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विशेषज्ञ से जानिए: क्या वास्तव में कच्ची सब्जियां-फलों से कंट्रोल रहता है डायबिटीज? क्या हैं इस आहार के लाभ

Mon, 14 Nov 2022 03:14 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डायबिटीज में क्या खाना चाहिए? - फोटो : getty images
डायबिटीज को कंट्रोल करने और इसकी कई प्रकार की जटिलताओं से बचाव करने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को आहार और दिनचर्या को ठीक रखने की सलाह देते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि अगर बचपन से ही खान-पान को ठीक कर लिया जाए तो डायबिटीज के जोखिमों को 40 फीसदी तक कम किया जा सकता है। इतना ही नहीं, जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या है, वह भी आहार का ध्यान रखकर इसकी जटिलताओं से बचाव कर सकते हैं।

आज विश्व मधुमेह दिवस है, वैश्विक स्तर पर बढ़ते डायबिटीज के खतरे को लेकर लोगों को अलर्ट करने और इससे बचाव को लेकर आवश्यक सावधानियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 14 नवंबर को वर्ल्ड डायबिटीज डे मनाया जाता है।

अक्सर आपने भी सुना होगा कि कच्ची सब्जियों-फलों और सलाद के सेवन से ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल किया जा सकता है, क्या वास्तव में इसके लाभ हैं? कच्चे खाद्य पदार्थों का मतलब है बिना चीनी, नमक और मसालों के किसी चीज का सेवन करना, क्या डायबिटीज में इसके लाभ हो सकते हैं? आइए जानते हैं विशेषज्ञों का इस बारे में क्या मानना है?
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कच्ची सब्जियों के लाभ - फोटो : pixabay
कच्चे फलों के डायबिटीज में लाभ?

अमर उजाला से बातचीत में आहार विशेषज्ञ डॉ शिखा पांडे बताती हैं, डायबिटीज जैसी क्रोनिक बीमारियों के जोखिम से बचाव और इसकी जटिलताओं को कम करने के लिए वैश्विक स्तर पर रॉ फूड आइटम्स के सेवन की मांग काफी बढ़ी है। कच्चे आहार कई प्रकार के  पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, इनमें एंजाइम्स बरकरार होते हैं, जिससे शरीर के लिए ये विशेष लाभकारी हो सकते हैं।

कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के साथ इसके अन्य कारकों जैसे वजन बढ़ने की समस्या में भी ऐसे आहार लाभकारी हो सकते हैं। 
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प्लांट बेस्ड आहार से होने वाले लाभ - फोटो : iStock
कच्चे खाद्य पदार्थों के लाभ

आहार विशेषज्ञ बताते हैं, शोध में पाया गया है कि कुछ सब्जियों को अधिक तापमान पर पकाने के कारण उनमें मौजूद आवश्यक पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, ऐसे में अगर उनको अच्छे से साफ करके कच्चा खाया जाए तो अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। प्लांट बेस्ड आहार में शरीर के लिए जरूरी ज्यादातर पोषक तत्व होते हैं और इससे साइड-इफेक्ट्स का जोखिम भी कम होता है।

भोजन से पहले सलाद का सेवन करने की सलाह दी जाती है, यह न सिर्फ वजन को नियंत्रित रखने में सहायक है साथ ही इससे डायबिटीज को भी कंट्रोल में रखना आसान हो सकता है। कुछ प्रकार की सब्जियों और फलों को कच्चा खाना लाभकारी है, बस उनके ग्लाइसेमिक इंडेक्स का ध्यान जरूर रखा जाना चाहिए।

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डायबिटीज का प्रबंधन कैसे किया जाता है? - फोटो : iStock
डायबिटीज के प्रबंधन में मिल सकता है लाभ

अध्ययनों में पाया गया है कि कच्चे आहार से मधुमेह रोगियों को लाभ हो सकता है। ये पाचन को ठीक रखने में भी फायदेमंद है। ज्यादातर कच्चे खाद्य पदार्थ जैसे फल, सब्जियां, नट्स फाइबर से भरपूर होते हैं, जो  तृप्ति को बढ़ावा देते हैं और पाचन में फायदेमंद माने जाते हैं। ये खाद्य पदार्थ लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले होते हैं जो धीरे-धीरे पचते हैं और इस तरह से रक्त शर्करा के स्पाइक्स को रोकते हैं।

सलाद में विटामिन्स और शरीर के लिए आवश्यक मिनरल्स भी होते हैं जिसकी शरीर को नियमित रूप से आवश्यकता होती है।
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लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली चीजें - फोटो : istock
इन लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली चीजों का कर सकते हैं सेवन

मधुमेह के रोगियों को किसी भी फल-सब्जी के सेवन के पहले उसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स जरूर जांच लेना चाहिए। ग्लाइसेमिक इंडेक्स, वह मापक है जिससे पता लगाया जाता है कि भोजन में मौजूद कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज बनने में कितना समय लगता है, यानी कि भोजन हमारे ब्लड शुगर लेवल को कितनी जल्दी बढ़ाता है। हरी सब्जियां, कच्ची गाजर, खीरा, अंगूर, नाशपाती, सेब, संतरा, आलूबुखारा, पपीता और अंगूर जैसे फलों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, इनका सेवन ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ने नहीं देता है। 



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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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