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World Cancer Day 2026: क्या मोबाइल, Wi-Fi और 5G से कैंसर होता है? सच जानना है तो पढ़ें ये रिपोर्ट

Wed, 04 Feb 2026 03:58 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Mobile Ke Istemal Se Cancer Hota Hai: साल 2022 में अनुमानित 2 करोड़ कैंसर के नए मामले सामने आए और दुनिया भर में इस बीमारी से 97 लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई। आखिर क्यों बढ़ती जा रही है ये जानलेवा बीमारी? कहीं ज्यादा मोबाइल, वाई-फाई या 5g जैसे सुविधाएं तो इसका कारण नहीं हैं?
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मोबाइल का इस्तेमाल बढ़ा रहा कैंसर का खतरा? - फोटो : Amarujala.com
अगर मौजूदा समय में सबसे बड़ी स्वास्थ्य चिंताओं की बात की जाए तो कैंसर के बढ़ते मामले उनमें से एक हैं। पिछले एक-दो दशकों में ये बीमारी लोगों में काफी आम हो गई है। महिला-पुरुष, युवा-बुजुर्ग यहां तक कि 10 साल से कम उम्र के बच्चों में भी कैंसर के मामले देखे जा रहे हैं। जिस गति से ये बीमारी लोगों को अपनी चपेट में ले रही है इसको लेकर दुनियाभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ काफी चिंतित है।

साल 2022 में दुनियाभर में अनुमानित 2 करोड़ कैंसर के नए मामले सामने आए और 97 लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई। विशेषज्ञों का अनुमान है कि साल 2050 तक कैंसर के मामलों की संख्या 35 मिलियन (3.5 करोड़) से ज्यादा तक पहुंच सकती है। वैश्विक स्तर पर कैंसर के बढ़ते मामलों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसकी रोकथाम, पहचान और इलाज को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर साल 4 फरवरी को वर्ल्ड कैंसर डे मनाया जाता है।

सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर कैंसर का खतरा इतनी तेजी से क्यों बढ़ गया है, कहीं मोबाइल का बढ़ता इस्तेमाल, वाई-फाई और 5G जैसी सुविधाएं तो इसका कारण नहीं हैं?
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कैंसर के बढ़ते मामले - फोटो : Freepik.com
कैंसर के बढ़ते मामले चिंताजनक

कैंसर के जोखिमों को लेकर दुनियाभर के विशेषज्ञ मुख्यरूप से शहरीकरण, बदलती जीवनशैली, खानपान में मिलावट, पर्यावरण प्रदूषण और शराब-धूम्रपान जैसी आदतों को जिम्मेदार मानते हैं। तंबाकू-शराब पीना, फास्ट फूड, ज्यादा तला-भुना और प्रोसेस्ड भोजन भी शरीर में कैंसरकारी तत्वों को बढ़ाता है।

हालांकि पिछले एक दशक में जिस गति से वाई-फाई और 5G जैसी सुविधाएं बढ़ी हैं इसने भी लोगों के मन में कैंसर को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों की आम धारणा है कि इनसे निकलने वाले रेडिएशन कैंसर का कारण हो सकते हैं।

हालांकि कैंसर होने के कारणों को लेकर किए गए अध्ययनों में वैज्ञानिक इन तथ्यों को सिरे से खारिज करते हैं।
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मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल नुकसानदायक - फोटो : Freepik
मोबाइल के इस्तेमाल से कैंसर का खतरा?

हम अक्सर अपने फोन को कान से लगाकर रखते हैं या उन्हें जेब में रखते हैं। कुछ लोगों को चिंता है कि मोबाइल फोन से निकलने वाला रेडिएशन कैंसर, खासकर ब्रेन कैंसर का कारण बन सकता है या फिर सीने के आसपास मोबाइल होने से ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है।

कैंसर रिसर्च यूके की रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया कि मोबाइल फोन और वाई-फाई से कैंसर नहीं होता है। वे जिस तरह का रेडिएशन का इस्तेमाल करते हैं, उनसे डीएनए को नुकसान पहुंचने का जोखिम न के बराबर होता है।

मोबाइल फोन और फोन टावर के रेडिएशन में डीएनए को नुकसान पहुंचाकर कैंसर पैदा करने के लिए एनर्जी नहीं होती है।

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वाई-फाई कितना नुकसानदायक? - फोटो : Freepik.com
वाई-फाई या ब्लूटूथ से भी नहीं होता है कैंसर 

विशेषज्ञ कहते हैं, मोबाइल एक तरह के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन का इस्तेमाल करते हैं जिसे रेडियोफ्रीक्वेंसी रेडिएशन (रेडियो तरंगें) कहते हैं। यह एक कमजोर तरह का रेडिएशन है, उसी तरह का जैसा रेडियो, टेलीविजन और माइक्रोवेव ओवन से निकलता है। 
 
  • ये रेडियो तरंगें डीएनए को नुकसान पहुंचाने भर की शक्तिशाली नहीं होती हैं। इसलिए, इस बात का कोई सही कारण नहीं है कि रेडियो तरंगें कैंसर पैदा कर सकती हैं।
  • इसी तरह से वाई-फाई या ब्लूटूथ के इस्तेमाल से भी कैंसर नहीं होता। वायरलेस टेक्नोलॉजी और सर्विस भी रेडियो तरंगों का इस्तेमाल करती हैं।

साल 2011 में, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने कहा था कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड इंसानों के लिए कैंसर का कारण बन सकते हैं। हालांकि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड और कैंसर से जुड़े अध्ययनों में कई विरोधाभास है।
 
  • उदाहरण के लिए, 2017 की एक रिसर्च रिव्यू के अनुसार, वायरलेस डिवाइस से निकलने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड ग्लियोमा का खतरा बढ़ा सकते हैं, जो एक तरह का ब्रेन ट्यूमर है।
  • हालांकि 2018 की एक स्टडी में कहा गया है कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड और ब्रेन ट्यूमर के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है।
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5G नेटवर्क से कैंसर का खतरा? - फोटो : Freepik.com
5G से खतरा है या नहीं?

साल 1996 में, डब्ल्यूएचओ ने इंटरनेशनल इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड प्रोजेक्ट किया। ये प्रोजेक्ट इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड के कारण होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों पर काम कर रहा है।

डब्ल्यूएचओ, कैंसर रिसर्च यूके और इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) जैसे हेल्थ अथॉरिटी के अध्ययनों में बताया गया है कि 5G से भी कैंसर नहीं होता है। 5G नॉन-आयोनाइजिंग रेडियो तरंगों का इस्तेमाल करता है, जिनमें डीएन को सीधे नुकसान पहुंचाने की एनर्जी नहीं होती है।

5G, 4G, या मोबाइल फोन के इस्तेमाल को कैंसर से जोड़ने वाला कोई भरोसेमंद सबूत नहीं है। वैसे तो 5G पिछली जेनरेशन की तुलना में ज्यादा फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल जरूर करता है, लेकिन एनर्जी लेवल बहुत कम हैं और सेफ्टी लिमिट से नीचे होते हैं।



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स्रोत:
Do mobile phones or Wi-Fi cause cancer?


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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