डॉ. सुशांत शिंदे, कंसल्टेंट फिजिशियन, क्वेस्ट क्लीनिक, मुंबई का कहना है, इस बीमारी में सबसे अहम चीज रूमेटोलॉजिस्ट की सलाह होती है। रूमेटोलॉजिस्ट ऐसा डॉक्टर है जो एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस से पीड़ित लोगों के इलाज के लिये विशेष रूप से प्रशिक्षित होता है। इसके लिए आज बायोलॉजिक्स थैरेपी जैसे इलाज के उन्नत विकल्प मौजूद हैं। नई दिल्ली में एम्स के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दानवीर भादू कहते हैं, एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस एक पुरानी और शरीर में कमजोरी लाने वाली बीमारी है। अलग-अलग कारणों से मरीजों को इसके बेहतर इलाज के विकल्प नहीं मिल पाते। बायोलॉजिक थेरेपी अपनाकर हम शरीर की संरचनात्मक प्रक्रिया में नुकसान को कम से कम कर सकते हैं। कई मरीज रीढ़ की हड्डी, घुटनों और जोड़ों में दर्द के इलाज के लिए अन्य तरीके अपनाने लगते हैं, जिससे लंबी अवधि बीतने के बाद भी मरीजों को रोग में कोई आराम नहीं पहुंचता। मरीजों में एलोपैथिक दवा के साइड इफेक्ट्स का डर और गैर-पारंपरिक दवाओं की शाखा जैसे होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक और यूनानी जैसी चिकित्सा विज्ञान की शाखाओं पर विश्वास अब भी बना है। वैकल्पिक दवाएं लेने से रीढ़ की हड्डी के बीच कोई दूसरी हड्डी पनपने का खतरा बना रहता है। इसके चलते वह हड्डी पूरी तरह सख्त हो जाती है और मरीज के व्हील चेयर पर आने का खतरा रहता है।