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World Asthma Day: क्या गर्मियों में भी अस्थमा अटैक का रहता है खतरा? सांस के मरीजों के लिए डॉक्टर की जरूरी सलाह

Tue, 05 May 2026 09:37 AM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

World Asthma Day 2026: अस्थमा अटैक केवल बाहरी कारणों से नहीं, बल्कि शरीर के अंदर होने वाले बदलावों से भी जुड़ा होता है। गर्मी में डिहाइड्रेशन, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और थकान भी सांस की तकलीफ को बढ़ा सकते हैं। गर्मियों में इस समस्या से बचाव के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए।
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गर्मियों में अस्थमा का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
आज विश्व अस्थमा दिवस है। दुनिया भर में श्वसन से संबंधित इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और रोगियों में इसकी देखभाल को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से हर साल मई महीने के पहले मंगलवार को वर्ल्ड अस्थमा डे मनाया जाता है।

सांस की नलियों में सूजन के कारण होने वाली ये बीमारी हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण भी बनती है। धूल-धुंआ, प्रदूषण के अलावा बदलते मौसम में भी अस्थमा के अटैक का खतरा काफी बढ़ जाता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी मरीजों को सांस की समस्याओं को ट्रिगर होने से बचाने के लिए उपाय करते रहने की सलाह देते हैं। कई रिपोर्ट्स बताते हैं कि सर्दी का मौसम अस्थमा रोगियों के लिए काफी कठिनाइयों वाला होता है, ऐसे में सवाल है कि क्या गर्मियां भी अस्थमा अटैक के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती है? 

चूंकि इन दिनों तापमान में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है तो क्या अस्थमा रोगियों को सावधान हो जाने की जरूरत है?
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सांस की समस्याओं का खतरा - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

राजधानी दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में इन दिनों पारा लगातार 40 के पार बना हुआ है, क्या बढ़ती गर्मी अस्थमा रोगियों के लिए खतरनाक है?
 
  • अमर उजाला से बातचीत में श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ सुरेंद्र सचान बताते हैं, ठंडा और गर्म दोनों ही मौसम अस्थमा रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है।
  • पर्यावरण और बढ़ते तापमान का सीधा असर श्वसन स्थितियों पर पड़ता है। 
  • गर्म मौसम, प्रदूषण और एलर्जी के स्तर में वृद्धि सीधे तौर पर अस्थमा अटैक के जोखिम को बढ़ाते हैं।

गर्म मौसम में वायुमार्ग के संकुचित होने का खतरा रहता है। प्रदूषकों (ओजोन) का स्तर बढ़ने और ह्यूमिडिटी बिगड़ने के कारण अस्थमा के अटैक का खतरा काफी बढ़ जाता है। ज्यादा गर्मी के दिनों में डिहाइड्रेशन होने का जोखिम भी अधिक देखा जाता रहा है जिससे फेफड़ों पर और अधिक दबाव पड़ता है। 
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गर्मियों में अस्थमा अटैक के मामले - फोटो : Freepik.com
बढ़ते तापमान से सांस की समस्याओं का खतरा

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जब तापमान बढ़ता है, तो हवा में ओजोन और पार्टिकुलेट मैटर  का स्तर भी बढ़ जाता है, जो फेफड़ों में सूजन और सांस लेने में तकलीफ पैदा करता है। ये सभी फैक्टर मिलकर अस्थमा के मरीजों के लिए ट्रिगर का काम करते हैं। 
 
  • इसके अलावा गर्मी में डिहाइड्रेशन, इलेक्ट्रोलाइट्स के असंतुलन और थकान के कारण भी सांस की तकलीफ बढ़ सकती है।
  • सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के डेटा के अनुसार, हीटवेव के दौरान अस्पतालों में अस्थमा से जुड़ी इमरजेंसी में 10-15% तक की वृद्धि देखी गई है। 
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सांस की समस्याओं से कैसे करें बचाव? - फोटो : Adobe Stock
गर्मियों में अस्थमा रोगी क्या उपाय करें?

डॉ सचान कहते हैं, अस्थमा के मरीजों को मौसम में होने वाले बदलाव के दिनों में सेहत को लेकर खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है। 
 
  • अस्थमा से बचाव के लिए सबसे पहले उन चीजों से दूरी बनाएं जो आपकी समस्या को ट्रिगर कर सकते हैं। 
  • घर के अंदर साफ-सफाई बनाए रखना जरूरी है। एयर कंडीशनर और कूलर के फिल्टर को नियमित साफ करें।
  • गर्मियों में हाइड्रेशन बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। पर्याप्त पानी पीने से म्यूकस पतला रहता है और सांस लेने में आसानी होती है। 
  • डॉक्टर की सलाह पर दवाओं और इनहेलर का नियमित उपयोग करें।
  • यदि बाहर जाना जरूरी हो, तो मास्क पहनें। यह धूल और एलर्जन से बचाव करता है।



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स्रोत
Summer Asthma and Warm Weather


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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