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World Dengue Day: ये चीजें डेंगू को बना देती हैं खतरनाक, मानसून में बुखार के साथ इन लक्षणों को न लें हल्के में

Mon, 15 Jun 2026 02:11 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विश्व डेंगू दिवस 2026- यह समझना बेहद जरूरी है कि आखिर डेंगू को इतना खतरनाक क्यों मानते हैं विशेषज्ञ, कौन-सी परिस्थितियां मरीज की जान को खतरे में डाल सकती हैं?
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डेंगू के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI
देश में मानसून की शुरुआत होते ही मच्छरजनित रोगों का खतरा तेजी से बढ़ने लगता है। इन बीमारियों के चलते हर साल हजारों लोगों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है, बड़ी संख्या में इससे मौत के मामले भी देखे जाते रहे हैं। डेंगू ऐसी ही गंभीर बीमारी है। साल 2025 में भारत में आधिकारिक तौर पर डेंगू से 131 मौतें और 121,824 संक्रमण के मामले दर्ज किए गए। बेहतर निगरानी और इंटीग्रेटेड वेक्टर मैनेजमेंट की वजह से पिछले वर्षों की तुलना में इसमें काफी कमी आई। कई राज्यों ने मृत्यु दर को शून्य या कम बनाए रखने में सफलता हासिल की।

देश में मानसून की शुरुआत होने वाली है, ऐसे में विशेषज्ञ पहले से ही इस बीमारी को लेकर सभी लोगों को सावधान कर रहे हैं। मच्छरों से फैलने वाली इस बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 15 जून को दुनिया भर में 'विश्व डेंगू दिवस' मनाया जाता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डेंगू से बचाव के उपाय बहुत जरूरी हैं। इसके अलावा यह समझना भी आवश्यक है कि आखिर डेंगू को इतना खतरनाक क्यों माना जाता है? और कब ये बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है?
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डेंगू बुखार के मामले - फोटो : Adobe Stock
डेंगू हो सकता है खतरनाक

डॉक्टर कहते हैं, डेंगू के मामलों में सबसे खतरनाक चीज है इसकी दूर से पहचान। अक्सर लोग डेंगू को सिर्फ बुखार समझने की गलती कर बैठते हैं। शुरुआत में तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर दर्द और कमजोरी, त्वचा पर रैशेज और शौच में खून आने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

समय पर रोग का पता न चल पाने से प्लेटलेट्स तेजी से गिरने लगते हैं और शरीर के अंदर रक्तस्राव शुरू हो जाता है। इससे मरीज शॉक की स्थिति में पहुंच सकता है। यही कारण है कि डॉक्टर डेंगू को कभी भी हल्के में लेने की सलाह नहीं देते।

आइए समझते हैं कि किन सी चीजें इस बीमारी को खतरनाक बना देती हैं?
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डेंगू के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe stock
प्लेटलेट्स डाउन होना खतरनाक

डेंगू की बीमारी में लो प्लेटलेट्स की आपने भी काफी चर्चा सुनी होगी। 
 
  • प्लेटलेट्स खून को जमाने में मदद करती है। सामान्य तौर पर इनकी संख्या 1.5 लाख से 4.5 लाख प्रति माइक्रोलिटर होती है। 
  • डेंगू वायरस, बोन मैरो को प्रभावित कर प्लेटलेट्स के उत्पादन को कम कर देता है।
  • जब प्लेटलेट्स बहुत कम हो जाती है तो शरीर में रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है। 
  • यही वजह है कि मरीजों के नाक, मसूड़ों या शौच में खून आने लगता है।

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डेंगू बुखार के खतरे - फोटो : Adobe Stock
डेंगू हेमोरेजिक फीवर और शॉक सिंड्रोम

डेंगू का गंभीर रूप डेंगू हेमोरेजिक फीवर कहलाता है। इस स्थिति में रक्त वाहिकाओं की दीवारें कमजोर हो जाती हैं और शरीर में खून तथा प्लाज्मा का रिसाव शुरू हो सकता है।
 
  • इस वजह से मरीज के शरीर में गंभीर रक्तस्राव, पेट दर्द, उल्टी और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
  • जब शरीर से प्लाज्मा का अत्यधिक रिसाव होने लगता है तो ब्लड प्रेशर अचानक गिर सकता है। इस स्थिति को डेंगू शॉक सिंड्रोम कहा जाता है।
  • इसमें मरीज के हाथ-पैर ठंडे पड़ सकते हैं, बेचैनी बढ़ सकती है और बेहोशी हो जाती है। यह मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है।
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डेंगू का खतरा - फोटो : Freepik.com
इन खतरों को भी जानिए
 
  • दूसरी बार होने वाला डेंगू कई मामलों में अधिक गंभीर हो सकता है। जिन लोगों को पहले डेंगू हो चुका है, उन्हें भी सावधानी बरतनी चाहिए।
  • डायबिटीज, हृदय रोग, किडनी रोग और लिवर की समस्याओं से पीड़ित लोगों में डेंगू का जोखिम अधिक गंभीर हो सकता है।
  • बच्चों और बुजुर्गों की इम्युनिटी कमजोर होती है। इनमें डेंगू अधिक गंभीर रूप ले सकता है।
  • डेंगू के दौरान तेज बुखार, उल्टी और भूख कम लगने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। डिहाइड्रेशन के कारण समस्या और बढ़ जाती है।
  • डेंगू का देर से पता चलना दिक्कतें बढ़ा सकता है, देर से पता चलने पर जटिलताओं को कंट्रोल करना कठिन हो सकता है।


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स्रोत:
Dengue


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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