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हेल्थ अलर्ट: डेंगू-मलेरिया के बाद कई हफ्तों तक क्यों बनी रहती है थकान? इन संकेतों को लेकर रहें सावधान

Tue, 29 Sep 2026 08:16 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Dengue Risk: डेंगू और मलेरिया से ठीक होने के बाद कुछ समय तक कमजोरी और थकान रह सकती है। मलेरिया में एनीमिया कमजोरी की वजह बन सकती है।
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डेंगू के बाद थकान - फोटो : Amarujala.com/AI
बीते-दिनों हुई बारिश के कारण कई स्थानों पर जलजमाव की स्थिति हो गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इससे मच्छरों के बढ़ने और डेंगू-मलेरिया के खतरे को लेकर अलर्ट कर रहे हैं। डेंगू-मलेरिया का बुखार वैसे तो ज्यादातर लोगों में हल्के लक्षणों वाला होता है और सामान्य उपचार से ठीक हो जाता है। हालांकि कुछ मामलों में ये बीमारियां गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण हो सकती हैं।

आमतौर पर डेंगू-मलेरिया में बुखार उतरने के बाद मान लिया जाता है कि बीमारी अब खत्म हो गई। लेकिन डेंगू जैसी बीमारी में खतरा बुखार उतरने के बाद ही सबसे ज्यादा देखा जाता है। इतना ही नहीं कुछ लोगों को बीमारी से ठीक होने के बाद लंबे समय तक शरीर में कमजोरी, थकान, चक्कर आने या काम करने की क्षमता कम महसूस हो सकती है। 

आइए जानते हैं कि बीमारी ठीक होने के बाद भी थकान-कमजोरी क्यों रहती है और इससे कैसे आराम पाया जा सकता है?
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बुखार ठीक होने के बाद थकान - फोटो : Adobe Stock
डेंगू के बाद होने वाली दिक्कतें

डेंगू के बाद लोगों में कई हफ्तों तक थकान बनी रह सकती है। मलेरिया में भी बीमारी के दौरान शरीर पर काफी दबाव पड़ता है। कुछ मामलों में एनीमिया भी हो सकती है, जिससे कमजोरी, चक्कर और सांस फूलने जैसी शिकायतें हो सकती हैं। इसलिए रिकवरी के दौरान शरीर को समय देना और ठीक होने के बाद भी कुछ संकेतों पर नजर रखना जरूरी है।
 
  • डेंगू के दौरान तेज बुखार, शरीर और जोड़ों में दर्द, सिरदर्द जैसी परेशानियां होती हैं।
  • शरीर इन समस्याओं से मुकाबले के दौरान काफी ऊर्जा खर्च करता है। यही कारण है कि बीमारी खत्म होने के बाद भी शरीर तुरंत पहले जैसी ताकत में नहीं लौट पाता।
  • डेंगू से ठीक होने के बाद कई हफ्तों तक थकान रह सकती है। इसलिए बुखार उतरते ही बहुत ज्यादा मेहनत नहीं शुरू करनी चाहिए।
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थकान-कमजोरी की समस्या - फोटो : Freepik.com
मलेरिया के बाद कमजोरी की वजह बन सकती है एनीमिया

मलेरिया में परजीवी संक्रमण का असर लाल रक्त कोशिकाओं पर पड़ सकता है, यही कारण है कि कई लोगों में एनीमिया की समस्या हो सकती है। शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं और हीमोग्लोबिन कम होने पर ऑक्सीजन का संचार प्रभावित हो सकता है।
 
  • इससे थकान, कमजोरी, चक्कर और थोड़ी मेहनत पर सांस फूलने जैसी शिकायतें हो सकती हैं। 
  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, मलेरिया को एनीमिया का खतरा बढ़ाने वाला भी माना जाता है। 
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बीमारी से ठीक होने के बाद सावधानियां - फोटो : Freepik.com
इन बातों का रखें खास ध्यान

डेंगू में एक खास बात ध्यान रखना जरूरी है। बुखार कम होने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि खतरा पूरी तरह खत्म हो गया। बीमारी के लगभग 3-7वें दिन जब तापमान कम होने लगता है तो कुछ मरीजों में गंभीर लक्षण सामने आ सकते हैं। इस दौरान पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, तेजी से सांस लेने, मसूड़ों या नाक से खून आने जैसे लक्षण हों तो तुरंत डॉक्टर से सहायता लेनी चाहिए।
 
  • अगर डेंगू-मलेरिया बीमारी ठीक होने के बाद भी कमजोरी लगातार बनी हुई है या रोजमर्रा के काम मुश्किल हो रहे हैं तो इसे केवल बीमारी के बाद की सामान्य कमजोरी मानकर इग्नोर न करें
  • मलेरिया के बाद लगातार बुखार या ठंड लगने पर दोबारा जांच की जरूरत हो सकती हैं, डॉक्टर जरूरत पड़ने पर एनीमिया की भी जांच कर सकते हैं, इसलिए बीमारी से ठीक होने के बाद भी विशेष सावधानी बरतते रहना जरूरी है।  




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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