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World Hepatitis Day 2023: डायबिटीज रोगियों में हेपेटाइटिस का जोखिम क्यों अधिक होता है, विशेषज्ञ से जानें

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डायबिटीज मरीजों में हेपेटाइटिस का खतरा ज्यादा - फोटो : amar ujala
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, दुनियाभर में लगभग 42.2 करोड़ लोग डायबिटीज की गंभीर स्वास्थ्य समस्या के शिकार हैं। हर साल मधुमेह रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। ये चिंताजनक है कि जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या होती है, उनमें अन्य कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का जोखिम भी बढ़ जाता है। डायबिटीज मरीजों को हेपेटाइटिस का खतरा भी हो सकता है। हेपेटाइटिस भी बहुत ज्यादा तेजी से फैल रही बीमारी है, जिसमें लिवर में सूजन आ जाती है। भारत में डायबिटीज और हेपेटाइटिस दोनों ही रोग एक बड़ी आबादी को प्रभावित कर रहे हैं। डब्ल्यूएचओ की साल 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हेपेटाइटिस बी से संक्रमितों की संख्या लगभग चार करोड़ है, साथ ही हेपेटाइटिस सी से लगभग 1.2 करोड़ लोग प्रभावित हैं। हालांकि गंभीरता तब बढ़ जाती है, जब हेपेटाइटिस से संक्रमित मरीज हृदय रोग या डायबिटीज जैसी बीमारी से ग्रस्त हो जाता है।

आंकड़ों के मुताबिक, दुनियाभर में क्रोनिक एचसीवी (हेपेटाइटिस सी वायरस) से पीड़ित एक तिहाई लोगों को टाइप 2 डायबिटीज है। वहीं विशेषज्ञों के मुताबिक इससे हेपेटाइटिस सी और अधिक गंभीर हो सकता है। ये चिंताजनक है कि हेपेटाइटिस सी के उपचार के लिए उपयोग की जाने वाली थेरेपी से डायबिटीज टाइप 1 और टाइप 2 दोनों होने की संभावना रहती है। जो लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, उन्हें चिंता रहती है कि हेपेटाइटिस सी होने पर उनकी डायबिटीज की समस्या गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञ से जानिए कि डायबिटीज के मरीजों को हेपेटाइटिस का खतरा कितना रहता है? डायबिटीज के रोगी हेपेटाइटिस से बचने के लिए क्या करें? और हेपेटाइटिस व डायबिटीज के इलाज के लिए क्या किया जा सकता है?
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डायबिटीज मरीजों में इंफेक्शन का खतरा ज्यादा - फोटो : iStock
डायबिटीज के मरीज में गुर्दे का विकार स्वाभाविक

डायबिटीज के मरीजों में हेपेटाइटिस की गंभीरता पर लखनऊ स्थित डाॅ अभिषेक अरुण का कहना है कि डायबिटीज के मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है। ऐसे रोगी किसी भी तरह के वायरल इंफेक्शन और बैक्टीरियल इंफेक्शन की चपेट में आसानी से आ सकते हैं। अगर मरीज लंबे समय से डायबिटीज से पीड़ित है, तो उनमें गुर्दे का विकार होना स्वाभाविक है। ऐसे मरीज कई बार डायलिसिस पर होते हैं, जिन्हें डायबिटीज और हेपेटाइटिस दोनों होता है।

मधुमेह रोगियों के लिए स्थिति तब अधिक गंभीर हो जाती है, जब उन्होंने हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण न कराया हो। मरीज के डायलिसिस के वक्त या उससे पहले संक्रमण होना आम बात है। संक्रमण गुर्दे की बीमारी को जन्म दे सकता है, जिससे हेपेटाइटिस होने की संभावना बढ़ती है।
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मधुमेह रोगियों में हेपेटाइटिस का खतरा - फोटो : iStock
संक्रमित खून या दूषित खाने से डायबिटीज के मरीजों में हेपेटाइटिस का खतरा 

हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी दोनों ही संक्रमित खून के कारण फैलते हैं, जबकि हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस ई दूषित खानपान के कारण हो सकता है। हेपेटाइटिस ए और ई किसी सामान्य व्यक्ति में उतना काॅमन न भी हो लेकिन डायबिटीज के मरीजों को आसानी से हो सकता है। इसे इंफेक्टेड हेपेटाइटिस कह सकते हैं।

अस्पताल में भर्ती मरीजों, डायलिसिस मरीजों को हेपेटाइटिस बी और सी का खतरा बहुत ज्यादा होता है, यानी जिन मरीजों में किसी भी तरह से ब्लड इंटिमेशन होता है, उनमें खून से ट्रांसफर होने वाला हेपेटाइटिस का वायरस पहुंच सकता है।

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डायबिटीज की दवाएं लिवर पर असर करती हैं - फोटो : Pixabay
हेपेटाइटिस और डायबिटीज की दवाएं

