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World Cancer Day 2026: भारत में क्यों बढ़ते जा रहे हैं कैंसर के मामले, जान लें क्या है इसके पीछे का मुख्य कारण

Wed, 04 Feb 2026 10:26 AM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Rising Cancer Cases In India Reasons: हम सभी जानते हैं कि कैंसर कितनी गंभीर बीमारी है, और ध्यान न देने पर ये बीमारी जानलेवा भी हो सकती है। मगर बहुत से लोगों के मन में ये सवाल रहता है कि आखिर इस बीमारी के पीछे का मूल कारण क्या है? आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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कैंसर का इलाज - फोटो : Freepik.com
हर साल 4 फरवरी को दुनिया भर में 'विश्व कैंसर दिवस' मनाया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य इस जानलेवा बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाना और इसके बचाव के लिए ठोस कदम उठाना है। आज के समय में कैंसर एक ऐसी गंभीर और जानलेवा बीमारी है जिसका नाम सुनते ही लोग डर जाते हैं। मगर ध्यान देने वाली बात यह है कि लोग जाने-अनजाने में कई ऐसी गलतियां करते हैं जो आपके शरीर में कैंसर के जोखिम बढ़ाते हैं।

भारत के संदर्भ में यह दिन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि हालिया आंकड़ों के अनुसार देश में कैंसर के मामलों में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। अनुमान है कि 2026 तक भारत में कैंसर के नए मामलों की संख्या 15 लाख के पार पहुंच सकती है। अब इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे उम्र का बढ़ना, खराब खानपान होना, मगर एक बड़ा कारण हमारी आधुनिक जीवनशैली और पर्यावरण में मौजूद घातक तत्व भी हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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तंबाकू, धूम्रपान - फोटो : Freepik.com
तंबाकू और शराब
भारत में कैंसर के बढ़ते मामलों का सबसे प्रमुख कारण तंबाकू का अत्यधिक सेवन है। पुरुषों में होने वाले लगभग 50% और महिलाओं में 20% कैंसर सीधे तौर पर तंबाकू (धूम्रपान और चबाने वाले तंबाकू) से जुड़े होते हैं। इसके साथ ही शराब का सेवन लिवर, गले और ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। तंबाकू और शराब का संयुक्त सेवन शरीर की कोशिकाओं को बहुत तेजी से क्षतिग्रस्त करता है, जिससे कैंसर की शुरुआत होती है।
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सेडेंटरी लाइफस्टाइल - फोटो : Adobe Stock
खराब खान-पान और गतिहीन जीवनशैली
शहरीकरण के कारण भारतीयों की डाइट में प्रोसेस्ड फूड, अधिक चीनी और हानिकारक फैट्स की मात्रा बढ़ गई है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करने और व्यायाम की कमी से होने वाला मोटापा कैंसर का बड़ा कारण है। शरीर में बढ़ा हुआ फैट हार्मोन्स के असंतुलन और आंतरिक सूजन को जन्म देता है, जो धीरे-धीरे स्वस्थ कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाओं में बदल सकता है।

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वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock
पर्यावरण प्रदूषण और मिलावटी भोजन का प्रहार
वायु प्रदूषण में मौजूद PM 2.5 जैसे कण अब फेफड़ों के कैंसर के लिए धूम्रपान जितने ही जिम्मेदार माने जाते हैं। इसके अलावा, भोजन में कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग और रासायनिक रंगों की मिलावट सीधे हमारे डीएनए को नुकसान पहुंचा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में साफ पानी की कमी और कीटनाशकों के असुरक्षित उपयोग के कारण पेट और किडनी के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
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कैंसर का खतरा - फोटो : Freepik.com
सामान्य लोग क्या करें?
कैंसर का बढ़ता आंकड़ा डराने वाला है, लेकिन राहत की बात यह है कि कुछ कैंसर के मामलों को हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाकर टाला जा सकता है। बीमारी के लक्षणों का इंतजार न करें, सेहतमंद दिखने पर भी समय-समय पर बॉडी चेकअप करवाते रहें ताकि किसी भी खतरे का पहले ही पता चल सके। कैंसर की पहले या दूसरे स्टेज में पहचान होने पर इलाज की सफलता दर बहुत अधिक होती है। सही जानकारी संतुलित आहार और तंबाकू से दूरी ही आपको और आपके परिवार को इस घातक बीमारी से सुरक्षित रख सकती है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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