइटिस से प्रभावित हैं। कई मामलों में यह संक्रमण कुछ दिनों या हफ्तों में ठीक हो जाता है, जबकि कुछ लोगों में इससे लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर और यहां तक कि लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का भी खतरा हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, हेपेटाइटिस पांच प्रकार का होता है। सभी के फैलने का तरीका, गंभीरता, इलाज और बचाव भी अलग-अलग है। अच्छी बात ये है कि समय पर जांच, टीकाकरण और सावधानियों से इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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हेपेटाइटिस का संक्रमण - फोटो : Freepik.com
हेपेटाइटिस ए के बारे में जानिए

हेपेटाइटिस-ए वायरस दूषित भोजन और पानी के जरिए फैलता है। इसका खतरा आमतौर पर उन जगहों पर ज्यादा पाया जाता है जहां स्वच्छता की कमी होती है। 
 
  • संक्रमण के बाद बुखार, कमजोरी, उल्टी, भूख न लगना, पेट दर्द और पीलिया जैसे लक्षण हो सकते हैं। 
  • वैसे तो इस संक्रमण से अधिकांश लोग पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, हालांकि कुछ लोगों में इसके गंभीर खतरे भी हो सकते हैं।
  • इस संक्रमण से बचाव की वैक्सीन उपलब्ध है। इसके साथ स्वच्छता बनाए रखना भी जोखिमों को कम कर सकता है।

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हेपेटाइटिस बी की समस्या - फोटो : Freepik.com
हेपेटाइटिस-बी का खतरा

हेपेटाइटिस-बी मुख्य रूप से संक्रमित खून, असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुई और संक्रमित मां से नवजात शिशु में फैल सकता है। 
 
  • यह संक्रमण कई बार लंबे समय तक शरीर में बना रहता है और क्रॉनिक हेपेटाइटिस का रूप ले सकता है। 
  • लंबे समय संक्रमण रहने पर लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। 
  • इससे बचाव के लिए भी प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध हैं।
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हेपेटाइटिस सी का संक्रमण - फोटो : Freepik.com
हेपेटाइटिस-सी की समस्या

हेपेटाइटिस-बी की ही तरह से सी भी मुख्य रूप से संक्रमित खून के संपर्क से फैलता है। 
 
  • असुरक्षित ब्लड ट्रांसफ्यूजन को इसका बड़ा कारण माना जाता है लेकिन अब स्क्रीनिंग से जोखिम कम हुआ है। 
  • संक्रमित सुई, ड्रग्स इंजेक्शन और कुछ मामलों में असुरक्षित मेडिकल उपकरण भी संक्रमण का कारण बन सकते हैं। 
  • अधिकतर मरीजों में शुरुआती लक्षण नहीं दिखते, यही वजह है कि कई लोग वर्षों तक संक्रमित रहते हैं। 
  • हेपेटाइटिस-सी से बचाव के लिए कोई भी प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
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हेपेटाइटिस डी का संक्रमण - फोटो : Freepik.com
हेपेटाइटिस डी और ई
 
  • हेपेटाइटिस-डी वायरस अकेले संक्रमण नहीं करता। यह केवल उन्हीं लोगों में होता है जिन्हें पहले से हेपेटाइटिस बी का संक्रमण हो। दोनों संक्रमण साथ होने पर लिवर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। संक्रमित रक्त और शरीर के तरल पदार्थ से इसके फैलने का खतरा रहता है। चूंकि हेपेटाइटिस डी का संक्रमण बी पर निर्भर करता है, इसलिए हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण इससे भी सुरक्षा प्रदान करता है।
 
  • वहीं हेपेटाइटिस-ए की ही तरह हेपेटाइटिस-ई भी मुख्य रूप से दूषित पानी और भोजन के माध्यम से फैलता है। साफ पानी, साफ भोजन और हाथों की सफाई इस संक्रमण से बचाव के लिए सबसे जरूरी माने जाते हैं।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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