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Alert: कहीं पानी के साथ आप भी तो नहीं पी रहे हैं प्लास्टिक? शोधकर्ता बोले- बढ़ सकता है कैंसर का खतरा

Mon, 29 Jan 2024 08:46 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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water bottle - फोटो : pixabay
माइक्रोप्लास्टिक उन हानिकारक सूक्ष्म तत्वों में से एक हैं, जिनसे हमारे शरीर को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है। शोधकर्ता बताते हैं, कई अध्ययनों में पाया गया है कि हमारे शरीर में समय के साथ माइक्रोप्लास्टिक्स की मात्रा बढ़ने का खतरा है। दैनिक जीवन में इस्तेमाल की जाने वाली कई चीजों के कारण इसका जोखिम देखा जा रहा है। प्लास्टिक की बोतल को इसके लिए प्रमुख कारक पाया गया है।

अगर आप भी प्लास्टिक की बोतल में पानी पीते हैं तो सावधान हो जाइए, ये हमारे शरीर में कई गंभीर और क्रोनिक बीमारियों को बढ़ा सकती है, इतना ही नहीं इससे कैंसर जैसे जानलेवा रोगों का भी खतरा हो सकता है।

शोध से पता चलता है कि प्लास्टिक की बोतल में प्रत्येक लीटर पानी में प्लास्टिक के 100,000 से अधिक सूक्ष्म टुकड़े हो सकते हैं। अध्ययन से पता चलता है कि केवल एक बोतल पानी पीने से हम 10 गुना अधिक मात्रा में प्लास्टिक को शरीर में प्रवेश की अनुमति दे रहे होते हैं। प्लास्टिक के छोटे-छोटे टुकड़े जो बोतलों की परतों से निकालते हैं उन्हें माइक्रोप्लास्टिक्स और नैनोप्लास्टिक्स कहा जाता है। ये समय के साथ शरीर में कई बीमारियों का कारक हो सकते हैं।
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कैंसर कारक हो सकता है प्लास्टिक की बोतल का पानी - फोटो : istock
माइक्रोप्लास्टिक का पता लगाने वाली तकनीक

कोलंबिया यूनिवर्सिटी की टीम ने एक नई इमेजिंग तकनीक विकसित की है जिससे नैनोप्लास्टिक्स का बेहतर तरीके से विश्लेषण करने में मदद मिल सकती है। शोध पेपर को जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित किया गया है।

विश्वविद्यालय में  पर्यावरण रसायन के विशेषज्ञ और शोधकर्ता बेजान यान कहते हैं, नई तकनीक से हम बेहतर तरीके से पता लगा सकते हैं कि किसी चीज में माइक्रोप्लास्टिक की कितनी मात्रा हो सकती है। इंसानों के लिए माइक्रोप्लास्टिक को पहले के अध्ययनों में भी 'जहर' बताया गया है।
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माइक्रोप्लास्टिक का खतरा - फोटो : istock
बोतल के पानी में हो सकते हैं नैनोप्लास्टिक कण

माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक कणों का पता लगाने के लिए इस नई लेजर-आधारित तकनीक का उपयोग यू.एस. में बेचे जाने वाले बोतलबंद पानी के विश्लेषण के लिए किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि बोतलों के प्रत्येक लीटर पानी में 110,000 से 370,000 प्लास्टिक के टुकड़े हो सकते हैं, जिनमें से लगभग 90% नैनोप्लास्टिक्स और बाकी बड़े माइक्रोप्लास्टिक्स थे।

ये मात्रा इतनी अधिक है कि अगर लगातार इस तरह के पानी का सेवन किया जाता रहे तो कोशिकाओं को गंभीर क्षति होने और कैंसर जैसे रोगों का खतरा तक हो सकता है।

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प्लास्टिक की बोतल से पानी पीने से बचें - फोटो : Pixabay
शोधकर्ताओं ने किया अलर्ट

कोलंबिया यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए इस शोध के अनुसार, नैनोप्लास्टिक की संख्या प्रति लीटर लाखों में हो सकती है। समय के साथ प्लास्टिक पानी में रिसता रहता है। ये इतने सूक्ष्म कण होते हैं कि हमें नजर नहीं आते हैं, पर असल में धीरे-धीरे शरीर में इनका संचय होता जाता है। अनुसंधान दल आगे के अध्ययनों में नल के पानी का विश्लेषण करने की योजना बना रही है।

अध्ययनकर्ता कहते हैं, कई प्रकार के कैंसर और तंत्रिकाओं से संबंधित विकारों में नैनोप्लास्टिक के शरीर में प्रवेश को प्रमुख कारण माना गया है। प्लास्टिक की बोतल से पानी पीना इसका एक जोखिम कारक है।
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कैंसर को खतरा - फोटो : Pixabay
प्लास्टिक कणों से कैंसर तक का खतरा

माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक शरीर को कई प्रकार से क्षति पहुंचा सकते हैं। मुख्यरूप से इसके कारण माइक्रोबायोटा में परिवर्तन, आंतों की समस्या, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ने, शरीर में सूजन की समस्या, न्यूरोटॉक्सिसिटी और व्यवहार संबंधी गड़बड़ी हो सकती है।

शोधकर्ताओं ने कहा पर्यावरणीय सूक्ष्म और नैनो-प्लास्टिक के निरंतर संपर्क से मनुष्यों पर पड़ने वाले संभावित स्वास्थ्य प्रभावों के बारे में चिंता बढ़ रही है। ये विभिन्न अंगों और ऊतकों में जमा हो सकते हैं और दीर्घकालिक रूप में कैंसर के विकास को बढ़ावा दे सकते हैं।


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स्रोत और संदर्भ
Rapid single-particle chemical imaging of nanoplastics by SRS microscopy


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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