फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

World Heart Day 2025: हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर को एक ही समझने की न करें भूल, जानिए क्या है दोनों में अंतर

Mon, 29 Sep 2025 11:30 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • दिल की बीमारियों को लेकर अक्सर लोगों में भ्रम देखा जाता रहा है कि हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर एक ही हैं या अलग? आइए इसे समझते हैं।
विज्ञापन
1 of 5
हार्ट अटैक और हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Adobe stock Images
Heart Health: लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी ने जिन बीमारियों के जोखिमों को सबसे ज्यादा बढ़ा दिया है, हृदय रोग उनमें शीर्ष पर हैं। अब कम उम्र के लोग यहां तक कि बच्चे भी इसका शिकार देखे जा रहे हैं। भारतीय आबादी भी इससे सुरक्षित नहीं है, यहां बड़ी संख्या में लोगों में हृदय रोग और उसके जोखिम कारक देखे जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, चूंकि किसी भी उम्र के व्यक्ति को हृदय रोगों से सुरक्षित नहीं माना जा सकता है, इसलिए जरूरी हो गया है कि बचपन से ही हार्ट को हेल्दी रखने वाली आदतें डालीं जाएं।

हृदय संबंधी रोगों (सीवीडी) के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने और बेहतर खानपान-व्यायाम के माध्यम से हृदय स्वास्थ्य को ठीक रखने के उद्देश्य से हर साल 29 सितंबर को वर्ल्ड हार्ट डे (विश्व हृदय दिवस) मनाया जाता है।

विश्व हृदय दिवस 2025 का थीम है- डोन्स मिस अ बीट यानी एक भी धड़कन न चूके। यह विषय हृदय स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी संकेतों को पहचानने, समय पर चिकित्सा सहायता लेने और गंभीर हृदय संबंधी घटनाओं को रोकने के लिए हृदय-स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने के महत्व पर जोर देता है।

हृदय स्वास्थ्य और इससे संबंधित समस्याओं को लेकर अब भी लोगों में कई तरह का कंफ्यूजन देखा जा रहा है। उनमें से एक है क्या हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर एक ही है?
विज्ञापन

2 of 5
युवाओं में बढ़ती हृदय की बीमारियां - फोटो : Adobe stock photos
हृदय स्वास्थ्य पर दें ध्यान

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक दुनियाभर में करीब 1.8 करोड़ लोगों की मौत हृदय रोगों से होती है, इनमें से बड़ी संख्या 40 साल से कम उम्र के लोगों की है। भारत में स्थिति और भी गंभीर है क्योंकि यहां हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर जैसी समस्याएं कम उम्र में ही सामने आने लगी हैं।

दिल की बीमारियों को लेकर अक्सर लोगों में भ्रम देखा जाता रहा है कि हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर में फर्क क्या है? कई लोग इन्हें एक ही मान लेते हैं, लेकिन वास्तव में दोनों बिल्कुल अलग स्थितियां हैं।  इस अंतर को समझना बहुत जरूरी है।
विज्ञापन

3 of 5
हार्ट अटैक का जोखिम - फोटो : adobe stock
पहले  हार्ट अटैक के बारे में जानिए

हार्ट अटैक तब होता है जब दिल की मांसपेशियों तक खून का बहाव प्रभावित हो जाता है या अचानक रुक जाता है। इसका मुख्य कारण धमनियों में प्लाक (कोलेस्ट्रॉल और फैट का जमाव) बनना होता है। जब यह प्लाक टूटता है तो  इससे ब्लड क्लॉट बनते हैं जो खून का बहाव रोक सकते हैं।

हार्ट अटैक की स्थिति में सीने में तेज दर्द या दबाव, दर्द के हाथ-पीठ या जबड़े तक फैलने, सांस लेने में तकलीफ, पसीना और मतली आने जैसी स्थितियां शामिल हैं। हार्ट अटैक एक गंभीर स्थिति है जिसमें तुरंत डॉक्टर की मदद ज़रूरी होती है। अगर समय पर इलाज मिल जाए तो जान बचाई जा सकती है। 

4 of 5
हार्ट फेलियर की समस्या - फोटो : adobe stock photos
अब हार्ट फेलियर के बारे में जानिए

हृदय गति रुकना एक गंभीर स्थिति है जिसमें हृदय की मांसपेशियां शरीर के लिए पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन पंप करने में असमर्थ या बहुत कमजोर हो जाती है। हार्ट फेलियर का मतलब यह नहीं कि दिल पूरी तरह से रुक गया है, बल्कि इसका मतलब है कि दिल अपनी पंपिंग क्षमता खोने लगता है। यानी दिल शरीर के बाकी हिस्सों तक उतना खून नहीं पहुंचा पाता जितनी शरीर को जरूरत होती है।

यह एक धीरे-धीरे बढ़ने वाली स्थिति है। लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बार-बार हुए हार्ट अटैक, धूम्रपान या मोटापा इसे बढ़ा सकती है। इसमें मरीज को सांस लेने में दिक्कत, पैरों में सूजन, थकान, तेज धड़कन और रात में बार-बार जागना जैसी समस्याएं होती हैं।

हार्ट फेलियर से बचे रहने के लिए दवाइयों, लाइफस्टाइल में बदलाव की मदद ली जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
हृदय स्वास्थ्य को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : Freepik.com
अब दोनों में अंतर को समझिए

हार्ट फेलियर और हार्ट अटैक दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं। इसमें अंतर को ऐसे समझा जा सकता है।
  • हार्ट अटैक अचानक होता है, इसमें धमनियां ब्लॉक हो जाती हैं और खून दिल तक नहीं पहुंच पाता।
  • हार्ट फेलियर धीरे-धीरे बढ़ता है, इसमें दिल कमजोर होकर खून पंप करना कम कर देता है।
हार्ट अटैक एक आपात स्थिति है, जबकि हार्ट फेलियर एक क्रॉनिक (लंबे समय तक रहने वाली) बीमारी है। हार्ट अटैक का सही समय पर इलाज करने से जान बच सकती है, जबकि हार्ट फेलियर को पूरी तरह ठीक करना मुश्किल होता है, बस इसे नियंत्रित किया जा सकता है। जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को हृदय की बीमारी रही हो, अगर आप मोटापा या ब्लड प्रेशर को शिकार रहे हों तो हृदय स्वास्थ्य को लेकर सतर्क हो जाना चाहिए।



-----------------------------
नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें