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World Food Safety Day: इस तरह की चीजें आपको बना सकती हैं बीमार, कहीं आप भी तो नहीं करते इनका अधिक सेवन?

Wed, 08 Jun 2022 12:36 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सही आहार का चयन करना जरूरी - फोटो : iStock
हम किस तरह के आहार का सेवन करते हैं, यह सीधे तौर पर हमारी सेहत को प्रभावित करता है। यही कारण है कि अध्ययनों में विशेषज्ञ सभी लोगों को स्वस्थ और पौष्टिक चीजों के सेवन की सलाह देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक भोजन हमेशा स्वस्थ-पौष्टिक और ताजा हो, इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए। विशेषकर गर्मियों के इस मौसम में भोजन से संबंधित बरती गई जरा सी भी लापरवाही फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकती है। स्वस्थ भोजन के सेवन को बढ़ावा देने और खाद्य जनित जोखिमों को रोकने के उद्देश्य से हर साल 7 जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। 

देश में खाद्य पदार्थों के लिए विज्ञान आधारित मानकों को निर्धारित करने और उनके निर्माण, भंडारण, वितरण आदि को सुनिश्चित करने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण विशेष निगरानी करता है। खाद्य सुरक्षा से संबंधित रिपोर्ट के अनुसार, 113 देशों के जीएफएस इंडेक्स 2021 में भारत 57.2 अंकों के के साथ 71वें स्थान पर रहा। यह इंडेक्स खाद्य सुरक्षा के विभिन्न मानकों को निर्धारित करती है।

अध्ययनों से पता चलता है कि हम में से ज्यादातर लोग अक्सर ऐसी चीजों का सेवन करते हैं, जो स्वाद के लिए तो अच्छे होते हैं, पर इनसे गंभीर बीमारियों के पनपने का जोखिम हो सकता है। इतना ही नहीं कुछ खाद्य पदार्थ तो कैंसर और पेट की गंभीर समस्याओं के खतरे को कई गुना तक बढ़ा देते हैं। इन बातों को ध्यान में रखते हुए सभी लोगों को हमेशा स्वस्थ और पौष्टिक चीजों के सेवन का ही चयन करना चाहिए।

आइए जानते हैं कि अध्ययनों में किस प्रकार के भोजन को सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक पाया गया है? सभी लोगों को इन चीजों का सेवन कम से कम मात्रा में करना चाहिए, परहेज करना ज्यादा अच्छा विकल्प हो सकता है।
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सफेज ब्रेड के सेवन के नुकसान - फोटो : Pixabay
व्हाइट ब्रेड से होने वाले नुकसान

हम में से ज्यादातर लोगों के दिन की शुरुआत नाश्ते में व्हाइट ब्रेड और इससे बनी हुई चीजों से होती है। हालांकि सेहत के लिहाज से इसे विशेषज्ञ हानिकारक मानते हैं। व्हाइट ब्रेड, रिफाइंड गेंहू से बनाई जाती है, जिसमें न सिर्फ पौष्टिकता की कमी होती है, साथ ही इसका अधिक सेवन रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ा देता है।

इसके अलावा शोध में पाया गया है कि रिफाइंड ब्रेड का अधिक सेवन करने वाले लोगों में पेट की चर्बी बढ़ने का भी खतरा अधिक होता है। ऐसे में व्हाइट ब्रेड की जगह अनाज युक्त ब्राउन ब्रेड का सेवन करना ज्यादा अच्छा माना जाता है।
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पैक्ड जूस से होने वाली दिक्कतें - फोटो : Pixabay
पैक्ड फ्रूट जूस

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए फलों और इसके जूस के सेवन की बार-बार सलाह दी जाती है, पर इसके लिए ताजा फलों के रस को ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। बाजार में मिलने वाले पैक्ड जूस सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। पैक्ड फ्रूट जूस में अधिक मात्रा में फ्रुक्टोज (एक प्रकार की चीनी) हो सकती है। फ्रुक्टोज की अधिकता इंसुलिन प्रतिरोध और लिवर डैमेज जैसी समस्याओं का कारक मानी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ पैक्ड फ्रूट जूस की जगह ताजे फलों के रस के सेवन की सलाह देते हैं। 

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अधिक मीठी चीजें नुकसानदायक - फोटो : Pixabay
मीठे खाद्य-पेय

अधिक मात्रा में मीठी चीजों के खाने-पीने की आदत आपकी सेहत को कई प्रकार से नुकसान पहुंचाती है। अधिकांश मीठे खाद्य में रिफाइंड शुगर, मैदा और अतिरिक्त फैट वाली चीजों की अधिकता होती है। ऐसी चीजों के अधिक सेवन से वजन बढ़ने और पेट की तमाम समस्याओं का खतरा भी अधिक हो सकता है। रिफाइंड खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन कोलेस्ट्रॉल के स्तर को प्रभावित कर सकता है जिसके कारण हृदय रोगों का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है। 
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जंक-फास्ट फूड्स सेहत के लिए नुकसानदायक - फोटो : iStock
जंक-फास्ट फूड्स के नुकसान

फ्रेंच फ्राइज़, बर्गर, चिप्स, पिज्जा जैसे जंक फूड्स लोगों के बीच काफी पसंदीदा हैं, पर विशेषज्ञ इनके अधिक सेवन को काफी हानिकारक मानते हैं। ऐसे खाद्य कैलोरी में अधिक होते हैं, जिससे वजन बढ़ने का खतरा बना रहता है। बच्चों में मोटापे के लिए इसे प्रमुख जोखिम कारक के रूप में जाना जाता है। फास्ट फूड या जंक फूड, मोटापा, हृदय रोग, पाचन की समस्या को बढ़ाने के साथ संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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