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World Diabetes Day: 40 की आयु से पहले भी हो सकते हैं इस गंभीर बीमारी के शिकार, क्या हैं इसके कारण और लक्षण?

Mon, 14 Nov 2022 12:11 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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युवाओं में डायबिटीज की समस्या - फोटो : istock
दो दशक पहले तक डायबिटीज को बढ़ती उम्र के साथ होने वाली स्वास्थ्य समस्या के तौर पर जाना जाता था, हालांकि मौजूदा समय में इसका खतरा कम उम्र के लोगों में भी काफी तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। एक आंकड़े के मुताबिक यूके में 40 से कम उम्र के डायबिटीज रोगियों की संख्या 2016-17 में 1.20 लाख के करीब थी, जोकि 2020-21 में 23 फीसदी बढ़कर 1.48 से अधिक हो गई है। इसी तरह के आंकड़े भारत में भी देखे जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, मौजूदा समय में डायबिटीज के हर चार नए रोगियों में एक की आयु 40 साल से कम की है। कई प्रकार के जोखिम कारक युवाओं को इस गंभीर बीमारी का शिकार बनाते जा रहे हैं।

वैश्विक स्तर पर बढ़ते डायबिटीज के खतरे को लेकर लोगों को अलर्ट करने और इससे बचाव को लेकर आवश्यक सावधानियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 14 नवंबर को वर्ल्ड डायबिटीज डे मनाया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अस्वास्थ्यकर खाने-पीने की आदतों, मोटापा और गतिहीन जीवनशैली आदि के कारण युवाओं में यह खतरा बढ़ता जा रहा है। डायबिटीज कई प्रकार की जटिलताओं का कारण भी बन सकती है, ऐसे में इससे बचाव के उपाय करते रहना सभी के लिए आवश्यक है। 

कम उम्र में ही डायबिटीज की स्थिति, जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है, ऐसे में इसके जोखिम कारकों को लेकर अलर्ट रहना जरूरी है।
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30 की आयु से पहले डायबिटीज का खतरा - फोटो : istock
युवावस्था और डायबिटीज का खतरा

मधुमेह रोग विशेषज्ञ बताते हैं, पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि बच्चे, किशोर और 30 की उम्र के लोग तेजी से मधुमेह के शिकार हो रहे हैं, जबकि कुछ दशकों पहले तक इस आयुवर्ग के लोगों को सुरक्षित माना जा रहा था। सेंडेंटरी लाइफस्टाइल इसका एक प्रमुख कारण हो सकती है। कई बच्चों में भी यह समस्या देखी गई है। यहां गंभीर बात यह है कि आप जितनी कम उम्र में इस समस्या के शिकार होते हैं, समय के साथ आपमें गंभीर जटिलताओं के बढ़ने का खतरा उतना ही अधिक हो सकता है। इसी लिए आवश्यक हो गया है कि सभी लोग डायबिटीज से बचाव के उपाय करते रहें। 

आइए जानते हैं कि युवाओं को इस गंभीर रोग से सुरक्षित रहने के लिए किन बातों का ध्यान रखना सबसे आवश्यक है?
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मोटापे के कारण बढ़ जाता है मधुमेह का खतरा - फोटो : iStock
मोटापा के कारण डायबिटीज की समस्या

डॉक्टर्स कहते हैं, कम उम्र में डायबिटीज होने का मुख्य कारण मोटापा भी माना जा सकता है। अस्वास्थ्यकर खाने की आदतों, विशेषरूप से जंक फूड, अधिक कैलोरी, चीनी और फैट वाली चीजों का अधिक सेवन मोटापा और डायबिटीज दोनों के जोखिम को बढ़ा देता है। अधिक वजन वाले लोगों में मेटाबॉलिज्म की समस्याओं का खतरा भी अधिक देखा गया है, जिससे इंसुलिन का उत्पादन और इसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। डायबिटीज से बचाव के लिए वजन को नियंत्रित रखना सबसे आवश्यक माना जाता है।

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तनाव की बढ़ती समस्या - फोटो : istock
तनावपूर्ण स्थिति है नुकसानदायक

युवाओं में तनाव की समस्या काफी तेजी से बढ़ती हुई देखी गई है, विशेषकर महामारी के बाद इसके मामलों में भारी उछाल आया है। अध्ययनों में पाया गया है कि अधिक तनाव लेने वाले लोगों में समय के साथ डायबिटीज की समस्या होने का खतरा अधिक हो सकता है। तनाव सीधे तौर पर मधुमेह का कारण नहीं बनती है, लेकिन कुछ प्रमाण हैं कि तनाव और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिमों के बीच संबंध हो सकता है।

शोधकर्ता बताते हैं कि उच्च स्तर के तनाव की स्थिति में कई ऐसे हार्मोन्स का स्राव होता है जो अग्न्याशय में इंसुलिन-उत्पादक कोशिकाओं के कामकाज को प्रभावित कर देती हैं।
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सेंडेंटरी लाइफस्टाइल से मधुमेह का जोखिम - फोटो : istock
एक ही जगह पर बैठे रहने की आदत

डॉक्टर बताते हैं जो लोग लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठे रहते हैं, उनमें शारीरिक निष्क्रियता का जोखिम अधिक हो सकता है, यह स्थिति डायबिटीज का कारण बन सकती है। शरीर को सक्रिय रखकर इस खतरे को कम किया जा सकता है। दिनचर्या में योग-व्यायाम, रनिंग-वॉकिंग जैसी आदतों को शामिल करके शरीर को सक्रिय रखा जा सकता है जिससे डायबिटीज का जोखिम कम होता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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