जो सामान्य लिवर के मरीज होते हैं, उन्हें हेपेटाइटिस की ग्रेडिंग यानी रोग के स्तर व गंभीरता के मुताबिक कई दवाएं दी जाती हैं। इसलिए डायबिटीज की दवाएं भी बदलती रहती हैं, क्योंकि डायबिटीज की ज्यादातर दवाएं लिवर पर असर डालती है। ऐसे में अगर लिवर गड़बड़ है तो डायबिटीज की दवाएं साइड इफेक्ट्स भी कर सकती हैं।

डॉक्टर अभिषेक अरुण का कहना है कि डायबिटीज और हेपेटाइटिस से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए जरूरी है कि उनकी पूरी स्क्रीनिंग की जाए। ताकि ये पता चल सके कि हेपेटाइटिस किस स्टेज पर है और डायबिटीज के इलाज के दौरान अन्य कोई जोखिम होने की संभावना तो नहीं है।

इसके लिए डायबिटीज मरीज का लिवर फंक्शन टेस्ट कराया जाना जरूरी है। अगर डायबिटीज के मरीज की समय-समय पर जांच होती रहती है तो ये पता चलता है कि उनके लिवर को सुरक्षित रखने के साथ ही किस तरह की दवाएं किस वक्त पर देनी हैं।
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शुगर कंट्रोल न होने पर हेपेटाइटिस का खतरा बढ़ता है - फोटो : Pixabay
चिकित्सकों के लिए चुनौती

डॉक्टर अभिषेक ने बताया कि डायबिटीज के साथ ये बहुत सामान्य सी समस्या है। अस्पताल में ऐसे बहुत सारे मरीज आते हैं, जो इंफेक्टिव हेपेटाइटिस और पेरिनेटल हेपेटाइटिस के शिकार होते हैं। डाॅक्टरों के लिए चुनौती तब होती है, जब हेपेटाइटिस की वजह से लिवर सिरोसिस हो जाता है यानी लिवर बहुत ज्यादा खराब हो जाता है। दिक्कत तब होती है, जब ऐसे मरीजों की ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं होती, उन्हें बहुत जल्दी भर्ती करने की जरूरत पड़ जाती है। ऐसे मरीजों में ब्लीडिंग, हेपाटो कोमा, कई तरह के इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है।

इलाज के लिए चिकित्सकों की प्राथमिकता होती है कि मधुमेह रोगियों को शुगर नियंत्रित करने के साथ ही उन्हें सही दवा दी जाए, ताकि मरीज को कोई नया इंफेक्शन न हो जाए। इसके अलावा मरीजों को सही खानपान की जानकारी भी दी जाती है, क्योंकि हेपेटाइटिस के मरीज सही तरह से कुछ खा नहीं कर पाते। मरीज को पता होना चाहिए कि उसे क्या खाना है और कब खाना है ताकि शुगर को लिवर के विकार के साथ संभालना आसान हो सके। 
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हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण सबके लिए जरूरी - फोटो : istock
डायबिटीज रोगियों के हेपेटाइटिस से बचाव के तरीके
  • डायबिटीज के मरीजों को हेपेटाइटिस के खतरे से बचाने के लिए हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण कराना जरूरी होता है। जो भी डायबिटीज के मरीज होते हैं, उन्हें कुछ जरूरी वैक्सीनेशन कराने होते हैं। इन टीकों में हेपेटाइटिस बी की वैक्सीन अनिवार्य है। नेशनल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम के तहत अब जन्म के बाद बच्चे को हेपेटाइटिस बी का टीका लगाया जाता है। लेकिन जो पुराने मधुमेह रोगी हैं, जिन्हें उस दौर में हेपेटाइटिस बी का टीका नहीं लग सका, उनको वैक्सीनेशन जरूर कराना चाहिए।
  • डायबिटीज के मरीज ही नहीं जिन लोगों को भी हेपेटाइटिस बी का टीका नहीं लगा हो, उन्हें वैक्सीन लगवानी चाहिए। अधिकतर लोग इस बारे में जागरूक नहीं हैं। वह सोचते हैं कि जब बीमारी होगी, तब देखा जाएगा। लेकिन हर व्यक्ति के लिए हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण जरूरी है।
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हेपेटाइटिस से बचाव के लिए स्वच्छ और पौष्टिक खानपान होना चाहिए। - फोटो : iStock
  • मधुमेह रोगी अगर अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं या उनकी डायलिसिस हो रही है तो उन्हें समय समय पर जांच कराते रहना चाहिए ताकि पता चल सके कि मरीज में किस प्रकार का इंफेक्शन है। क्योंकि डायलिसिस के वक्त संक्रमित होना सामान्य है।
  • हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस ई दूषित खाने और गंदे हाथों से हो सकता है, इसलिए मरीजों को खानपान में स्वच्छता का खास ध्यान रखना चाहिए।
  • पौष्टिक खानपान और सही डाइट को अपनाकर भी मरीज लिवर को सेहतमंद रख सकते हैं,  साथ ही मधुमेह को नियंत्रित कर सकते हैं। 
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नोट: यह लेख डायबिटोलॉजिस्ट डॉ अभषेक अरुण से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉ अभिषेक अरुण का इस क्षेत्र में का लंबा अनुभव है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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