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World Cancer Day 2026: समय रहते करा लिए कैंसर के ये पांच टेस्ट तो बच सकती है जान, टल सकती है बड़ी अनहोनी

Wed, 04 Feb 2026 03:58 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Cancer Ke Liye Kaun Se Test Karvayen: स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कैंसर का समय रहते पता चल जाए तो बड़े खतरे को टाला जा सकता है।आम तौर पर लोग जिन टेस्ट को टालते रहते हैं, वे असल में आपकी जान बचा सकते हैं। 
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कैंसर की जांच के लिए कौन से टेस्ट कराएं? - फोटो : Adobe Stock Photo
कैंसर दुनियाभर के लिए मौजूदा समय में गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बना हुआ है। ये बीमारी न केवल मरीज के शरीर को प्रभावित करती है, बल्कि उसके परिवार, समाज और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गहरा असर डालती है। इतना ही नहीं कैंसर को वैश्विक स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में से भी एक माना जाता है, हर साल ये बीमारी लाखों लोगों की जान ले रही है। अकेले साल 2022 में इस बीमारी के कारण 97 लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई।

वैश्विक स्तर पर कैंसर के बढ़ते मामलों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसकी रोकथाम, पहचान और इलाज को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर साल 4 फरवरी को वर्ल्ड कैंसर डे मनाया जाता है। विश्व कैंसर दिवस 2026 की थीम है- यूनाइटेड बाइ यूनिक (united by unique)। इसका मतलब है कि हर व्यक्ति की कैंसर यात्रा अलग होती है, फिर भी हम सभी एक ही लक्ष्य में एकजुट हैं। कैंसर से प्रभावित सभी लोगों के लिए बेहतर देखभाल, सहायता कराना लक्ष्य है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कैंसर इसलिए ज्यादा खतरनाक हो जाता है क्योंकि समय रहते इसकी पहचान नहीं हो पाती है। अगर नियमित रूप से कुछ जरूरी टेस्ट कराए जाएं तो ये बीमारी आसानी से पकड़ में आ सकती है और इलाज के माध्यम से लोगों की जान बचाई जा सकती है।
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दुनियाभर में कैंसर का बढ़ता खतरा - फोटो : Adobe Stock
स्क्रीनिंग बढ़ाकर कम कर सकते हैं कैंसर का खतरा
 
भारतीय आबादी में भी कैंसर के मामलों में भी तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। 2024 में, भारत में 15 लाख से ज्यादा कैंसर के नए मामले सामने आए। 2019 में 13.5 लाख से बढ़कर 2024 में इसके नए मरीजों की संख्या 15.3 लाख हो गई।  इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि कैंसर हमारे लिए कितनी बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कैंसर की स्क्रीनिंग बढ़ाकर इस रोग के कारण होने वाली मौतों को कम किया जा सकता है। आम तौर पर लोग जिन टेस्ट को टालते रहते हैं, वे असल में आपकी जान बचा सकते हैं।

आइए जान लेते हैं कि कैंसर को रोकथाम के लिए सभी लोगों को कौन-कोन से टेस्ट जरूर कराते रहने चाहिए। 
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समय पर कराएं कैंसर की जांच - फोटो : Adobe Stock Photo
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

अमर उजाला से एक बातचीत में वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ हिमांशु पवार बताते हैं, देश में कैंसर से होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण ये है कि ज्यादातर मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब बीमारी काफी एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी होती है और कैंसर काफी फैल चुका होता है। यहां से इलाज के सफल होने और मरीज के जान बचने की संभावना काफी कम हो जाती है।

अगर नियमित रूप से कुछ जांच की आदत बना ली जाए तो कैंसर की समय पर पहचान हो सकेगी, शरीर में बढ़ने से इसे रोका जा सकेगा साथ ही रोगी की जान बचने की संभावना भी काफी बढ़ जाएगी। जिन लोगों में कैंसर का जोखिम है जैसे अगर परिवार में पहले किसी को कैंसर रहा है, आप धूम्रपान-शराब का सेवन अधिक करते हैं, रसायनों के संपर्क में रहते हैं तो डॉक्टर की सलाह पर कुछ जांच नियमित रूप से कराते रहें। सुरक्षात्मक रूप से भी सभी लोगों को कुछ टेस्ट जरूर कराते रहने चाहिए।


(क्या मोबाइल, Wi-Fi और 5G से कैंसर होता है? सच जानना है तो पढ़ें ये रिपोर्ट)

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कैंसर का पता कैसे लगाएं? - फोटो : Freepik.com
  • महिलाओं में स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए मैमोग्राफी टेस्ट जरूरी है। यह एक विशेष प्रकार का एक्स-रे टेस्ट होता है, जिससे स्तन कोशिकाओं में गांठ या असामान्य बदलावों का पता लगाया जा सकता है। 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को नियमित अंतराल पर मैमोग्राफी कराने की सलाह दी जाती है। यदि परिवार में स्तन कैंसर के पहले से मरीज रहे हैं तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें। 
 
  • महिलाओं के लिए पैप स्मीयर टेस्ट भी बहुत जरूरी है, इससे सर्वाइकल कैंसर का पता लगाने में मदद मिलती है। गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में होने वाले असामान्य बदलावों को इससे पहचानना आसान होता है। 21 से 65 वर्ष की महिलाओं को नियमित रूप से यह टेस्ट कराना चाहिए। समय पर पहचान होने पर सर्वाइकल कैंसर लगभग पूरी तरह से रोका जा सकता है।
 
  • पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर की पहचान के लिए प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन (पीएसए) टेस्ट जरूरी है। यह एक ब्लड टेस्ट होता है, जिसमें खून में पीएसए नामक प्रोटीन के स्तर को मापा जाता है। आमतौर पर इस कैंसर के शुरुआती चरणों में अक्सर कोई लक्षण नहीं होते, लेकिन पीएसए लेवल बढ़ना खतरे का संकेत हो सकता है। 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों या जिनके परिवार में प्रोस्टेट कैंसर का इतिहास हो, उन्हें यह टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। 
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कैंसर की जांच - फोटो : Adobe stock photos
 
  • कोलन यानी बड़ी आंत के कैंसर की जांच के लिए कोलोनोस्कोपी टेस्ट जरूरी है। इस टेस्ट में एक पतली कैमरा युक्त ट्यूब के जरिए आंत के अंदर की जांच की जाती है। 45 वर्ष के बाद या जिन लोगों में लंबे समय से कब्ज, खून की समस्या या कैंसर की फैमिली हिस्ट्री हो, उन्हें यह जांच करानी चाहिए। इसके लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
 
  •  कैंसर की पुष्टि का सबसे पुख्ता तरीका है बायोप्सी टेस्ट। इसमें संदिग्ध गांठ या टिश्यू का छोटा सा हिस्सा निकालकर लैब में जांच की जाती है। बायोप्सी से  यह तय किया जा सकता है कि ट्यूमर कैंसर वाला है या नहीं। इससे यह भी पता चलता है कि कैंसर का प्रकार क्या है और वह कितनी तेजी से बढ़ रहा है। कैंसर की जांच या इलाज के दौरान डॉक्टर इस टेस्ट की सलाह देते हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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