दिमाग की थ्योरी
नई रिसर्च के मुताबिक़, माहवारी पूरी होने के बाद औरतों में ख़ास तरह की जागरूकता बढ़ जाती है। माहवारी के तीन हफ़्ते बाद उनके कम्युनिकेशन स्किल बेहतर हो जाते हैं। जिन बातों को दूसरे लोग कहने में डरते हैं, उन्हें वो खुलकर कह देती हैं। जैसे ही माहवारी का नया चक्र शुरू होता है, उनका ज़हन तेज़ी से काम करना शुरू कर देता है।
पुराने दौर में लोग मानते थे कि औरत के मिज़ाज में ये बदलाव पेट में चल रही उथल-पुथल की वजह से होते हैं। जबकि इन बदलावों का सोर्स अंडाशय है, जहां ओएस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन नाम के दो हार्मोन पूरे महीने अलग-अलग मात्रा में निकलते रहते हैं और पेट की दीवार के चारों तरफ़ एक चादर बनाते हैं। यही हार्मोन फ़ैसला करते हैं कि अंडा कब तैयार करना है। इसी हार्मोन की वजह से औरत की सेहत और मिज़ाज दोनों पर असर पड़ता है।