Monsoon Health Tips: बारिश की ठंडी फुहारें राहत तो देती हैं, मगर वातावरण में नमी और उमस संक्रमण, त्वचा रोग, यूटीआई और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ा देती हैं।
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मानसून में महिलाओं को इन बीमारियों का सबसे ज्यादा खतरा
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Monsoon Health Tips: मानसून में बढ़ी हुई नमी, उमस और गंदगी कई बीमारियों को जन्म देती हैं। खास तौर पर महिलाओं में इस मौसम के दौरान त्वचा संक्रमण, फंगल इंफेक्शन, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई), डिहाइड्रेशन और पाचन से जुड़ी समस्याएं होती हैं, जिन्हें नजरअंदाज करने से ये समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं। ऐसे में महिलाओं को मानसून सीजन के दौरान विशेष सावधानी रखने की जरूरत होती है।
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मानसून में महिलाओं को इन बीमारियों का सबसे ज्यादा खतरा
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गर्मी और उमस के कारण
इस मौसम में वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जिससे त्वचा लंबे समय तक नम रहती है। यह स्थिति फंगस, बैक्टीरिया और अन्य संक्रमणों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण बना सकती है। इससे शरीर के कुछ हिस्सों जैसे- बगल, स्तनों के नीचे और त्वचा की सिलवटों में फंगस और बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। यही कारण है कि इस मौसम में महिलाओं में त्वचा संबंधी संक्रमण, खुजली, एलर्जी और अन्य समस्याएं अधिक होती हैं। पर्याप्त स्वच्छता न रखने पर संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।
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मानसून में महिलाओं को इन बीमारियों का सबसे ज्यादा खतरा
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उम्र के अनुसार चुनौतियां
किशोरियों में हार्मोनल बदलाव और शारीरिक गतिविधियों के कारण पसीना अधिक आता है, जिससे त्वचा और स्कैल्प संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। युवा महिलाओं में व्यस्त जीवन-शैली, काम का दबाव और स्वयं की देखभाल में कमी के कारण यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई), यीस्ट इंफेक्शन और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। वहीं गर्भवती महिलाओं में शरीर का तापमान बढ़ने और प्रतिरक्षा प्रणाली में बदलाव के कारण संक्रमण का जोखिम अधिक रहता है। रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में हार्मोनल परिवर्तन के चलते त्वचा और मूत्र मार्ग अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
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सावधानियां ही बचाव
इस मौसम में कुछ आसान सावधानियां अपनाकर बीमारियों से बचा जा सकता है। गर्मी और उमस से बचने के लिए प्रतिदिन स्नान करना, सूती कपड़े पहनना और पसीने वाले कपड़ों को तुरंत बदलना जरूरी है। यदि बारिश में भीग जाएं तो जल्द से जल्द कपड़े बदल लें और शरीर को अच्छी तरह सुखाएं। खीरा, ककड़ी, तरबूज, हरी सब्जियां खाएं। इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी, नारियल पानी, छाछ और ताजे फलों का सेवन शरीर को हाइड्रेट रखता है और संक्रमण के खतरे को कम करता है।
अत्यधिक तला-भुना, मसालेदार भोजन और अधिक चीनी वाले पेय पदार्थों और बाहर खुले में बिकने वाले कटे फल खाने से बचें। किसी भी प्रकार की खुजली, जलन, असामान्य स्राव या बार-बार पेशाब में जलन जैसी समस्या होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत योग्य चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
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स्वस्थ रहने का मंत्र
गर्मी और उमस से जुड़ी अधिकांश समस्याओं से बचाव संभव है, यदि महिलाएं व्यक्तिगत स्वच्छता, संतुलित आहार और पर्याप्त पानी पीएं। समय पर स्वास्थ्य जांच और किसी भी संक्रमण के लक्षण को नजरअंदाज न करना भी बेहद महत्वपूर्ण है। छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर आप इस मौसम में भी खुद को स्वस्थ, ऊर्जावान और संक्रमण मुक्त रख सकती हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।