कहीं आपके बच्चे को भी तो नहीं है ऑटिज्म की दिक्कत
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किन बच्चों को ज्यादा खतरा?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कुछ बच्चों में ऑटिज्म होने का खतरा अधिक रहता है। समय से पहले जन्मे (प्री-मैच्योर) बच्चे, जन्म के समय कम वजन वाले शिशुओं या जिनके परिवार में पहले से किसी को ऑटिज्म रहा है ऐसे बच्चों में ऑटिज्म होने का जोखिम ज्यादा रहता है।
अध्ययन की रिपोर्ट में पाया गया है कि जिन बच्चों की नींद पूरी नहीं होती है, उनमें ऑटिज्म होने का खतरा अधिक रहता है।
- ऑस्ट्रेलिया में 1000 से अधिक मां और शिशुओं पर किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि जो बच्चे कम सोते हैं या जिनकी नींद की गुणवत्ता खराब होती है, उनमें ऑटिज्म विकसित होने का जोखिम अधिक हो सकता है।
- शिशुओं में नींद की समस्या न्यूरोडेवलपमेंटल विकारों का कारण बन सकती है जिसके कारण उनके सामाजिक कौशल में कमी आ सकती है।
बच्चे को ऑटिज्म हो जाए तो इसे कैसे ठीक किया जाता है?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ऑटिज्म को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन शुरुआती पहचान और थेरेपी से बच्चे की सामाजिक और शैक्षणिक क्षमता में बड़ा सुधार हो सकता है। बच्चों में इस समस्या के खतरे को कम करने के लिए गर्भावस्था में नियमित जांच, संतुलित आहार, संक्रमण से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जरूरी है।
2-3 साल की उम्र में बच्चे के व्यवहार में असामान्यता दिखे तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें, क्योंकि जितनी इसका इलाज होगा बच्चे के जीवन की गुणवत्ता में उतना सुधार होने के चांसेज होते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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