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World Health Day: सीजनल फ्लू का खतरा, अब ठीक होने में क्यों लगता है ज्यादा वक्त? डॉक्टर ने दिए जरूरी टिप्स

Tue, 07 Apr 2026 08:08 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मौसम बदलने के साथ इंफ्लूएंजा (फ्लू) के मामले बढ़ने लग जाते हैं। ये  हर साल लाखों लोगों को प्रभावित करता है। पहले जहां लोग सामान्य दवाओं से 3-4 दिनों में ठीक हो जाया करते थे वहीं अब न केवल लोगों को ठीक होने में ज्यादा वक्त लग रहा है।
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Cold And Cough - फोटो : Freepik.com
उत्तर भारत इन दिनों मौसम में तेजी से बदलाव का अनुभव कर रहा है। कभी बारिश, कभी गर्मी और शाम होते ही तापमान में हल्की सी कमी, पिछले कुछ समय से दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश में यही हाल बना हुआ है। शुक्रवार को राजधानी दिल्ली-नोए़डा में हल्की बारिश हुई, जबकि शनिवार को दोबारा तेज धूप और गर्मी का अनुभव किया गया। इस तरह से बदलता मौसम आपको बीमार करने वाला हो सकता है। 

मौसम बदलने के साथ इंफ्लूएंजा (फ्लू) के मामले बढ़ने लग जाते हैं। ये हर साल लाखों लोगों को प्रभावित करता है। फ्लू वायरस ठंडे और शुष्क वातावरण में ज्यादा समय तक सक्रिय रहता है और आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठनों की रिपोर्ट के अनुसार मौसमी फ्लू हर साल दुनियाभर में लाखों गंभीर मामलों का कारण बनता है। 

हाल के वर्षों में यह भी देखा गया है कि पहले की तुलना में अब मरीजों को ठीक होने में अधिक समय लग रहा है। पहले जहां लोग सामान्य दवाओं से 3-4 दिनों में ठीक हो जाया करते थे वहीं अब न केवल लोगों को ठीक होने में ज्यादा वक्त लग रहा है साथ ही सर्दी-जुकाम के साथ कई अन्य तरह की दिक्कतें भी बढ़ गई हैं। 
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फ्लू के मामलों को लेकर अलर्ट - फोटो : Freepik.com
इंफ्लूएंजा वायरस और इसका खतरा

जब मौसम ठंडा या शुष्क होता है, तो इंफ्लूएंजा वायरस हवा में अधिक समय तक जीवित रह सकता है। फ्लू वायरस खांसने, छींकने या संक्रमित सतह को छूने से फैलता है। अध्ययनों से पता चलता है कि तापमान और आर्द्रता में कमी वायरस के प्रसार को आसान बनाते हैं। यही कारण है कि सर्दियों या मौसम परिवर्तन के दौरान फ्लू के मामलों में उछाल देखा जाता है। 



पिछले एक-दो वर्षों में फ्लू वायरस की प्रकृति में व्यापक बदलाव भी देखने को मिला है, जिसने इसकी जटिलाएं काफी बढ़ा दी हैं।
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इंफ्लूएंजा वायरस के नए स्ट्रेन - फोटो : Freepik.com
फ्लू के नए वैरिएंट्स ने बढ़ाई थी चिंता

साल 2025 में अमेरिका और कनाडा सहित कई अन्य देशों में फ्लू के नए वैरिएंट के कारण फैली बीमारी ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टेंशन बढ़ा दी थी। वैज्ञानिकों ने पाया था कि वायरस में कई ऐसे परिवर्तन देखे गए हैं जो इसकी संक्रामकता दर को बढ़ाने वाले हो सकते हैं।
 
  • स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, हर साल इन्फ्लूएंजा वायरस के जो सबवेरिएंट सबसे ज्यादा फैलते हैं, उनमें थोड़ा बदलाव देखा जाता रहा है।
  •  सबसे ज्यादा फैलने वाला वेरिएंट सबक्लेड-के (Subclade-K) है, जो इन्फ्लूएंजा ए3एन2 का एक सबटाइप है।
  • सबक्लेड-के को पहली बार जुलाई 2025 में ऑस्ट्रेलिया में पाया गया था।
  • यह अमेरिका में 91.5% तक संक्रमण के लिए जिम्मेदार पाया गया था। कनाडा में भी मामलों में बढ़ोतरी के लिए यही जिम्मेदार था।

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वैक्सीनेशम से मिलती है सुरक्षा - फोटो : Adobe Stock
सालाना फ्लू वैक्सीन लगवाना जरूरी

मौसम में बदलाव के साथ फिर से फ्लू संक्रमण के बढ़ने का खतरा जताया जा रहा है। राजधानी दिल्ली स्थित एक निजी अस्पताल में एचओडी, इंटरनल मेडिसिन डॉ. विरेंद्र अग्रवाल कहते हैं, धीरे-धीरे मौसम बदल रहा है। ऐसे में फ्लू के मामले बढ़ सकते हैं।

इसमें सबसे उच्च जोखिम वाले समूह जैसे 65 वर्ष की आयु से अधिक के लोग, पांच वर्ष से कम आयु के बच्चे, गर्भवती महिलाएं (प्रसव के 2 सप्ताह बाद तक), अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), कैंसर रोगी एचआईवी के मरीज, मधुमेह, हृदय रोग और गुर्दे की बीमारी वाले लोगों को खास सावधानी  बरतते रहने की आवश्यकता है।
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सर्दी-जुकाम से बचाव कैसे करें? - फोटो : Freepik.com
पर्सनल हाइजीन का भी रखें ध्यान

फ्लू से अस्पताल में भर्ती होने वाले 90 प्रतिशत मरीजों में कम से कम एक अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या होती है। इसलिए इन समूहों के लिए वार्षिक टीकाकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है। बीमारियों से बचने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता बहुत जरूरी है। 
 
  • हाथों को 20 सेकंड तक साबुन से धोएं। 
  • अल्कोहल वाले हैंड सैनिटाइजर का प्रयोग करें। 
  • आंख, नाक, मुंह को गंदे हाथों से न छुएं। 
  • खांसते व छींकते समय टिश्यू या कोहनी का प्रयोग करें। 
  • भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें। 
  • बीमार व्यक्तियों से कम से कम छह फीट की दूरी बनाए रखें। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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