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Cancer Risk: कहीं आपको भी तो नहीं है कैंसर? 'CAUTIONUS' फॉर्मूला से कर सकते हैं पता

Fri, 07 Feb 2025 01:24 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में साल 2022 में 14.6 लाख से अधिक लोगों में कैंसर का निदान किया गया। जिस तरह से साल-दर-साल ये बीमारी बढ़ती जा रही है, सभी लोगों को इसके खतरे को समझते हुए कम उम्र से ही बचाव के उपाय शुरू कर देने चाहिए। क्या है  'CAUTIONUS' फार्मूला जिसकी मदद से कैंसर की पहचान आसान हो सकती है?
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कैंसर का खतरा - फोटो : Freepik.com
दुनियाभर में  कैंसर स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है, जो हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण बन रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कैंसर किसी को भी हो सकता है, चाहे आप वयस्क हों या बुजुर्ग, इतना ही नहीं बच्चे भी इस घातक रोग से अछूते नहीं हैं। अध्ययनों के आधार पर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जिस गति से भारत में कैंसर के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है, ऐसे में आने वाले वर्षों में इसका दबाव और अधिक हो सकता है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि भारत में साल 2022 में 14.6 लाख से अधिक लोगों में कैंसर का निदान किया गया। अध्ययनकर्ताओं को आशंका है कि इस साल (2025) इस आंकड़े में 12% से 18% की वृद्धि हो सकती है। ये बीमारी हृदय रोगों के बाद दुनियाभर में मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण भी है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस तरह से साल-दर-साल ये बीमारी बढ़ती जा रही है, सभी लोगों को इसके खतरे को समझते हुए कम उम्र से ही बचाव के उपाय शुरू कर देने चाहिए। दिनचर्या में कुछ प्रकार के बदलाव आपको कैंसर से बचाए रखने में मददगार हो सकते हैं।
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कैंसर के संकेतों के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com
कैंसर के लक्षणों पर ध्यान देना बहुत जरूरी

दुनियाभर में कैंसर के बढ़ते जोखिमों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसकी रोकथाम, पहचान और उपचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हर साल 4 फरवरी विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। 

कैंसर रोग विशेषज्ञ कहते हैं, इस गंभीर रोग से बचाव और इसके कारण होने वाली मृत्युदर को कम करने के लिए लोगों का जागरूक होना सबसे जरूरी है। भारत में कैंसर के बढ़ते मामले और मृत्यु के लिए सबसे बड़ा कारण इसका समय पर पता न चल पाना है। अगर समय रहते कैंसर के लक्षण और संकेतों पर ध्यान दे दिया जाए और इसका इलाज शुरू हो जाए तो न सिर्फ इलाज आसान हो जाता है साथ ही रोगी के जान बचने की संभावना भी बढ़ जाती है।
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कैंसर और इसका जोखिम - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

पुणे स्थित एक अस्पताल में ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ रुचिर एम. शाह कहते हैं, शरीर में अगर आपको असामान्य रूप से कोई गांठ या घाव दिख रहा हो तो सावधान हो जाएं। ये कैंसर का संभावित संकेत हो सकता है। इसके अलावा  'CAUTIONUS' फार्मूला की मदद से भी आप कैंसर का पता लगा सकते हैं।

जिन लोगों के परिवार में कैंसर की हिस्ट्री रही है, रसायनों के अधिक संपर्क में रहते हैं या फिर धूम्रपान-शराब की आदत रही है उन्हें अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है। आइए  'CAUTIONUS' फार्मूला के बारे में जानते हैं जिसकी मदद से कैंसर की पहचान आसान हो सकती है।

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कैंसर के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
क्या है  'CAUTIONUS' फार्मूला?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, 'CAUTIONUS' की मदद से कैंसर के लक्षणों की समय रहते पहचान में मदद मिल सकती है।

C- Change (शौच या पेशाब में असामान्य बदलाव)
A- A Sore (घाव ठीक होने में सामान्य से अधिक समय लगना)
U- Unusual (शरीर के किसी भी हिस्से से असामान्य रक्तस्राव होना)
T-Thickening (स्तन या शरीर के किसी हिस्से में गांठ होना)
I- Indigestion (अपच या निगलने में कठिनाई)
O- Obvious change (शरीर में मस्से या किसी प्रकार का धब्बे का बढ़ते जाना)
N-Nagging cough (खांसी या आवाज बैठना, आवाज में बदलाव)
U- Unexplained Anaemia (एनीमिया की समस्या जो ठीक न हो रही हो)
S-Sudden weight loss (अचानक से वजन कम होना)
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धूम्रपान से कैंसर का जोखिम - फोटो : Freepik.com
धूम्रपान करते हैं तो हो जाइए सावधान

कैंसर रोग विशेषज्ञ बताते हैं, तम्बाकू को सेवन (धूम्रपान या गुटखा) कैंसर के लिए सबसे प्रमुख कारण बना हुआ है, जो भारत में लगभग 40 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार है। अगर सिर्फ तंबाकू उत्पादों से ही दूरी बना ली जाए तो करीब 10 प्रकार के  कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

कम उम्र से ही खान-पान में सुधार, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह पर नियमित अंतराल पर हेल्थ टेस्ट की मदद से आप भविष्य में कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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