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World Hepatitis Day 2023: हेपेटाइटिस क्या है? जानें इसके प्रकार, लक्षण और कारण

Fri, 28 Jul 2023 08:52 AM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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विश्व हेपेटाइटिस दिवस 2023 - फोटो : istock
डॉ. परवेश मलिक 
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन)

Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik

World Hepatitis Day 2023: 28 जुलाई को हर साल दुनियाभर में विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। इसे मनाने की वजह लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना है, ताकि हेपेटाइटिस की शिकायत से बचा जा सके। हेपेटाइटिस लिवर से जुड़ी बीमारी है। लिवर हमारे शरीर का एक जरूरी अंग है, जो खून में से टॉक्सिन्स को साफ करने के साथ ही भोजन पचाने की प्रक्रिया में मदद करता है। हालांकि हेपेटाइटिस होने पर संक्रमण के कारण लीवर में सूजन आ जाती है। इसके कारण लीवर पर असर पड़ता है। ये गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जिसका इलाज भी आम मरीजों के लिए काफी महंगा होता है। ऐसे में हेपेटाइटिस होने के कारणों को जानकर बचाव के उपाय कर सकते हैं। वहीं हेपेटाइटिस के लक्षणों के बारे में भी जान लें ताकि समय रहते सही इलाज अपना सकें। चलिए जानते हैं क्या होता है हेपेटाइटिस, इसके प्रकार और लक्षण। 
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हेपेटाइटिस क्या है? - फोटो : iStock
हेपेटाइटिस क्या है?

हेपेटाइटिस लिवर से जुड़ी बीमारी है, जो संक्रमण के कारण होती है। इस बीमारी में लिवर में सूजन आ जाती है। हेपेटाइटिस एक महामारी बनती जा रही है, जिसके कारण हर साल मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है। हेपेटाइटिस के सभी प्रकारों को गंभीरता से लेना चाहिए। इस बीमारी को लेकर जागरूकता पैदा करके और जन्म के बाद शिशु को वैक्सीन देकर हेपेटाइटिस के खतरे से बचाया जा सकता है।
 
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हेपेटाइटिस वायरस के आधार पर पांच तरह के होते हैं। - फोटो : iStock
हेपेटाइटिस के प्रकार

हेपेटाइटिस वायरस के मुताबिक पांच प्रकार के होते हैं। इसमें हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी, ई शामिल है। पांचों प्रकार के हेपेटाइटिस खतरनाक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हेपेटाइटिस ए से हर साल लगभग 1.4 मिलियन लोग ग्रस्त हो रहे हैं।

गंभीरता के आधार पर भी हेपेटाइटिस को पहचाना जाता है। एक्यूट हेपेटाइटिस में अचानक लीवर में सूजन आती है, जिसके लक्षण 6 महीने तक रहते हैं। इलाज होने पर रोग धीरे धीरे ठीक होने लगता है। एक्यूट हेपेटाइटिस आमतौर पर एचएवी इंफेक्शन के कारण होता है। दूसरा क्रॉनिक हेपेटाइटिस है, जिसमें एचइवी इंफेक्शन रोगी के इम्यून सिस्टम को बुरी तरह प्रभावित करता है। लीवर कैंसर और लिवर की बीमारी के कारण ज्यादा लोगों की मौत हो रही है।  

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खून और संक्रमित इंजेक्शन से हेपेटाइटिस होता है - फोटो : Pixabay
हेपेटाइटिस के कारण
  • वायरस इन्फेक्शन से होने वाली ये बीमारी कई कारणों से हो सकती है। हेपेटाइटिस ए दूषित खाने और दूषित पानी के सेवन से हो सकता है।
  • वहीं संक्रमित खून के ट्रांसफ्यूजन और सिमेन व दूसरे फ्लूइड के एक्सपोजर के कारण भी हेपेटाइटिस बी हो सकता है।
  • खून और संक्रमित इंजेक्शन के इस्तेमाल से हेपेटाइटिस सी की शिकायत हो सकती है।
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दवाइयों के साइट इफेक्ट से हेपेटाइटिस हो सकता है। - फोटो : iStock
  • एचडीवी वायरस के कारण हेपेटाइटिस डी से ग्रसित हो सकते हैं। जो लोग पहले से एचबीवी वायरस से संक्रमित होते हैं, वह इस वायरस से भी संक्रमित हो सकते हैं। हालांकि एचडीवी और एचबीवी दोनो ही वायरस के एक साथ एक ही रोगी में होने से स्थिति गंभीर हो जाती है।
  • हेपेटाइटिस ई एचईवी वायरस के कारण होता है। ज्यादातर देशों में विषाक्त पानी और खाने के कारण हेपेटाइटिस का यह वायरस फैला हुआ है।
  • इसके अलावा ज्यादा दवाइयों के सेवन से भी लिवर सेल्स में सूजन आने लगती है और हेपेटाइटिस का खतरा बढ़ जाता है।
  • अधिक शराब का सेवन करने से हेपेटाइटिस का खतरा बढ़ता है। एल्कोहल हमारे लिवर को सीधे प्रभावित करती है और शरीर के दूसरे भागों में भी इसका सर्कुलेशन होने लगता है, जो खतरा बन सकता है।
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उल्टी आना - फोटो : Pixabay
हेपेटाइटिस के लक्षण
  • हमेशा थकान महसूस होना
  • त्वचा की रंगत पीली होना
  • आंखों के सफेद हिस्से का रंग पीला पड़ जाना
  • भूख न लगना या कम लगना
  • उल्टी आना या जी मिचलाना
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चेहरे और आंखों नें पीलापन - फोटो : iStock
  • पेट दर्द और सूजन होना
  • सिर दर्द व चक्कर आना
  • यूरिन का रंग बदलना
  • अचानक वजन कम होने लगता
  • पीलिया होना या कई सप्ताह तक बुखार बना रहना। 
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नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।  

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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