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Health Tips: किसी को भी हो सकता है आर्थराइटिस, ऐसी गड़बड़ आदतें समय से पहले बढ़ा देती हैं खतरा, रहें सावधान

Wed, 12 Oct 2022 10:39 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आर्थराइटिस की समस्या और बचाव के तरीके - फोटो : istock
आर्थराइटिस, जोड़ों में दर्द और सूजन की गंभीर समस्या है, जिसके मामले भारत में साल-दर-साल बढ़ते जा रहे हैं। आर्थराइटिस को गठिया के नाम से भी जाना जाता है। आमतौर पर आर्थराइटिस को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या के तौर पर जाना जाता रहा है, हालांकि कम आयु वाले लोगों में भी अब इस समस्या का जोखिम बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को उन उपायों को करते रहने की सलाह देते हैं जिससे इस गंभीर रोग के खतरे को कम किया जा सके। गठिया की समस्या जोड़ों में तेज दर्द, सूजन और जकड़न का कारण बनती है जिसके कारण लोगों के लिए चलना और सीढ़ियां चढ़ना तक काफी कठिन हो जाता है।

वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती इस समस्या के जोखिम को कम करने और इससे बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 12 अक्तूबर को वर्ल्ड आर्थराइटिस डे मनाया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ आर्थराइटिस के बढ़ते जोखिमों के लिए लाइफस्टाइल में गड़बड़ी, विशेषतौर पर सेंडेंटरी लाइफस्टाइल की आदतों को प्रमुख कारक के तौर पर देखते हैं।

इसके अलावा अध्ययनों में पाया गया है कि आहार में गड़बड़ी भी इस समस्या के जोखिम को बढ़ाने वाली हो सकती है, जिसके बारे में सभी लोगों को अलर्ट रहना चाहिए। आइए जानते हैं कि किन आदतों को लेकर सभी लोगों को लगातार सावधानी बरतते रहना चाहिए, जिससे गठिया की समस्या से बचाव किया जा सके?
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जोड़ों में दर्द होने के कारण - फोटो : istock
शारीरिक निष्क्रियता के कारण बढ़ रहा है गठिया का जोखिम

व्यायाम न करना या ऑफिस में लंबे समय तक बैठे रहने की आदत आपमें गठिया की समस्या के जोखिम को बढ़ा सकती है। शारीरिक निष्क्रियता के कारण जोड़ों की मांसपेशियां कठोर होने लगती हैं, जो आगे चलकर आर्थराइटिस के जोखिम को बढ़ाने का कारण बनती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यदि आप नियमित रूप से जिम नहीं जा पा रहे हैं तो भी हल्के स्तर के व्यायाम जैसे साइकिलिंग, वॉकिंग और तैराकी के माध्यम से भी शारीरिक रूप से सक्रियता बढ़ाकर गठिया के खतरे को कम कर सकते हैं।
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गठिया की समस्या होने के कारण - फोटो : Pixabay
पीठ पर भारी बोझ लेकर चलना

पीठ पर भारी बोझ लेकर चलना चाहे वह बैकपैक हो या ऑफिस बैग, आपकी गर्दन, कंधों और पीठ पर बहुत अधिक तनाव डाल सकता है। जब आप भारी वजन उठाते हैं, तो यह आपके संतुलन और यहां तक कि आपके चलने के तरीके को भी प्रभावित करता है।  इसका परिणाम यह होता है कि शरीर के उस तरफ की मांसपेशियों और जोड़ों पर दबाव अधिक हो जाता है। यह स्थिति उन मांसपेशियों के लिए तनाव की समस्या को बढ़ा देती है, जिससे जोड़ों में दर्द और सूजन हो सकता है, इस तरह की आदतों से बचें।

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धुम्रपान से कई प्रकार के रोगों का खतरा - फोटो : Pixabay
धूम्रपान और तंबाकू के कारण बढ़ता खतरा

तंबाकू उत्पाद न केवल फेफड़ों और हृदय की बीमारियों के जोखिम को बढ़ाते हैं, साथ ही इसके कारण जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्या होने का भी खतरा हो सकता है। अध्ययनों में पाया गया है कि धूम्रपान से निकलने वाला निकोटीन आपकी रीढ़ की हड्डी, ऊतकों और डिस्क में रक्त के प्रवाह को कम कर देता है। निकोटीन, कैल्शियम के अवशोषण को भी कम कर देता है।  सिगरेट पीने से हड्डी के नए ऊतकों के बनने में रुकावट आती है जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। धूम्रपान की आदत छोड़कर गठिया की समस्या के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
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बैठने की मुद्रा ठीक रखें - फोटो : iStock
बैठने-सोने के तरीके में करें सुधार

बैठने के तरीके में गड़बड़ी, खराब पोश्चर के कारण भी समय के साथ गठिया की समस्या विकसित होने का खतरा हो सकता है। खराब पोस्चर होने से आपके जोड़ों पर तनाव अधिक होने का खतरा रहता है इसके अलावा रक्त के संचार में कमी और मांसपेशियों में जकड़न की समस्या भी अधिक रहती है। यह सभी स्थितियां जोड़ों में दर्द और गठिया की समस्या को बढ़ाने वाली मानी जाती हैं। बैठने-सोने के तरीके में गड़बड़ी जोड़ों के साथ पीठ और रीढ़ की समस्याओं के जोखिम को भी बढ़ाने वाली मानी जाती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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