विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, दुनियाभर में लगभग 42.2 करोड़ लोग डायबिटीज की गंभीर स्वास्थ्य समस्या के शिकार हैं। हर साल मधुमेह रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। ये चिंताजनक है कि जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या होती है, उनमें अन्य कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का जोखिम भी बढ़ जाता है। डायबिटीज मरीजों को हेपेटाइटिस का खतरा भी हो सकता है। हेपेटाइटिस भी बहुत ज्यादा तेजी से फैल रही बीमारी है, जिसमें लिवर में सूजन आ जाती है। भारत में डायबिटीज और हेपेटाइटिस दोनों ही रोग एक बड़ी आबादी को प्रभावित कर रहे हैं। डब्ल्यूएचओ की साल 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हेपेटाइटिस बी से संक्रमितों की संख्या लगभग चार करोड़ है, साथ ही हेपेटाइटिस सी से लगभग 1.2 करोड़ लोग प्रभावित हैं। हालांकि गंभीरता तब बढ़ जाती है, जब हेपेटाइटिस से संक्रमित मरीज हृदय रोग या डायबिटीज जैसी बीमारी से ग्रस्त हो जाता है।
आंकड़ों के मुताबिक, दुनियाभर में क्रोनिक एचसीवी (हेपेटाइटिस सी वायरस) से पीड़ित एक तिहाई लोगों को टाइप 2 डायबिटीज है। वहीं विशेषज्ञों के मुताबिक इससे हेपेटाइटिस सी और अधिक गंभीर हो सकता है। ये चिंताजनक है कि हेपेटाइटिस सी के उपचार के लिए उपयोग की जाने वाली थेरेपी से डायबिटीज टाइप 1 और टाइप 2 दोनों होने की संभावना रहती है। जो लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, उन्हें चिंता रहती है कि हेपेटाइटिस सी होने पर उनकी डायबिटीज की समस्या गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञ से जानिए कि डायबिटीज के मरीजों को हेपेटाइटिस का खतरा कितना रहता है? डायबिटीज के रोगी हेपेटाइटिस से बचने के लिए क्या करें? और हेपेटाइटिस व डायबिटीज के इलाज के लिए क्या किया जा सकता है?