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World Heart Day: आपकी धमनियों में भी तो नहीं जम रहा प्लाक? हो सकते हैं हार्ट अटैक का शिकार, ऐसे बरतें सावधानी

Mon, 29 Sep 2025 11:30 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • प्लाक असल में फैट, कोलेस्ट्रॉल, कैल्शियम और मृत कोशिकाओं का मिश्रण होता है। ये रक्त वाहिकाओं की भीतरी परत में जमा होने लगते हैं। ये प्लाक धमनियों को संकरा कर देते हैं जिससे खून का बहाव बाधित हो जाता है। 
  • धमनियों में प्लाक बनने को मेडिकल भाषा में एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है। यह धीरे-धीरे खून की नलियों को संकरा कर देता है और हृदय तक रक्त व ऑक्सीजन की सप्लाई पर असर डालता है। 
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धमनियों में प्लाक बनने की समस्या - फोटो : adobe stock
Heart Problems: हृदय रोगों के मामले अब सभी उम्र के लोगों में आम हो गए हैं। पहले अधिकतर मामले सिर्फ उम्र बढ़ने के साथ हुआ करते थे, हार्ट अटैक की समस्या अधिकतर बुजुर्गों में देखी जाती थी हालांकि अब कम उम्र के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक दुनियाभार में हर साल लाखों लोगों की मौत हृदय रोगों के कारण हो जाती है। जिस तरह से हमारे जीवनशैली में नकारात्मक बदलाव आया है, उसे इस समस्या के मुख्य कारण के रूप में देखा जा सकता है। धूम्रपान, शराब और शरीरिक निष्क्रियता ने तमाम तरह की दिल की बीमारियों के जोखिम को बढ़ा दिया है। 

हृदय रोगों के लिए जिन कारणों को जिम्मेदार माना जाता रहा है, धमनियों में प्लाक का जमना उनमें सबसे प्रमुख है, इसे मेडिकल भाषा में एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है। यह धीरे-धीरे खून की नलियों को संकरा कर देता है और हृदय तक रक्त व ऑक्सीजन की सप्लाई पर असर डालता है। 

हृदय संबंधी रोगों (सीवीडी) के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने और बेहतर खानपान-व्यायाम के माध्यम से हृदय स्वास्थ्य को ठीक रखने के उद्देश्य से हर साल 29 सितंबर को वर्ल्ड हार्ट डे (विश्व हृदय दिवस) मनाया जाता है।

कहीं आप भी तो इसका शिकार नहीं हैं?
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धमनियों में जमाव की समस्या - फोटो : Adobe Stock
पहले प्लाक और इसके बनने के कारणों को समझ लीजिए

प्लाक असल में फैट, कोलेस्ट्रॉल, कैल्शियम और मृत कोशिकाओं का मिश्रण होता है। ये रक्त वाहिकाओं की भीतरी परत में जमा होने लगते हैं। ये प्लाक धमनियों को संकरा कर देते हैं जिससे खून का बहाव बाधित हो जाता है।

 शोध बताते हैं कि यह प्रक्रिया कई वर्षों में विकसित होती है और जब तक लक्षण सामने आते हैं, तब तक धमनी का बड़ा हिस्सा ब्लॉक हो चुका होता है। 

प्लाक बनने के पीछे कई जोखिम कारक जिम्मेदार होते हैं। इनमें सबसे अहम है अस्वस्थ जीवनशैली। लगातार जंक फूड, अधिक तेल-घी, रेड मीट और प्रोसेस्ड फूड खाने से शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल  बढ़ जाता है। इसके अलावा धूम्रपान और शराब धमनियों की दीवार को नुकसान पहुंचाते हैं और प्लाक जमने की प्रक्रिया तेज कर देते हैं। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों में यह खतरा और अधिक बढ़ जाता है क्योंकि इन बीमारियों से धमनियों की परत कमजोर हो जाती है। 
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हृदय रोग, हार्ट अटैक का खतरा - फोटो : adobe stock photos
प्लाक का हृदय पर असर

जब धमनियों में प्लाक जमा हो जाता है, तो हृदय को पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन नहीं मिल पाता। इससे व्यक्ति को सीने में दर्द, थकान और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। अगर प्लाक टूट जाता है तो उसके आसपास रक्त का थक्का बन सकता है, जो धमनी को पूरी तरह बंद कर देता है। इससे हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है।

शोध में यह पाया गया है कि जिन लोगों की धमनियों में 70% से अधिक ब्लॉकेज होता है, उन्हें अचानक हार्ट फेल्योर या स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

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हार्ट अटैक का बढ़ता खतरा - फोटो : Adobe stock photos
युवाओं में हृदय रोगों का खतरा

हृदय रोग विशेषज्ञ कहते हैं, युवाओं में हृदय रोगों के बढ़ते खतरे का मुख्य कारण जीवनशैली में गड़बड़ी और धूम्रपान को माना जा सकता है। इसके अलावा कोलेस्ट्रॉल के बढ़े हुए स्तर के कारण धमनियों में प्लाक बनने की समस्या बहुत ही कम उम्र के लोगों में भी देखने को मिल रही है। अगर हमने समय रहते इस संबध में ध्यान नहीं दिया तो आने वाले वर्षों में देश की बड़ी आबादी हृदय रोगों का शिकार हो जाएगी।
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हृदय रोगों का खतरा कैसे कम करें? - फोटो : Freepik.com
धमनियों में प्लाक के निर्माण को रोकने के उपाय

हृदय रोग विशेषज्ञ कहते हैं, अगर हम सभी नियमित रूप से बस इन चार बातों को ध्यान में रखें तो हृदय रोग के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
  • धमनियों में संकुचन की समस्या को रोकने के लिए धूम्रपान बिल्कुल बंद कर दें। हृदय के स्वास्थ्य के लिए धूम्रपान बेहद खतरनाक हो सकता है। 
  • आहार पर विशेष ध्यान दें। भोजन में हेल्दी फैट वाली चीजें जैसे देसी घी, बादाम, अखरोट, मछली आदि को शामिल करें। तले-भुने चीजों का सेवन कम करें। 
  • फाइबर युक्त आहार जैसे मकई, गेहूं के खाद्य पदार्थ, जई, दाल, सब्जियां और बीन्स को भोजन में शामिल करें। 
  • नियमित रूप से व्यायाम करें। योग और प्राणायाम से काफी लाभ मिल सकता है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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